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How your glowing skin care or skin health related to liver know from ayurdeva, चेहरे की चमक के लिए आयुर्वेद में लिवर और रंजक पित्त का महत्व.

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जब भी चेहरे की चमक और निखार की बात होती है, तो ज्यादातर लोग सबसे पहले महंगी क्रीम, सीरम, फेस पैक या पार्लर ट्रीटमेंट का सहारा लेने की सोचते हैं. हालांकि आयुर्वेद इस सोच से बिल्कुल अलग नजरिया रखता है. आयुर्वेद के अनुसार, असली सुंदरता सिर्फ त्वचा पर लगाए जाने वाले प्रोडक्ट्स से नहीं आती, बल्कि शरीर के अंदरूनी स्वास्थ्य से जुड़ी होती है. खासतौर पर लिवर की सेहत को चेहरे की रंगत और चमक का आधार माना गया है. आयुर्वेद बताता है कि चेहरे पर दिखने वाला निखार दरअसल शरीर के भीतर मौजूद रंजक पित्त की स्थिति को दर्शाता है, जो मुख्य रूप से लिवर और प्लीहा से जुड़ा होता है.

आयुर्वेद में पित्त दोष के पांच प्रकार बताए गए हैं, जिनमें रंजक पित्त का कार्य बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. रंजक पित्त का मुख्य काम पाचन के बाद बने रस को रक्त में परिवर्तित करना होता है. यानी खून बनने की पूरी प्रक्रिया में इसकी अहम भूमिका होती है. जब रंजक पित्त संतुलन में रहता है, तो शरीर में रक्त शुद्ध रहता है, हीमोग्लोबिन का स्तर सही बना रहता है और इसका सीधा असर त्वचा पर दिखाई देता है. ऐसे में चेहरे पर प्राकृतिक चमक, गुलाबीपन और ताजगी बनी रहती है. व्यक्ति कम थकान महसूस करता है और त्वचा स्वस्थ नजर आती है.

इसके उलट जब रंजक पित्त असंतुलित हो जाता है, तो शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं. खून ठीक से शुद्ध नहीं हो पाता, जिसका असर सबसे पहले चेहरे पर दिखता है. त्वचा पर पीलापन, काले घेरे, पिगमेंटेशन, मुंहासे और बेजानपन जैसी दिक्कतें उभरने लगती हैं. कई बार लोग इन्हें सिर्फ बाहरी स्किन प्रॉब्लम मान लेते हैं, जबकि असल वजह शरीर के अंदर छिपी होती है. यही कारण है कि सिर्फ क्रीम या कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट इन समस्याओं को जड़ से खत्म नहीं कर पाते.

आज की आधुनिक जीवनशैली रंजक पित्त और लिवर दोनों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है. देर रात तक जागना, फास्ट फूड और जंक फूड का ज्यादा सेवन, तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन, शराब और सिगरेट की आदत, साथ ही लगातार मानसिक तनाव लिवर को कमजोर कर देते हैं. जब लिवर ठीक से काम नहीं करता, तो रंजक पित्त भी प्रभावित होता है. इसका नतीजा यह होता है कि शरीर के अंदर विषाक्त तत्व बढ़ने लगते हैं और खून अशुद्ध हो जाता है. शरीर इन अंदरूनी गड़बड़ियों को चेहरे के जरिए जाहिर कर देता है.

आयुर्वेद के अनुसार, रंजक पित्त को संतुलित रखने के लिए सही आहार और दिनचर्या सबसे जरूरी है. आंवला, अनार, चुकंदर, मुनक्का और नारियल पानी जैसे खाद्य पदार्थ खून को साफ करने और लिवर को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. इसके अलावा गिलोय, भृंगराज और भूमि आंवला जैसी जड़ी-बूटियां प्राकृतिक लिवर टॉनिक की तरह काम करती हैं. आयुर्वेद यह भी मानता है कि गुस्सा, चिड़चिड़ापन और तनाव सीधे लिवर को प्रभावित करते हैं, इसलिए मानसिक शांति बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है. जब शरीर अंदर से स्वस्थ होता है, तभी चेहरे पर असली और स्थायी निखार नजर आता है.


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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-how-your-glowing-skin-care-or-skin-health-related-to-liver-know-what-is-ranjank-pitt-in-ayurdeva-ws-kl-10094133.html

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