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Which Foods Causes Changes In Skin Color: पोषण विज्ञान के कई शोध में इसका संकेत मिलता है. कुछ फल और सब्जियां ऐसे हैं जिसे अगर जरूरत से ज्यादा खाया जाए तो वो त्वचा के रंग में अस्थायी बदलाव ला सकती हैं. ऐसा सब्जियों और फलों में मौजूद नेचुरल पिगमेंट के कारण होता है.
यह सुनने में भले अजीब लगे,लेकिन आपकी त्वचा का रंग आप जो खाना खाते हैं उससे भी प्रभावित होता है. पोषण विज्ञान के कई शोध में इसका संकेत मिलता है. कुछ फल और सब्जियां ऐसे हैं जिसे अगर जरूरत से ज्यादा खाया जाए तो वो त्वचा के रंग में अस्थायी बदलाव ला सकती हैं.
इस तरह के सब्जियों और फलों में मौजूद नेचुरल पिगमेंट विशेष रूप से कैरोटेनॉइड्स के कारण होता है. ये तत्व शरीर में जमा होकर त्वचा की ऊपरी परत एपिडर्मिस को प्रभावित करते हैं और हल्का पीला, नारंगी या गुलाबी टोन पैदा कर सकते हैं. हालांकि ये पूरी तरह से सुरक्षित और अस्थायी होता है.
स्किन कलर बदलने वाले फूड
गाजर
अमेरिकन जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, कई हफ्तों तक दैनिक रूप से अधिक मात्रा में गाजर खाने से “कैरोटीनिमिया” नामक स्थिति पैदा हो सकती है, जिसमें त्वचा हल्के पीले-नारंगी रंग में बदलने लगती है. यह असर हथेलियों और पैरों के तलवों पर पहले दिखता है और गाजर का सेवन कम करने पर धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है.
शकरकंद
शकरकंद और कद्दू जैसे अन्य कैरोटीन-समृद्ध खाद्य भी इसी तरह का प्रभाव डालते हैं. कई अध्ययनों में इसे “हेल्दी ग्लो इफेक्ट” बताया गया है. हालांकि यह बदलाव तभी उभरता है जब इन सब्जियों का सेवन जरूरत से बहुत ज्यादा और लंबे समय तक किया जाए.
टमाटर
टमाटर और लाल शिमला मिर्च में पाया जाने वाला लाइकोपीन त्वचा में हल्की गुलाबी या लालिमा ला सकता है. यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर और न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के एक संयुक्त अध्ययन में पाया गया कि लाइकोपीन न केवल त्वचा को यूवी क्षति से बचाता है बल्कि अधिक सेवन की स्थिति में त्वचा को हल्का लाल टोन भी दे सकता है.
चुकंदर
चुकंदर का लगातार सेवन बीटाइन और एंथोसाइनिन जैसे पिगमेंट्स के कारण त्वचा में गुलाबी आभा ला सकता है.
हरी पत्तेदार सब्जी
हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक में मौजूद ल्यूटीन और जिएक्सैन्थिन भी बहुत अधिक मात्रा में लेने पर त्वचा में हल्की पीली गर्माहट पैदा कर सकते हैं, जबकि क्लोरोफिल की उपस्थिति त्वचा को “वार्म टिंट” दे सकती है.
इस बात का रखें ध्यान
ये सभी बदलाव अस्थायी और पूरी तरह सुरक्षित होते हैं. लेकिन इन्हें अक्सर लोग पीलिया समझ बैठते हैं, जबकि इसमें और पीलिया में बड़ा अंतर है. कैरोटीनिमिया में आंखों का सफेद हिस्सा कभी पीला नहीं होता. यह केवल शरीर में प्राकृतिक पिगमेंट्स के अधिक जमाव के कारण होता है. संतुलित और विविध आहार लेने से इससे बचा सकता है.
About the Author
शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर Bharat.one Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें
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