15-16 साल की उम्र होने पर भी पीरियड न आना, ब्रेस्ट का साइज न बढ़ना, अंदर से लड़कों जैसा महसूस होना, आदि ऐसे लक्षण हैं, जो समाज में शर्मिंदगी और स्टिग्मा के रूप में देखे जाते हैं, या फिर इन्हें ट्रांसजेंडर समुदाय से जोड़ दिया जाता है. जबकि एम्स नई दिल्ली के डॉक्टरों की मानें तो ये सभी एक बीमारी के लक्षण हैं, जिसे डीएसडी यानि डिसऑर्डर ऑफ सेक्स डेवलपमेंट कहा जाता है और इसका 100 फीसदी सफल इलाज मौजूद है. यह बीमारी हर 4 से 5 हजार बच्चों में से एक को होती है और दिल्ली एम्स में हर साल ऐसे हजारों केस आ रहे हैं. एम्स के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास और पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजी की इंचार्ज डॉक्टर वंदना जैन ने इस डिसऑर्डर के बारे में सभी जरूरी बातें बताई हैं.. साथ ही बताया है कि यह सिर्फ लड़कियों में ही नहीं बल्कि लड़कों में भी हो सकता है, जिसके लक्षणों में उनमें टेस्टीज का विकसित न होना या पीरियड्स की तरह ब्लीडिंग आदि होना शामिल है…. आइए वीडियो में विशेषज्ञों से जानते हैं, ये बीमारी क्या है और कैसे बिना समाज और मोहल्ले की परवाह किए इसका इलाज कराने के लिए आगे आएं…
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https://hindi.news18.com/videos/health/what-is-disorder-of-sex-development-in-girls-and-boys-dsd-symptoms-and-treatment-by-aiims-director-m-srinivas-and-dr-vandana-jain-watch-video-10024709.html


















