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National Chocolate Day: चॉकलेट को चाय की तरह पीते थे लोग! डार्क चॉकलेट है बेस्ट, जानें क्यों यह है बच्चों के दिमाग की दुश्मन

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मुंह में तुरंत घुल जाने वाली ब्राउन रंग की चॉकलेट मूड को खुश कर देती है. इसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आने लगता है. चॉकलेट त्योहारों पर मिठाई को टक्कर देती है और खूब खरीदी जाती है. वैसे तो चॉकलेट डे फरवरी में वैलेंटाइनंस डे वीक में मनाया जाता है लेकिन अमेरिका में National Chocolate Day 24 दिसंबर को मनाया जाता है यानी क्रिसमस से ठीक 1 दिन पहले. क्रिसमस पर केक और कुकीज के साथ तरह-तरह की चॉकलेट्स भी गिफ्ट में देने का ट्रेंड है. खासकर बच्चे इसे खुशी से खाते हैं. 

अमेरिका में लोग चाय की तरह पीते थे चॉकलेट
इतिहासकार मानते हैं कि चॉकलेट का जन्म दक्षिण अमेरिका में हुआ. 5300 साल पहले यहां कोको के पेड़ होने के सबूत मिले. चॉकलेट को किसने बनाया, यह तो कोई नहीं जानता लेकिन मेसोअमेरिका यानी अमेरिका के दक्षिणी हिस्से और मेक्सिको के लोग चॉकलेट को पेय पदार्थ की तरह पीते थे. यह बहुत कड़वी होती थी इसलिए इसमें वेनिला और ईयर फ्लावर मिलाया जाता था. 1520 में चॉकलेट यूरोप पहुंची.

भगवान का तोहफा मानते थे लोग
चॉकलेट कोको पेड़ के फल से बनती है जो बीज की तरह दिखता है. मेसोअमेरिका में लोग कोको बीन को करेंसी की तरह इस्तेमाल करते थे. वह शादी समारोह, गुरु के सम्मान और भगवान पर कोको बीन ही चढ़ाते थे. शॉपिंग भी पैसों की जगह इसी से होती थी. लोगों का मानना था यह भगवान का उपहार है जो उन्हें प्रसाद के रूप में मिला है. कोकोबीन को दवा भी माना गया. यूरोप में पहले लोग इसे दवा ही समझते थे. इससे जुकाम ठीक करने और थकान दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था.  18वीं शताब्दी में चॉकलेट कर्मशल बन गई और इसमें चीनी-दूध को मिलाया गया. पहली मिल्क चॉकलेट 1875 में बनाई गई.

पहली चॉकलेट फैक्ट्री 1728 में लगाई गई (Image-Canva)

बेल्जियम की बौनबौन चॉकलेट का क्रेज
चॉकलेट पूरे विश्व में बनती है लेकिन बेल्जियम की बौनबौन चॉकलेट सबसे अलग है और इसी से प्रेरित होकर क्रिसमस पर बौनबौन चॉकलेट बांटी जाती हैं. बौनबौन लड्डू के आकार खासकर मोतीचूर जैसी दिखती है. इसके बीच में कैरेमल भरी जाती है और बाहर चॉकलेट की परत होती है. मुंह में रखते ही यह सिल्क की तरह घुल जाती है. बौनबौन की यह खासियत उसे दुनियाभर में मशहूर बनाती है. वहीं स्विजरलैंड में नट्स से भी वाइट चॉकलेट और डार्क चॉकलेट खाने का रिवाज है. भारत में ज्यादातर लोग अमेरिकन स्टाइल की प्लेन चॉकलेट खाना पसंद करते हैं.   

कई तरह की चॉकलेट
भारत में 3 तरह की चॉकलेट खाई जाती हैं जिसमें मिल्क चॉकलेट, वाइट चॉकलेट और डार्क चॉकलेट शामिल है. मिल्क चॉकलेट में दूध और कोकोआ बटर होता है. इसमें शुगर ज्यादा होती है. वाइट चॉकलेट में कोकोआ नहीं होता. डार्क चॉकलेट में 70% कोकोआ होता है और इसमें मीठा बिल्कुल नहीं होता. यह खाने में बहुत कड़वी होती है और चीनी-फैट ना होने की वजह से सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है. 

