Antibiotic Harmful for Viral Cold: जब भी सर्दी-जुकाम लगता है लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय मेडिकल स्टोर से खुद ही एंटीबायोटिक दवाएं खरीदकर खाना शुरू कर देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह छोटी सी दवा भविष्य में आपकी जान के लिए बड़ा खतरा बन सकती है? अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के फार्माकोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर ज़िया उर रहमान ने इस विषय पर गंभीर चिंता जताई है.उनका मानना है कि वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक का सेवन न केवल बेअसर है, बल्कि यह शरीर के सुरक्षा तंत्र को भी कमजोर कर देता है. एएमयू के फार्मक्रोबायोलॉजी विभाग के एचओडी प्रोफेसर ज़िया उर रहमान ने एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल और उससे होने वाले गंभीर खतरों पर अहम जानकारी दी है.
बैक्टीरिया को मारने के लिए है एंटीबायोटिक
प्रोफेसर ज़िया उर रहमान ने कहा कि सर्दी-जुकाम, फ्लू, नाक बहना, गले में खराश, एक्यूट साइनुसाइटिस, एक्यूट ब्रोंकाइटिस, कान या आंखों का संक्रमण आम बात है. लेकिन ऐसे मामलों में बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना बिल्कुल सही नहीं है. उन्होंने बताया कि एंटीबायोटिक दवाएं केवल बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए बनाई जाती हैं, जबकि सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसी ज्यादातर बीमारियां वायरल होती हैं. वायरस और बैक्टीरिया की बनावट पूरी तरह अलग होती है. एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया की सेल वॉल, सेल मेम्ब्रेन और उसके आंतरिक पोषक तंत्र को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन की जाती हैं, जबकि वायरस पर इनका कोई असर नहीं होता. वायरल संक्रमण के लिए एंटीवायरल दवाओं की जरूरत होती है, न कि एंटीबायोटिक्स की.
बैक्टीरिया एंटीबायोटिक के खिलाफ ढीठ
प्रोफेसर रहमान के अनुसार, अधिकतर वायरल बीमारियां सेल्फ-लिमिटिंग होती हैं, यानी 5 से 6 दिनों में अपने-आप ठीक हो जाती हैं. ऐसे में एंटीबायोटिक लेने की कोई आवश्यकता नहीं होती. यदि संक्रमण लंबे समय तक बना रहे या लक्षण गंभीर हों, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए. बाजार से खुद ही एंटीबायोटिक खरीदकर खाने से सबसे बड़ा खतरा एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का होता है. एंटीबायोटिक्स के ओवरयूज और मिसयूज के कारण बैक्टीरिया ठीठ हो जाते हैं. ये अपने शरीर के चारों और ठोस कवच का आवरण बना लेता है जिसके कारण दवाई के कण बैक्टीरिया के अंदर प्रवेश ही नहीं कर पाते. इस तरह इन दवाओं के खिलाफ मजबूत हो जाते हैं, जिससे भविष्य में गंभीर संक्रमणों का इलाज मुश्किल हो जाता है. यह समस्या अब राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक गंभीर चुनौती बन चुकी है.
पॉल्ट्री और खेतों में एंटीबायोटिक का इस्तेमाल
उन्होंने बताया कि इसी कारण दुनिया भर में “वन हेल्थ इनिशिएटिव” पर काम किया जा रहा है. वन हेल्थ का मतलब है कि इंसानों के साथ-साथ जानवरों, पोल्ट्री फार्म, डेयरी, एक्वाकल्चर (मछली पालन) और पर्यावरण में भी एंटीबायोटिक के अनियंत्रित उपयोग को रोका जाए. खेतों, फार्म हाउसों और पशुपालन में एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक इस्तेमाल भी रेजिस्टेंस बढ़ाने का बड़ा कारण है. इसके अलावा, दवाओं को गलत तरीके से फेंकने या फ्लश करने से ये पर्यावरण में पहुंच जाती हैं, जिससे समस्या और गंभीर हो जाती है.
गुड बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं
प्रोफेसर रहमान ने चेतावनी दी कि एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल शरीर में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया (गुड बैक्टीरिया) को भी खत्म कर देता है, जो हमारी सेहत के लिए जरूरी होते हैं. इसके कारण सुपर इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, जैसे फंगल इंफेक्शन या अन्य खतरनाक संक्रमण. अगर बैक्टीरिया खून में फैल जाएं (सिस्टेमिक या ब्लड इंफेक्शन), तो यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है. उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस एक बेहद गंभीर समस्या है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता. इसे रोकने के लिए आम लोगों, डॉक्टरों, पशुपालकों, पर्यावरणविदों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) सहित सभी संबंधित संस्थाओं को मिलकर ठोस कदम उठाने की जरूरत है.
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-amu-professor-warning-against-antibiotic-misuse-for-common-cold-and-cough-health-risks-hindi-local18-10114622.html
