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विश्व कैंसर दिवस से पहले फेफड़ों के कैंसर को लेकर केंद्र सरकार ने एक अहम संदेश दिया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने इस बीमारी की गंभीरता पर बात करते हुए कहा कि लंग कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती उसकी समय पर पहचान न हो पाना है. इसी वजह से सरकार अब इलाज के साथ-साथ स्क्रीनिंग और शुरुआती जांच को भी अपनी प्राथमिकता बना रही है, ताकि मरीजों को समय रहते बेहतर उपचार मिल सके.
विश्व कैंसर दिवस से पहले केंद्र सरकार ने फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए एक अहम कदम उठाया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने फेफड़ों के कैंसर के इलाज और मरीजों की देखभाल से जुड़ी नई राष्ट्रीय गाइडलाइंस जारी की हैं. ये दिशा-निर्देश Lung Cancer Treatment and Palliation: Evidence-Based Guidelines नाम से पेश किए गए हैं, जिनका उद्देश्य देशभर में इलाज की प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक, समान और प्रभावी बनाना है.
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इन गाइडलाइंस के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भारत के हर हिस्से में फेफड़ों के कैंसर के मरीजों को एक जैसी गुणवत्ता वाला इलाज मिल सके. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अब समय आ गया है जब भारत को केवल विदेशी हेल्थ मॉडल्स की नकल करने के बजाय, अपनी ज़मीनी सच्चाइयों और जरूरतों के अनुसार इलाज की रणनीति विकसित करनी चाहिए.
जे पी नड्डा ने फेफड़ों के कैंसर से जुड़ी सबसे गंभीर समस्या इसकी देर से पहचान को बताया. उन्होंने कहा कि अधिकतर मामलों में बीमारी तब सामने आती है, जब वह उन्नत अवस्था में पहुंच चुकी होती है, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है. इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए सरकार अब स्क्रीनिंग और जांच की सुविधाओं को मजबूत करने पर खास फोकस कर रही है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो हाई-रिस्क कैटेगरी में आते हैं. अगर बीमारी की पहचान शुरुआती स्तर पर हो जाए, तो इलाज न सिर्फ ज्यादा प्रभावी होता है, बल्कि मरीजों की जीवन को भी बेहतर बनाया जा सकता है.
इन नई गाइडलाइंस में कुल 15 अहम सिफारिशें शामिल की गई हैं. इनमें न सिर्फ इलाज की आधुनिक और प्रमाणित पद्धतियों पर जोर दिया गया है, बल्कि मरीजों की देखभाल यानी पैलिएटिव केयर को भी उतनी ही अहमियत दी गई है. इससे डॉक्टरों को सही समय पर सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी और इलाज के तरीकों में होने वाले अंतर को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा.
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भारत की कैंसर के खिलाफ लड़ाई अब केवल इलाज तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें विज्ञान, करुणा और मजबूत नेतृत्व का संतुलन देखने को मिलेगा. लक्ष्य यही है कि किसी भी मरीज को इलाज और देखभाल के मामले में पीछे न छोड़ा जाए. ये सभी गाइडलाइंस स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएंगी. साथ ही मरीजों और उनके परिजनों के लिए आसान भाषा में इसका सार भी जारी किया जाएगा, ताकि आम लोग भी इन दिशा-निर्देशों को आसानी से समझ सकें और सही जानकारी के साथ इलाज से जुड़े फैसले ले सकें.
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विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें
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