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Heart Disease in Women: मुंबई के सायन अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार पिछले 2 साल में महिलाओं में कार्डियक प्रोसीजर के मामलों में 20% की बढ़ोतरी हुई है. लंबे समय से माना जाता रहा है कि एस्ट्रोजन हार्मोन महिलाओं के दिल की रक्षा करता है, लेकिन तनाव, डायबिटीज और प्रदूषण जैसे फैक्टर्स से यह सुरक्षा कवच अब टूट रहा है.
महिलाओं में हार्ट डिजीज के मामले लगातार बढ़ रहे हैं.
Heart Health Crisis Among Women: दुनियाभर में हार्ट से जुड़ी समस्याएं मौत का सबसे बड़ा कारण हैं. हर साल करोड़ों की संख्या में लोग कार्डियोवैस्कुलर डिजीज के कारण अपनी जान गंवा देते हैं. अब तक माना जाता रहा है कि महिलाओं के शरीर में बनने वाला एक हार्मोन एस्ट्रोजन उनके दिल के चारों ओर एक कवच की तरह काम करता है. इससे महिलाओं को हार्ट से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं. अब महिलाओं का यह कवच टूटता हुआ नजर आ रहा है. मुंबई के सायन अस्पताल के नए आंकड़े बता रहे हैं कि पिछले 2 साल में दिल की बीमारी वाली महिलाओं की संख्या 20% बढ़ गई है. पहले माना जाता था कि बुढ़ापे में दिल की बीमारी होती है, लेकिन अब 20 से 40 साल की जवान महिलाएं भी अस्पताल पहुंच रही हैं. हालांकि सबसे ज्यादा खतरा 50 से 60 साल की उम्र में देखा गया है, लेकिन कम उम्र की महिलाओं का ऑपरेशन होना चिंता की बात है.
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई के सायन अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार पिछले 2 साल में महिलाओं में कार्डियक प्रोसीजर (Cardiac Procedures) में लगभग 20% की बढ़ोतरी देखी गई है. आसान भाषा में समझें, तो जब दिल की नसों में ब्लॉकेज हो जाए या दिल सही से काम न करे, तो उसे ठीक करने के लिए डॉक्टर ऑपरेशन या रिपेयरिंग का काम करते हैं. इसे कार्डियक प्रोसीजर कहते हैं. इसमें एंजियोप्लास्टी, स्टेंट डालना या पेसमेकर लगाने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं. यह साफ संकेत है कि महिलाओं का नेचुरल सुरक्षा कवच कमजोर पड़ रहा है और वे पहले के मुकाबले हार्ट डिजीज का ज्यादा शिकार हो रही हैं.
सायन अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं में कार्डियक प्रोसीजर की संख्या साल 2023 में 742 थी, जो 2025 में बढ़कर 884 हो गई है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हार्ट डिजीज अब केवल बुजुर्ग महिलाओं तक सीमित नहीं हैं. 20 से 40 वर्ष की आयु वाली युवा महिलाएं भी दिल से जुड़े ट्रीटमेंट से गुजर रही हैं. हालांकि सबसे अधिक प्रभावित आयु वर्ग 50 से 60 वर्ष का है. कुल प्रोसीजर्स में से लगभग 20% मामले कोरोनरी एंजियोप्लास्टी के थे, जो सीधे तौर पर दिल के दौरे यानी हार्ट अटैक से जुड़े होते हैं. इस बदलते पैटर्न ने यह साफ कर दिया है कि अब कोई भी आयु वर्ग या जेंडर सुरक्षित नहीं है.
सायन अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. प्रताप नाथानी ने TOI को बताया कि अस्पताल आने वाली अधिकांश महिलाओं को खुद यह अहसास ही नहीं था कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा है. अक्सर महिलाएं अपने स्वास्थ्य की अनदेखी करती हैं और जिम्मेदारियों के बीच लक्षणों को इग्नोर कर देती हैं. इससे सही समय पर इलाज नहीं हो पाता है. महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों की तरह केवल छाती में तेज दर्द तक सीमित नहीं होते हैं. महिलाओं को एसिडिटी, थकान, पीठ दर्द, पेट दर्द, जबड़े या गर्दन में दर्द, मतली, फ्लू जैसे लक्षण और यहां तक कि घबराहट महसूस हो सकती है. इन लक्षणों को अक्सर एसिडिटी या सामान्य कमजोरी समझकर भ्रमित कर दिया जाता है, जिससे इलाज में देरी होती है और स्थिति गंभीर हो जाती है.
डॉक्टर्स की मानें तो महिलाओं में हार्ट डिजीज बढ़ने की सबसे बड़ी वजह डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और तंबाकू का सेवन है. इसके अलावा तनाव भी एक बड़ी भूमिका निभा रहा है. हार्ट डिजीज के लगभग 16% मामलों में तनाव एक बड़ा फैक्टर बनकर सामने आया है. एयर पॉल्यूशन जैसे बाहरी फैक्टर्स को भी दिल से जुड़ी समस्याओं से जोड़कर देखा जा रहा है. महिलाएं एसिडिटी या सांस फूलने जैसे छोटे दिखने वाले संकेतों को भी गंभीरता से लें. समय पर स्वास्थ्य जांच, तनाव मैनेजमेंट और लाइफस्टाइल में सुधार ही इस बढ़ते खतरे से बचने का एकमात्र तरीका है.
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अमित उपाध्याय Bharat.one Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें
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