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Diabetes Control with Ayurveda Health Tips: भरतपुर में मधुमेह के मामले 20% बढ़ गए हैं, जिसका मुख्य कारण बिगड़ी हुई जीवनशैली और शारीरिक मेहनत की कमी है. आयुर्वेद डॉक्टर ज्योति ने बताया कि योग, संतुलित सात्विक आहार और नियमित ब्लड शुगर मॉनिटरिंग के माध्यम से इस बीमारी को सुरक्षित रूप से नियंत्रित किया जा सकता है.
भरतपुर, राजस्थान. आधुनिकता और तकनीक के इस युग में जहाँ सुख-सुविधाएं बढ़ी हैं, वहीं मनुष्य के स्वास्थ्य पर ‘मधुमेह’ (Diabetes) के रूप में एक बड़ा संकट भी खड़ा हो गया है. भरतपुर जिले में हाल ही में स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञों द्वारा किए गए विश्लेषण में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि यहाँ मधुमेह के मामलों में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. चिंता की बात यह है कि यह बीमारी अब उम्र की सीमाएं लांघ चुकी है और बुजुर्गों के साथ-साथ युवाओं और छोटे बच्चों को भी अपना शिकार बना रही है. समय की कमी, तनावपूर्ण काम, असंतुलित खानपान और शारीरिक व्यायाम से बढ़ती दूरी ने इस ‘साइलेंट किलर’ को हर घर का हिस्सा बना दिया है. यदि समय रहते जन-जागरूकता और जीवनशैली में बदलाव नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह जिला स्वास्थ्य के मोर्चे पर बड़ी मुश्किलों का सामना कर सकता है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल और स्क्रीन पर घंटों बिताना और फास्ट फूड का बढ़ता चलन ही इस बीमारी के फैलने का मुख्य आधार है. भरतपुर की आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. ज्योति ने ‘Bharat.one’ से विशेष बातचीत में बताया कि भारत वर्तमान में वैश्विक स्तर पर मधुमेह के मामलों में दूसरे स्थान पर पहुँच चुका है. डॉ. ज्योति के अनुसार, लोगों में दिन में सोने की आदत, रात को देर तक जागना और शारीरिक परिश्रम का अभाव ही इस बीमारी की जड़ है. उन्होंने चेतावनी दी है कि डायबिटीज केवल एक बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों जैसे आंखों, गुर्दों (Kidneys) और हृदय को भी धीरे-धीरे खोखला कर देती है. इसलिए इसकी समय पर पहचान और नियंत्रण ही एकमात्र बचाव है.
आयुर्वेद: बचाव और नियंत्रण का प्राकृतिक मार्ग
डॉ. ज्योति ने बताया कि आयुर्वेद में मधुमेह को ‘प्रमेह’ की श्रेणी में रखा गया है और इसके लिए बहुत ही सरल और प्रभावी उपचार मौजूद हैं. उन्होंने जोर दिया कि मधुमेह नियंत्रण के लिए दवाओं से पहले अनुशासन की आवश्यकता होती है. आयुर्वेद के अनुसार, नियमित फिजिकल एक्टिविटी जैसे योग, प्राणायाम और प्रतिदिन कम से कम 30-40 मिनट की सैर रक्त में शर्करा के स्तर को संतुलित रखने में सर्वाधिक सहायक होती है. डॉ. ज्योति के अनुसार, सुबह खाली पेट ताजे नीम और गिलोय का सेवन या जामुन के बीज का पाउडर भी शुगर को नियंत्रित करने में अद्भुत परिणाम देता है. यह चिकित्सा पद्धति केवल लक्षणों का इलाज नहीं करती, बल्कि शरीर की आंतरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर उसे फिर से ऊर्जावान बनाती है.
खानपान और मॉनिटरिंग है बेहद जरूरी
डायबिटीज के मरीजों के लिए खानपान में अनुशासन ही सबसे बड़ी दवा है. डॉ. ज्योति ने सलाह दी है कि ताजा और सात्विक भोजन ही दीर्घायु का आधार है. जंक फूड, अत्यधिक मीठे और मैदे से बनी वस्तुओं से दूरी बनाना अनिवार्य है. इसके साथ ही, मौसम के अनुसार अपने आहार में बदलाव करना चाहिए और मौसमी फलों व सब्जियों को प्राथमिकता देनी चाहिए. ब्लड शुगर की नियमित मॉनिटरिंग करना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि शरीर में होने वाले उतार-चढ़ाव का समय पर पता चल सके. डॉ. ज्योति का मानना है कि यदि लोग अपनी दिनचर्या में अनुशासन अपनाएं, नियमित व्यायाम करें और आयुर्वेद के सिद्धांतों का पालन करें, तो मधुमेह जैसी गंभीर बीमारी के साथ भी एक स्वस्थ और लंबा जीवन जीना संभव है.
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Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-diabetes-increase-ayurveda-health-tips-dr-jyoti-bharatpur-local18-10124152.html
