Health News: Bharat.one ने निमाड़ के जाने-माने शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवशंकर गुर्जर से बदलते मौसम में बच्चों को खांसी-जुकाम ओर कफ सिरप के बारे में जाना डॉक्टर शिव शंकर गुर्जर ने कहा खासी होना आम बात है, लेकिन कई बार माता-पिता बिना डॉक्टर की सलाह के सीधे मेडिकल से कफ सिरप खरीदकर बच्चों को दे देते हैं. यह लापरवाही बच्चों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है. तो चलिए जानते हैं डॉ. गुर्जर से कि बच्चों को कफ सिरप देते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
—डॉ. शिवशंकर गुर्जर ने Bharat.one से बातचीत में कहा कि ध्यान रखने की सबसे पहली बात यह है कि हर खांसी के लिए एक जैसी कफ सिरप नहीं दी जा सकती. खांसी कई प्रकार की होती है – सूखी, गीली, एलर्जिक, वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण वाली. सभी के लिए अलग-अलग दवा होती है. इसलिए किसी भी सिरप को सिर्फ नाम या ब्रांड देखकर खरीदना गलत है. डॉक्टर ही जांच कर के तय कर सकता है कि बच्चे को किस प्रकार की खांसी है और उसके लिए कौन-सी सिरप उपयुक्त रहेगी. सिरप का चुनाव बच्चे की उम्र, वजन और बीमारी की गंभीरता के आधार पर किया जाना चाहिए.
प्रश्न 2: किन प्रकार की कफ सिरप नहीं लेनी चाहिए और अगर लेनी ही हो तो किन बातों का ध्यान रखें?
—-डॉक्टर कहते है कि छोटे बच्चों के लिए विशेष रूप से सावधानी जरूरी है. छह साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप देने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य है. कई बार बाजार में मिलने वाली कफ सिरप में ऐसे तत्व होते हैं जो बच्चों के लिए हानिकारक हो सकते हैं, जैसे सिडेटिव्स या एल्कोहल बेस्ड तत्व.
यदि किसी वजह से सिरप लेनी भी पड़े, तो यह देखना चाहिए कि वह पैडियाट्रिक (बच्चों के लिए बनी) है, उसकी डोज़िंग स्पष्ट है और उसमें किसी भी तरह का हानिकारक केमिकल नहीं है. लेकिन फिर भी सलाह यही है कि डॉक्टर के बिना सलाह कोई सिरप न दी जाए.
प्रश्न 3: अगर कोई डायरेक्ट मेडिकल स्टोर से कफ सिरप खरीदता है, तो उसे किन बातों की जानकारी होनी चाहिए?
—-डॉक्टर शिवशंकर गुर्जर कहते है कि सबसे पहले तो बिना डॉक्टर की पर्ची के सिरप खरीदने से बचें. फिर भी अगर मेडिकल से लेना ही पड़ जाए तो सिरप की एक्सपायरी डेट, उसकी पैकिंग, उसके कंपोजिशन, और डोज की जानकारी जरूर पढ़ें. कई बार एक ही नाम की सिरप अलग-अलग फॉर्म में आती है – जैसे बच्चों के लिए अलग और बड़ों के लिए अलग. ऐसी गलती से डोज़ ज्यादा हो सकती है जो बच्चे के लिए नुकसानदायक है.
प्रश्न 4: कफ सिरप देते समय कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए?
1. सिरप देने से पहले शिशु रोग विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है.
2. माप कर ही डोज दें. “थोड़ा-थोड़ा” करके देने की आदत बहुत नुकसानदेह हो सकती है.
3. सिरप देने से पहले शेक करना न भूलें, क्योंकि कई बार दवा नीचे बैठ जाती है.
4. अगर बच्चा पहले से कोई और दवा ले रहा है, तो सिरप उसमें रिएक्शन न करे, इसका ध्यान रखें.
5. अगर सिरप देने के बाद उल्टी, चक्कर, नींद ज्यादा आना, सांस लेने में दिक्कत जैसी कोई शिकायत हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.
प्रश्न 5: माता-पिता कई बार डोज़ अधिक दे देते हैं, इसका बच्चों पर क्या असर होता है और इससे कैसे बचा जाए?
—डॉक्टर शिवशंकर गुर्जर कहते है कि यह बहुत गंभीर समस्या है. बच्चे की उम्र और वजन के हिसाब से अगर डोज़ तय न हो तो:उसे सांस लेने में तकलीफ हो सकती है अत्यधिक नींद या बेहोशी आ सकती हैनिमोनिया या ऑक्सीजन की जरूरत तक पड़ सकती है.और दुर्भाग्यवश, कुछ मामलों में जिंदगी पर भी खतरा हो सकता है इसलिए कभी भी अंदाजा लगाकर सिरप न दें. डॉक्टर द्वारा बताए गए माप के अनुसार ही दवा दें. अगर सिरप में मापने वाली कैप या स्पून दी गई हो तो उसी का उपयोग करें.
विशेष चेतावनी – डॉक्टर की सलाह के बिना दवा देना खतरनाक
—डॉ. शिवशंकर गुर्जर ने विशेष रूप से कहा कि वर्तमान समय में वायरल निमोनिया, एलर्जिक ब्रॉन्काइटिस और मौसम बदलने से खांसी-जुकाम के मामले बढ़ रहे हैं. ऐसे में अगर बच्चा लगातार खांस रहा है, बुखार है या सांस लेने में तकलीफ है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें. घरेलू नुस्खों या इंटरनेट से देख कर कोई दवा देना सही तरीका नहीं है.
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-5-things-to-consider-when-prescribing-cough-syrup-for-children-advises-pediatrician-dr-shivshankar-gurjar-local18-9698603.html

















