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बागेश्वर: दांतों का दर्द अचानक उठने वाला ऐसा संकट है, जो रोजमर्रा के कामों से लेकर नींद तक प्रभावित करता है. लेकिन, अगर आप पहाड़ों या मैदानी क्षेत्रों में अपने घर की रसोई में देखें, तो एक ऐसा मसाला जरूर मिलेगा जो इस दर्द में तुरंत राहत दिला सकता है लौंग का तेल.
दांतों का अचानक उठने वाला दर्द रोजमर्रा के कामों को बाधित कर देता है. ऐसे में घर की रसोई में रखा साधारण सा मसाला, लौंग, तुरंत असर दिखाने वाले उपायों में से एक माना जाता है. आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. संगीता के अनुसार, लौंग के तेल में मौजूद यूजेनॉल तत्व एंटीसेप्टिक और दर्द निवारक के रूप में काम करता है. पहाड़ी क्षेत्रों में लोग इसे पीढ़ियों से इस्तेमाल करते आए हैं. किसी भी प्रकार के तेज दर्द, सूजन या दांत में कीड़ा लगने की स्थिति में इसकी कुछ बूंदें काफी राहत देती हैं. यही कारण है कि आज भी लौंग घरेलू नुस्खों में सबसे प्रभावी माना जाता है.
लौंग का तेल आमतौर पर भाप आसवन विधि से तैयार किया जाता है. पहाड़ों के कई इलाकों में लोग इसे घरेलू स्तर पर भी बनाते हैं. सूखी लौंग को पहले हल्का कुचला जाता है, फिर इसे गर्म पानी की भाप में रखा जाता है, जिससे इसमें मौजूद प्राकृतिक तेल निकल आता है. आधुनिक कंपनियां भी इसी तकनीक का प्रयोग करती हैं, हालांकि वे अधिक शुद्धता के लिए मशीनों की मदद लेती हैं. इस तेल में लगभग 70–85% तक यूजेनॉल पाया जाता है, जो इसकी औषधीय शक्ति का मुख्य घटक है. इसलिए घरों में इसे दर्द के त्वरित उपचार के लिए हमेशा रखा जाता है.
लौंग का तेल बेहद तेज और सघन होता है, इसलिए इसे गहरे रंग की कांच की छोटी बोतलों में पैक किया जाता है. इससे इसकी गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है. स्टोर करने के लिए इसे धूप और गर्मी से दूर, ठंडी जगह पर रखना आवश्यक है. पहाड़ों में लोग इसे छोटे सीलबंद डिब्बों में रखते हैं ताकि हवा के संपर्क से इसकी प्रभावशीलता कम न हो. बाजार में मिलने वाला तेल भी अक्सर ड्रॉपर के साथ आता है, जिससे नियंत्रित मात्रा में बूंदें इस्तेमाल की जा सकें. सही तरह से स्टोर किया गया लौंग तेल 12–18 महीने तक उपयोग में लाया जा सकता है.
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दांत दर्द में लौंग के तेल का उपयोग बेहद सरल है. एक साफ़ रुई का छोटा टुकड़ा लें और उस पर 1–2 बूंदें लौंग के तेल की डालें. इसे सीधे दर्द वाले दांत या मसूड़े पर हल्के से लगाएं. पांच से दस मिनट के भीतर हल्की जलन महसूस होने के बाद दर्द में राहत मिलने लगती है. यदि बदबू या कीड़ा लगने की समस्या हो, तो इसे कुछ दिनों तक दिन में दो बार दोहराया जा सकता है. पहाड़ों में बुजुर्ग इसे सबसे कारगर और सुरक्षित घरेलू उपाय मानते हैं, खासकर तब जब तुरंत डॉक्टर तक पहुंचना संभव न हो.
लौंग का तेल सिर्फ दांत दर्द में ही नहीं, बल्कि कई मुख संबंधी समस्याओं में भी लाभकारी है. दांत में कीड़ा लगने, मसूड़ों की सूजन, पायरिया जैसी शुरुआती परेशानियों और मुंह की दुर्गंध में यह प्रभावी माना जाता है. इसके एंटीसेप्टिक गुण बैक्टीरिया को रोकते हैं, जबकि पेनकिलर प्रभाव दर्द को कम करता है. पहाड़ी ग्रामीण क्षेत्रों में इसे मसूड़ों की मालिश के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा मामूली संक्रमण या छाले में भी इसकी थोड़ी मात्रा राहत पहुंचाती है. प्राकृतिक होने के कारण इसके दुष्प्रभाव भी बहुत कम देखे जाते हैं.
कुमाऊं के पहाड़ी इलाकों में लौंग का तेल वर्षों से घरेलू उपचार में शामिल है. बुजुर्ग बताते हैं कि जब चिकित्सा सुविधाएं सीमित थीं, तब दांत के किसी भी दर्द का पहला इलाज यही माना जाता था. शादी-ब्याह या पर्व-त्योहारों के दौरान भी लोग इसे घर में जरूर रखते थे. लांछन, कीड़ा लगना या ठंड के कारण होने वाले दर्द में इसका उपयोग आम था. इसकी खास बात यह थी कि यह प्राकृतिक, सस्ता और तुरंत असर दिखाने वाला उपाय है. इसलिए आज भी पहाड़ों में लोग आधुनिक दवाइयों के साथ इसे घर में जरूर रखते हैं.
लौंग का तेल बहुत तेज होता है, इसलिए इसे सीधे दांत या जीभ पर अधिक मात्रा में लगाना उचित नहीं है. 1–2 बूंदें ही पर्याप्त होती हैं. बच्चों के लिए इसका उपयोग बहुत हल्की मात्रा में किया जाता है. अगर मसूड़े अत्यधिक संवेदनशील हों तो इसे नारियल या सरसों के तेल में मिलाकर लगाया जाता है. गर्भवती महिलाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के इसका अधिक उपयोग नहीं करना चाहिए. यह केवल अस्थायी राहत देता है, इसलिए लगातार दर्द, सूजन या पस बनने की स्थिति में दंत चिकित्सक से जांच कराना आवश्यक है.
बाजार में मिलने वाले केमिकल आधारित दंत उत्पादों के बीच लोग अब फिर से प्राकृतिक विकल्पों की ओर लौट रहे हैं. यही कारण है कि लौंग के तेल की मांग बढ़ रही है. इसकी कीमत किफायती है और उपयोग बेहद आसान होने के कारण लोग इसे घर की फर्स्ट-एड किट में शामिल करने लगे हैं. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी इसके कई शुद्ध और ऑर्गेनिक विकल्प उपलब्ध हैं. पहाड़ों में आज भी मान्यता है कि लौंग का तेल तेज़ और सुरक्षित असर देता है. प्राकृतिक स्वाद और जल्द राहत इसे हर उम्र के लोगों के लिए उपयोगी बनाते हैं.
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