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Why Stroke Risk Increases in Winter Doctor Explains Reason | ठंड में क्यों बढ़ जाता है लकवा का खतरा डॉक्टर से समझें

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How Winter Raises Stroke Risk: सर्दियों का मौसम घूमने-फिरने और मस्ती के लिहाज से सबसे अच्छा माना जाता है. बड़ी संख्या में लोग ठंड के मौसम में बर्फबारी का मजा लेने के लिए पहाड़ों का रुख करते हैं. सर्दियों में सेलिब्रेशन के कई मौके भी होते हैं, जो एंजॉयमेंट को बढ़ा देते हैं. सर्दियां जितनी सुहावनी दिखती हैं, उतनी ही सेहत के लिए चैलेंजिंग भी हैं. सर्दियों में कम तापमान शरीर के अंदर ऐसे बदलाव पैदा कर देता है, जिन्हें लोग अक्सर महसूस नहीं कर पाते हैं. ठंड के मौसम में हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले काफी बढ़ जाते हैं. यही वजह है कि डॉक्टर्स लोगों को सर्दी में ज्यादा एहतियात बरतने की सलाह देते हैं. अब सवाल है कि ठंड के मौसम में स्ट्रोक का रिस्क ज्यादा क्यों होता है? चलिए इस बारे में डॉक्टर से जान लेते हैं.

नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल की सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वनीता अरोरा ने Bharat.one को बताया कि यह बात सही है कि सर्दी के मौसम में हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले कई गुना बढ़ जाते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह कम तापमान है. ठंड का असर सीधे शरीर की ब्लड वेसल्स और दिल पर पड़ता है. सर्दियों में शरीर अपना टेंपरेचर कंट्रोल करने की कोशिश करता है और इसके लिए ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती हैं. इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और हार्ट अटैक व स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है. हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण माना जाता है. जो लोग पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हार्ट डिजीज से जूझ रहे हैं, उनके लिए हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा हेल्दी लोगों की तुलना में कई गुना ज्यादा होता है.

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ठंड में स्ट्रोक की यह भी एक वजह

कई रिसर्च बताती हैं कि सर्दियों में खून थोड़ा गाढ़ा हो जाता है, जिसकी वजह से स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. ठंड में पसीना कम निकलता है और लोग पानी भी कम पीते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन हो सकता है. इसका नतीजा यह होता है कि खून गाढ़ा हो जाता है और ब्लड क्लॉट बनने की संभावना बढ़ जाती है. अगर यह थक्का दिमाग तक पहुंच जाए, तो इस्केमिक स्ट्रोक हो सकता है. इसके अलावा सर्दियों में फ्लू और वायरल संक्रमण बढ़ जाते हैं, जो शरीर में सूजन पैदा करते हैं और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा देते हैं. अचानक ठंडी हवा के संपर्क में आने से ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ सकता है. अगर यह स्थिति बार-बार होती है, तो ब्लड वेसल्स कमजोर हो सकती हैं और नस फटने या ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है.

लोगों की ये आदतें भी बेहद रिस्की

हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो सर्दियों में लोग ज्यादा नमक, मीठा और तला-भुना खाना खाते हैं और शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, जिससे कोलेस्ट्रॉल और वजन बढ़ने लगता है. कोलेस्ट्रॉल ज्यादा हो जाए, तो यह खून की धमनियों में जमा हो जाता है और हार्ट अटैक, स्ट्रोक का रिस्क बढ़ा देता है. जिन लोगों को पहले स्ट्रोक हो चुका है, उनके लिए सर्दियां ज्यादा चुनौतीपूर्ण होती हैं. ऐसे लोगों का शरीर मौसमी बदलावों के प्रति ज्यादा सेंसिटिव होता है. इसलिए इन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए.

जानिए क्या होते हैं स्ट्रोक के लक्षण

डॉक्टर वनीता अरोरा ने बताया कि स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचान लिया जाए, तो लकवा और मौत से बचा जा सकता है. अगर किसी के चेहरे का एक हिस्सा लटक जाए, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी आ जाए, बोलने में दिक्कत हो और बेहोशी हो जाए, तो उसे जल्द से जल्द अस्पताल ले जाना चाहिए. इसके अलावा अचानक तेज सिरदर्द, चक्कर आना, देखने में परेशानी, भ्रम या शरीर के एक हिस्से में सुन्नपन भी स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं. ऐसे लक्षण दिखें तो देर किए बिना अस्पताल पहुंचना जरूरी है. अगर आप स्ट्रोक के 3-4 घंटे के अंदर सही इलाज शुरू करा लें, तो लकवा और मौत से बचा जा सकता है.

स्ट्रोक से बचने के लिए क्या करना चाहिए

कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार सर्दियों की कुछ आदतें अनजाने में खतरा बढ़ा देती हैं. लंबे समय तक ठंड में रहना, हैवी और नमक से भरपूर फूड्स खाना, घंटों एक जगह बैठे रहना, नींद की कमी और तनाव जैसी आदतें भी स्ट्रोक का रिस्क बढ़ा देती हैं. कई लोग इस मौसम में ब्लड प्रेशर या शुगर की नियमित जांच भी छोड़ देते हैं, जिससे समस्या समय पर पकड़ में नहीं आती है. इसके अलावा सर्दियों में स्ट्रोक से बचने के लिए प्रॉपर गर्म कपड़े पहनें. घर से निकलते समय हाथ-पैर और सिर को ढककर रखें. नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करें, पर्याप्त पानी पिएं, नियमित व्यायाम करें और संतुलित आहार लें. स्मोकिंग से बचें, शराब छोड़ दें और पुरानी बीमारियों की दवाएं समय पर लेते रहें. अगर डॉक्टर सलाह दे, तो फ्लू का टीका भी लगवाएं. समय पर सावधानी और लक्षणों की पहचान जान बचा सकती है.


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