दर्द का नहीं होता एहसास
चॉकलेट में फ्लेवोनॉयड्स होते हैं जिससे दिमाग में एंडोरफिन्स नाम के हार्मोन रिलीज होते हैं. यह मूड के साथ ही दर्द को भी नियंत्रित करते हैं. चॉकलेट खाने से कॉर्टिसोल नाम का स्ट्रेस हार्मोन कम होता है जिससे तनाव दूर होता है. दर्द का एहसास भी नहीं होता. इससे मूड भी अच्छा रहता है. इसे खाने से शरीर में डोपामाइन नाम का हैप्पी हार्मोन भी रिलीज होता है जिससे व्यक्ति को अच्छा लगता है. हार्वर्ड हेल्थ की स्टडी के अनुसार डार्क चॉकलेट में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाते हैं और दिल की सेहत को दुरुस्त रहती है. इसे खाने से गुड कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ता है. 

शरीर को तुरंत मिलती है एनर्जी
चॉकलेट में कैफीन और थियोब्रोमाइन होता है. इसे खाकर शरीर में तुरंत एनर्जी बढ़ती है और फिजिकल एक्टिविटी बढ़ जाती है. अधिकतर एथलीट्स चॉकलेट इसी वजह से खाते हैं ताकि उनका शरीर ऊर्जा से भरे रहे. चॉकलेट इम्यूनिटी को भी बूस्ट करती है. दूसरे विश्वयुद्ध में सैनिकों को डार्क चॉकलेट इसी वजह से राशन में दी जाती थी ताकि वह हमेशा सचेत रहे और एनर्जी से भरे रहें. डार्क चॉकलेट खाने से स्किन के दाग-धब्बे दूर होते हैं और ग्लो आता है. इससे एर्ली एजिंग भी नहीं होती.  

दूसरे विश्व युद्ध में सैनिकों को चॉकलेट बार राशन में दी जाती थीं (Image-Canva)

पार्टनर के करीब आने की बढ़ती है इच्छा
हेल्थशॉट्स में छपी मॉलिक्यूल जनरल की रिपोर्ट के अनुसार डार्क चॉकलेट खाने से लिबिडो बढ़ता है. दरअसल फ्लेवोनॉयड्स की वजह से शरीर के हर हिस्से में खून का प्रवाह ठीक रहता है. जेनिटल एरिया में भी अच्छे ब्लड सर्कुलेशन की वजह से महिलाओं और पुरुषों में सेक्शुअल डिजायर बढ़ जाते हैं. लिबिडो बढ़ता है तो उनकी पार्टनर के करीब आने की इच्छा बढ़ती है. यानी चॉकलेट रिलेशनशिप को मजबूत बनाने के लिए भी अच्छी है. 

चॉकलेट हर किसी के लिए ठीक नहीं
डायटीशियन सतनाम कौर कहती हैं कि वाइट और मिल्क चॉकलेट के मुकाबले डार्क चॉकलेट सबसे अच्छी होती है. दिन में 50 ग्राम तक चॉकलेट खाना ठीक है. इस मात्रा को डायबिटीज के मरीज भी ले सकते हैं. बच्चों को 2 साल तक चॉकलेट नहीं देनी चाहिए इससे बच्चे के दिमाग का विकास रुक सकता है. प्रेग्नेंसी में भी इन्हें खाने से बचना चाहिए. जिन लोगों का ब्लड प्रेशर कम रहता है उनके लिए डार्क चॉकलेट बहुत अच्छी है. मिल्क चॉकलेट खाने से वजन बढ़ता है जबकि डार्क चॉकलेट खाने से वजन नियंत्रित रहता है. 


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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-national-chocolate-day-special-how-chocolate-increase-happy-hormones-and-why-it-was-used-as-currency-8916332.html

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