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मोबाइल के अधिक इस्तेमाल को लेकर डॉक्टर अंकित सिंह ने खास सलाह दी है. मोबाइल के अधिक प्रयोग ने लोगों को उनके अपने ही घर में अकेला कर दिया. मोबाइल का सबसे अधिक प्रयोग अब बच्चों पर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है.
झांसी: मोबाइल जितना अधिक आम और खास लोगों के लिए सहूलियत का माध्यम बना, अब उससे कहीं ज्यादा नुकसान की बड़ी वजह बनकर सामने आ रहा है. लोगों के जीवन में मोबाइल की अहमियत इतनी अधिक बढ़ गई है कि लोग मोबाइल के बगैर एक पल भी नहीं रह सकते हैं. हाथ में अगर मोबाइल नहीं है तो लोग खुद को अधूरा सा महसूस करते हैं. मोबाइल के अधिक प्रयोग ने लोगों को उनके अपने ही घर में अकेला कर दिया. मोबाइल का सबसे अधिक प्रयोग अब बच्चों पर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है.
आज की डिजिटल युग में बच्चे सबसे पहले सो कर उठते हैं तो उनके हाथों में मोबाइल आसानी से देखा जा सकता है. रात में सोते समय भी बच्चे कई घंटे तक मोबाइल में गेम खेलते रहते हैं या फिर सोशल प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग कार्यक्रमों को देखते रहते हैं. मतलब यह कहा जा सकता है कि बच्चे अब किताबों से पहले मोबाइल स्क्रीन को अपने जीवन का अहम हिस्सा बनाते जा रहे हैं.
बच्चों की सेहत पर क्या प्रभाव?
घंटों सोशल मीडिया पर वीडियो और वीडियो गेम्स में बच्चे खुद को इतना अधिक व्यस्त रखते हैं कि बच्चों की पलके भी नहीं झपकती हैं. ऐसे में बच्चों की सेहत पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, मोबाइल के लती बच्चे आखिर क्यों कम उम्र में ही चश्मा लगा ले रहे हैं, उनके स्वास्थ्य पर क्यों इतना अधिक असर पड़ने लगा है. इसको Bharat.one ने स्पेशलिस्ट डॉक्टर अंकित सिंह से बातचीत की.
Bharat.one से बातचीत के दौरान डॉक्टर अंकित सिंह ने बताया कि मोबाइल की रोशनी और रेडिएशन का बच्चों के शरीर और आंखों पर जबरदस्त असर देखा जा रहा है. बच्चों की गर्दन और पेट में दर्द सामान्य बात हो गई है. बच्चों में नींद की कमी आने से बच्चे चिड़चिड़ा रहे हैं. लगातार मोबाइल देखने से बच्चों की आंखें ही नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, दोनों पर खासा असर पड़ रहा है.
आउटडोर की दुनिया से टूटे बच्चे
मोबाइल में व्यस्त रहने से बच्चे घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं. आउटडोर की दुनिया से बच्चों का संपर्क लगभग टूटता जा रहा है. बच्चों ने खेलना, दौड़ना और परिवार से बातचीत करना भी लगभग बंद कर दिया है. अंकित सिंह ने सलाह देते हुए कहा कि बच्चों को कम से कम समय तक के लिए मोबाइल दिया जाए. सोने से पहले बच्चों को मोबाइल बिल्कुल भी नहीं देना चाहिए. मोबाइल से कहीं अधिक माता-पिता अपने बच्चों को घर के बाहर ले जाकर पार्क या फिर किसी ऐसी जगह घुमाया करें, जहां बच्चे शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से मजबूत हों.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Bharat.one से जुड़ गए.
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-bright-light-of-mobile-phone-negative-impact-on-eyes-of-children-know-by-expert-local18-10013281.html
