IndiGo Flight Squawk 7700 Emergency: बैंकॉक से मुंबई आ रही इंडिगो की फ्लाइट 6E-1060 को बीच रास्ते से अचानक वापस बैंकॉक एयरपोर्ट वापस बुला लिया गया. फ्लाइट डाइवर्जन की वजह स्क्वॉक 7700 कोड सिग्नल बताई जा रही है. प्लेन के ट्रांसपोंडर से स्क्वॉक 7700 कोड सिग्नल मिलते ही बैंकॉक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लागू कर दी गई. कुछ देर के इंतजार के बाद इस प्लेन को सुरक्षित बैकॉक के सुवर्णभूमि एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड कर लिया गया. हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ऐसा क्यों हुआ, लेकिन स्क्वॉक 7700 कोड सिग्नल किन परिस्थितियों में दिया जाता है, आइए जानते हैं विस्तार से…
क्या होता है स्क्वॉक 7700 कोड सिग्नल और इससे बैंकॉक एयरपोर्ट पर हड़कंप क्यों मचा?
स्क्वॉक 7700 एविएशन में इस्तेमाल होने वाला एक खास चार अंकों का कोड है, जो प्लेन के ट्रांसपोंडर पर सेट किया जाता है. जब कोई पायलट यह कोड लगाता है, तो इसका सीधा मतलब होता है कि प्लेन किसी जनरल इमरजेंसी की स्थिति में है. यह इमरजेंसी तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या, केबिन प्रेशर में गड़बड़ी, आग का संकेत, फ्यूल से जुड़ा रिस्क या फिर किसी पैसेंजर के साथ मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है. इस कोड को लेकर एयरपोर्ट पर हड़कंप इसलिए मचा क्यों कि स्क्वॉक 7700 सिंग्नल मिलते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल उस प्लेन को सबसे ऊपर प्रॉयोरिटी में रखता है. बाकी सभी प्लेन्स को डायरेक्शन दिए जाते हैं कि वे सुरक्षित दूरी बनाए रखें. यह कोड किसी हादसे की पुष्टि नहीं करता, बल्कि यह दिखाता है कि पायलट जोखिम को हल्के में नहीं ले रहा और सुरक्षा को सबसे पहले रख रहा है.
बैंकॉक से मुंबई आ रही इंडिगो की फ्लाइट 6E1060 से पायलट ने स्क्वॉक 7700 सिग्नल क्यों दिए?
बैंकॉक से मुंबई जा रही इंडिगो फ्लाइट 6E1060, जो Airbus A321-200NX प्लेन से ऑपरेट हो रही थी. इस प्लेन का रजिस्ट्रेशन नंबर VT-NCK बताया गया है. सोर्सेज के अनुसार, फ्लाइट के दौरान पायलट की तरफ से स्क्वॉक 7700 सेट को सिग्नल सेट किया गया. इसका मतलब है कि क्रू ने किसी ऐसी स्थिति में था जिसे सामान्य नहीं कहा जा सकता है. हालांकि शुरुआती जानकारी में समस्या का सटीक कारण सामने नहीं आया है, लेकिन एविएशन में यह सामान्य प्रक्रिया है कि किसी भी संदिग्ध टेक्निकल सिग्नल, सिस्टम अलर्ट या ऑपरेशनल दिक्कत की स्थिति में इस कोड का इस्तेमाल किया जाता है. पायलटों ने स्थिति का आकलन करने के बाद यह तय किया कि प्लेन को आगे ले जाने के बजाय वापस बैंकॉक लौटाना ज्यादा सुरक्षित रहेगा. यह फैसला यात्रियों और क्रू की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया था.
स्क्वॉक 7700 कोड सिग्नल मिलने के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल क्या करता है?
एविएशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, जैसे ही कोई प्लेन स्क्वॉक 7700 पर जाता है, एयर ट्रैफिक कंट्रोल पूरी तरह अलर्ट मोड में आ जाता है. उस प्लेन को रेडार पर तुरंत हाईलाइट किया जाता है और उसे बाकी ट्रैफिक से अलग प्राथमिकता दी जाती है. एटीसी पायलट से लगातार संपर्क में रहता है और उसकी जरूरत के मुताबिक निर्देश देता है. इन निर्देशों में ऊंचाई बदलना, सीधा रूट देना या जल्द से जल्द लैंडिंग की अनुमति देना शामिल है. साथ ही, जिस एयरपोर्ट पर प्लेन उतरने वाला होता है, वहां फायर ब्रिगेड, मेडिकल टीम और रेस्क्यू स्टाफ को पहले से तैयार कर लिया जाता है. यह सारी प्रक्रिया इसलिए होती है ताकि किसी भी संभावित स्थिति से तुरंत निपटा जा सके. कई बार लैंडिंग पूरी तरह सामान्य होती है, लेकिन तैयारी हमेशा सबसे खराब स्थिति को ध्यान में रखकर की जाती है.
