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The Best Metals for Cooking: आयुर्वेद के अनुसार जिस धातु के बर्तन में खाना पकाया या परोसा जाता है, वह खाने की गुणवत्ता और स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है. पीतल, कांसा, मिट्टी, लोहे और तांबे के बर्तन खाने को ज्यादा पौष्टिक बनाते हैं. ये बर्तन पाचन सुधारते हैं, हीमोग्लोबिन बढ़ाते हैं, शरीर को मिनरल्स प्रदान करते हैं और इम्यूनिटी मजबूत करते हैं. सही धातु के बर्तनों का उपयोग खाने को औषधि जैसा प्रभावी बना सकता है.
Best Utensils for Health: खाना हमारी सेहत के लिए बेहद जरूरी होता है. अक्सर लोग इस पर बात करते हैं कि खाने में क्या खाना हेल्दी रहता है, लेकिन इस पर कम बात होती है कि खाना किस बर्तन में पकाना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार अगर आप सही बर्तन में खाना पकाएंगे, तो उसका स्वाद बढ़ जाए और वह शरीर के लिए औषधि समान हो जाएगा. इससे आपको कई बीमारियों से राहत मिल जाएगी और पोषक तत्वों की कमी भी दूर हो जाएगी. आयुर्वेद एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जिस धातु के बर्तन में खाना बनता है, वह खाने की क्वालिटी को 30 से 40% तक प्रभावित करता है. आजकल की मॉडर्न किचन में स्टील, नॉन-स्टिक और एल्युमिनियम बर्तन दिखते हैं, लेकिन स्वास्थ्य के लिए कुछ खास धातुएं सबसे अच्छी मानी गई हैं.
खाना पकाने के लिए बेस्ट हैं 5 धातुओं के बर्तन
आयुर्वेद के अनुसार पीतल के बर्तनों को खाना पकाने के लिए सबसे अच्छा माना गया है. पीतल भोजन में सत्व बढ़ाता है, पित्त संतुलित करता है और पाचन सुधारता है. पीतल के बर्तन में बनी दाल या खिचड़ी में प्रोटीन और अन्य कई पोषक तत्वों की बायो अवेलेबिलिटी लगभग 30 प्रतिशत तक बेहतर होती है. यही कारण है कि पुराने समय में हर घर में दाल पीतल के भगोने में बनाई जाती थी. पीतल से बने बर्तन दाल, सब्जी और कढ़ी बनाने के लिए सर्वोत्तम हैं.
कांसा को आयुर्वेद में इम्यूनिटी मजबूत करने और पाचन सुधारने वाला धातु माना गया है. कांसा त्रिदोष-नाशक होता है और वात-पित्त को संतुलित करता है. इसके थालियों और कटोरियों में रखा खाना अधिक समय तक सुरक्षित रहता है. कई रिसर्च में भी पाया गया है कि कांसे की थाली में खाना खाने से जठराग्नि बढ़ती है और हीमोग्लोबिन में सुधार होता है. अगर नियमित रूप से कांसे के बर्तनों में खाना खाएंगे, तो सेहत में सुधार हो जाएगा.
सेहत के लिए मट्टी के बर्तनों को भी बेहद लाभकारी माना गया है. आयुर्वेद के अनुसार मिट्टी के बर्तनों में खाना धीमी आंच पर पकता है, जिससे पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं और भोजन हल्का अल्कलाइन बनता है. दाल, खिचड़ी, बिरयानी और दही बनाने के लिए मिट्टी के बर्तन सर्वोत्तम हैं. दही में प्रोबायोटिक्स की मात्रा मिट्टी के बर्तन में सबसे अधिक पाई जाती है.
लोहे के बर्तन आयरन की प्राकृतिक पूर्ति देते हैं. आयुर्वेद में लोहमय पका खाना रक्तवर्धक माना गया है. लोहे की कड़ाही में पकी पालक या दाल में 8 से 10 मिलीग्राम अतिरिक्त आयरन मिलता है, जो किसी सप्लीमेंट से भी अधिक बायोअवेलेबल होता है. यह विशेष रूप से महिलाओं में हीमोग्लोबिन सुधारने में मदद करता है.
तांबे के बर्तन का उपयोग मुख्य रूप से पानी शुद्ध करने के लिए किया जाता है. तांबे का जल पाचन और लिवर डिटॉक्स के लिए उत्तम होता है. कांसे और तांबे के बर्तनों में रखा पानी 99 प्रतिशत माइक्रोऑर्गेनिज्म को नष्ट कर देता है. हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट खाना बनाने और पकाने के लिए एल्युमिनियम, नॉन-स्टिक और सस्ते स्टील के बर्तनों को अच्छा नहीं मानते हैं.
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अमित उपाध्याय Bharat.one Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें
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