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Historical City of India Delhi : एक बार मशहूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब ने दिल्ली की तबाही को देखकर कहा था कि दिल्ली अब शहर नहीं रहा, बल्कि एक ‘कैंप’ बन गया है. लेकिन दिल्ली की मिट्टी में कुछ ऐसा है कि यह हर बार अपने विनाश की राख से एक नए और पहले से भी भव्य रूप में पुनर्जीवित हुई है.
भारत की राजधानी दिल्ली, सिर्फ एक महानगर नहीं है, बल्कि यह समय के गर्भ में छिपा एक जीता-जागता इतिहास है. इसे ‘हिस्टोरिकल सिटी ऑफ इंडिया’ (Historical City of India) कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. यह शहर अपने भीतर सात नहीं, बल्कि उससे भी कहीं अधिक शहरों के अवशेष समेटे हुए है, जिनमें से हर एक ने इस भूमि को अपनी छाप दी है. आइए, इस शहर के भीतर छिपे सात अलग-अलग ऐतिहासिक परतों को एक्सप्लोर करें, किला राय पिथोरा से लेकर लुटियन जोन तक.
1. किला राय पिथोरा: दिल्ली का पहला शहर- दिल्ली का सबसे पहला ज्ञात शहर किला राय पिथोरा था, जिसे 12वीं सदी में चौहान शासक पृथ्वीराज चौहान ने बनवाया था. यह वर्तमान महरौली क्षेत्र के आसपास फैला हुआ था, जिसमें कुतुब मीनार परिसर भी शामिल है. यह उस समय उत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण गढ़ था, जिसके अवशेष आज भी महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क में देखे जा सकते हैं. यहीं से दिल्ली के गौरवशाली इतिहास की नींव रखी गई थी.
2. सिरी फोर्ट: खिलजी वंश का दूसरा शहर (14वीं सदी)- अलाउद्दीन खिलजी ने मंगोलों के लगातार हमलों से बचने के लिए 1303 ईस्वी में सिरी फोर्ट का निर्माण करवाया. यह किला अपने समय में बेहद मजबूत और अभेद्य माना जाता था. आज भले ही इसके ज्यादातर हिस्से खंडहर हो चुके हों, लेकिन सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम और खेल परिसर के आसपास इसके कुछ अवशेष दिल्ली के दूसरे शहर की कहानी बयां करते हैं.
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3. तुगलकाबाद: तुगलक वंश का तीसरा शहर (14वीं सदी)- गयासुद्दीन तुगलक ने 1321 ईस्वी में तुगलकाबाद की स्थापना की थी. यह अपने मजबूत किले और विशालकाय दीवारों के लिए प्रसिद्ध था. हालाँकि, पानी की कमी और एक संत के श्राप की किंवदंती के कारण यह शहर जल्द ही छोड़ दिया गया था. आज भी तुगलकाबाद का किला और गयासुद्दीन तुगलक का मकबरा दिल्ली के शाही अतीत की गवाही देते हैं.
4. जहाँपनाह: तुगलक वंश का चौथा शहर (14वीं सदी)- मोहम्मद बिन तुगलक ने अपने बढ़ते साम्राज्य को एकजुट रखने के लिए जहाँपनाह का निर्माण करवाया था. यह शहर तुगलकाबाद और सिरी फोर्ट के बीच स्थित था, जिसे दोनों के बीच की कड़ी के रूप में डिजाइन किया गया था. हालाँकि, यह शहर भी पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाया और जल्द ही इसके भी अवशेष बिखर गए.
5. फिरोजाबाद/फिरोज शाह कोटला: फिरोज शाह तुगलक का पांचवा शहर (14वीं सदी)- फिरोज शाह तुगलक ने 1354 ईस्वी में फिरोजाबाद की स्थापना की, जिसे आज फिरोज शाह कोटला के नाम से जाना जाता है. इस शहर में फिरोज शाह का किला, एक जामा मस्जिद और अशोक स्तंभ भी था. आज भी यह क्षेत्र अपने ऐतिहासिक महत्व के कारण पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों को आकर्षित करता है.
6. पुराना किला: हुमायूँ और शेरशाह सूरी का छठा शहर (16वीं सदी)-एएसआई के मुताबिक, मुगल सम्राट हुमायूँ ने पुराना किला यानी दीनपनाह की नींव रखी थी, जिसे बाद में शेरशाह सूरी ने जीतकर शेरगढ़ का नाम दिया और इसके चारों ओर पुराना किला बनवाया. जबकि इतिहासकार अलेक्जेंडर कनिंघम ने इस किले की पहचान इंद्रप्रस्थ के रूप में की थी. हालांकि उन्होंने वर्तमान संरचना का श्रेय मुस्लिम शासकों को दिया था. यहाँ तक कि 20वीं शताब्दी की शुरुआत तक, पुराने किले को ‘पांडवों का किला’ और पूरे परिसर को ‘इंद्रप्रस्थ गांव’ के नाम से जाना जाता था. यह किला अपने विशाल दरवाजे और सुंदर वास्तुकला के लिए जाना जाता है. यह वह दौर था जब दिल्ली में मुगलों और अफगानों के बीच सत्ता की खींचातान चल रही थी.
7. शाहजहानाबाद/पुरानी दिल्ली: शाहजहाँ का सातवाँ शहर (17वीं सदी)- मुगल सम्राट शाहजहाँ ने 1639 में शाहजहानाबाद की स्थापना की, जिसे आज हम पुरानी दिल्ली के नाम से जानते हैं. लाल किला, जामा मस्जिद, चांदनी चौक और फतेहपुरी मस्जिद इसी शहर के हिस्से हैं. यह दिल्ली का सबसे भव्य और सुनियोजित मुगल शहर था, जिसकी रौनक आज भी बरक़रार है.
लुटियन जोन यानी नई दिल्ली: आधुनिक दिल्ली का उदय (20वीं सदी)-ब्रिटिश राज के दौरान 20वीं सदी की शुरुआत में, सर एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर ने नई दिल्ली की नींव रखी. राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, इंडिया गेट और कनॉट प्लेस जैसे प्रतिष्ठित स्थल इसी लुटियन जोन का हिस्सा हैं. यह क्षेत्र आधुनिक दिल्ली की पहचान बन गया और भारत की राजधानी के रूप में इसकी भव्यता को दर्शाता है.
दिल्ली सिर्फ पत्थरों और ईंटों का ढेर नहीं है, बल्कि यह उन हजारों कहानियों, साम्राज्यों के उत्थान-पतन और संस्कृतियों के संगम का प्रतीक है, जिन्होंने इसे हर बार नया रूप दिया है. इस शहर की हर गली, हर इमारत और हर खंडहर आपको इतिहास के किसी न किसी अध्याय से जोड़ती है. यही कारण है कि दिल्ली को ‘भारत का ऐतिहासिक शहर’ कहा जाता है – यह एक ऐसा शहर है जो हर कदम पर आपको अपने गौरवशाली अतीत की याद दिलाता है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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https://hindi.news18.com/photogallery/lifestyle/travel-historical-city-of-india-delhi-destroyed-seven-times-resettled-eight-times-explore-journey-from-quila-rai-pithora-to-lutyens-zone-ws-l-10169212.html