क्या स्क्वॉक 7700 का मतलब यह होता है कि प्लेन क्रैश होने वाला है?
एविएशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, स्क्वॉक 7700 का मतलब बिल्कुल भी यह नहीं होता कि प्लेन क्रैश होने वाला है. यह एक आम गलतफहमी है. असल में यह कोड सावधानी और सतर्कता का संकेत होता है. पायलट इस कोड का इस्तेमाल तब करते हैं, जब उन्हें लगता है कि स्थिति को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है. कई मामलों में समस्या मामूली होती है, जैसे किसी सेंसर का अलर्ट, केबिन में किसी यात्री की तबीयत खराब होना या मौसम से जुड़ी कोई दिक्कत. लेकिन एविएशन में नियम साफ हैं कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. इसलिए स्क्वॉक 7700 का इस्तेमाल एक प्रोफेशनल और जिम्मेदार कदम माना जाता है, न कि किसी बड़े हादसे का संकेत है.
प्लेन को वापस उसी एयरपोर्ट पर क्यों लौटाया जाता है, जहां से उसने उड़ान भरी है?
इंडिगो फ्लाइट 6E1060 के मामले में पायलटों ने प्लेन को वापस बैंकॉक लौटा कर लाने के लिए कहा गया. ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि उड़ान के शुरुआती चरण में प्लेन आमतौर पर अपने मूल एयरपोर्ट के ज्यादा करीब होता है. वहां रनवे, मेंटेनेंस टीम, इंजीनियर और एयरलाइन का पूरा सपोर्ट सिस्टम पहले से मौजूद रहता है. किसी अनजान या दूर के एयरपोर्ट पर उतरने की तुलना में यह ज्यादा सुरक्षित और व्यावहारिक विकल्प होता है. इसके अलावा, अगर तकनीकी जांच की जरूरत हो, तो बेस एयरपोर्ट पर यह काम तेजी से किया जा सकता है. यात्रियों को भी वहीं बेहतर सुविधाएं और वैकल्पिक फ्लाइट्स मिल पाती हैं.
ऐसे मामलों में यात्रियों को किस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है?
जब कोई फ्लाइट स्क्वॉक 7700 के बाद इमरजेंसी लैंडिंग या रिटर्न करती है, तो एयरलाइन यात्रियों की देखभाल के लिए तय एसओपी अपनाती है. सबसे पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि सभी यात्री सुरक्षित हैं. अगर कोई मेडिकल इमरजेंसी होती है, तो संबंधित यात्री को तुरंत सहायता दी जाती है. इसके बाद प्लेन की तकनीकी जांच होती है. अगर उड़ान आगे संभव नहीं होती, तो यात्रियों को वैकल्पिक फ्लाइट, होटल में ठहरने, भोजन या रिफंड जैसे विकल्प दिए जाते हैं.
इंडिगो फ्लाइट 6E1060 की पूरी घटना 5 प्वाइंट्स में
- मुंबई आ रही इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट 6E1060 से 7700 स्क्वॉक कोड सिग्नल बैंकॉक एयरपोर्ट के एटीसी को भेजे गए थे. यह प्लेन एयरबस A321-200NX था, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर VT-NCK है.
- पायलटों ने अंतरराष्ट्रीय इमरजेंसी कोड 7700 स्क्वॉक किया, जो किसी गंभीर तकनीकी या परिचालन स्थिति का संकेत होता है.
- एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सूचना देने के बाद क्रू ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विमान को वापस बैंकॉक एयरपोर्ट की ओर डाइवर्ट करने का फैसला लिया.
- बैंकॉक एयरपोर्ट पर एहतियातन फायर ब्रिगेड और मेडिकल टीम को अलर्ट पर रखा गया और प्लेन की सेफ लैंडिंग कराई गई.
- सभी यात्री सुरक्षित रहे, किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. इंडिगो ने यात्रियों के लिए वैकल्पिक फ्लाइट और अन्य व्यवस्थाएं शुरू कर दी हैं.
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