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इस परंपरा के बिना महाशिवरात्रि पर नहीं कर पाएंगे बाबा बैद्यनाथधाम में रुद्राभिषेक और स्पर्श पूजा, जानें नियम

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महाशिवरात्रि के दिन देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए देवघर पहुंचते हैं. महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर बाबा बैद्यनाथधाम में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व माना गया है.

भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथधाम है.यह धाम अपनी अनोखी परंपराओं और विशेष धार्मिक विधानों के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है. माना जाता है कि यहां की कई ऐसी परंपराएं हैं, जो अन्य किसी भी ज्योतिर्लिंग में देखने को नहीं मिलतीं. यही वजह है कि बाबा बैद्यनाथधाम श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है.

बाबा बैद्यनाथधाम की सबसे बड़ी विशेषता होने वाला स्पर्श पूजन है.देश के अधिकतर ज्योतिर्लिंगों में भक्तों को केवल दूर से दर्शन कर लौटना पड़ता है, लेकिन देवघर में श्रद्धालु गर्भगृह के भीतर जाकर स्वयं भगवान शिव का स्पर्श पूजन कर सकते हैं.यह परंपरा बाबा बैद्यनाथधाम को अन्य ज्योतिर्लिंगों से अलग और विशेष बनाती है.

महाशिवरात्रि मे लाखो भक्तो की उमड़ती है भीड़
वैसे तो बाबा बैद्यनाथधाम में साल भर भक्तों की भारी भीड़ लगी रहती है, लेकिन कुछ विशेष तिथियों पर यहां जनसैलाब उमड़ पड़ता है. इन्हीं में सबसे प्रमुख पर्व महाशिवरात्रि है. महाशिवरात्रि के दिन देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए देवघर पहुंचते हैं.पूरा धाम हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठता है. महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर बाबा बैद्यनाथधाम में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व माना गया है. रुद्राभिषेक भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है. मान्यता है कि रुद्राभिषेक करने से भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.

क्या कहते है मंदिर प्रबंधक
इस विषय में मंदिर प्रबंधक रमेश परिहस्त ने Bharat.one के संवाददाता से बातचीत में बताया कि देवघर का बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग उन चुनिंदा धामों में शामिल है, जहां श्रद्धालु गर्भगृह के अंदर जाकर स्पर्श पूजन के साथ-साथ रुद्राभिषेक भी कर सकते है.उन्होंने कहा कि यह बाबा बैद्यनाथधाम की विशेष और दुर्लभ परंपरा है.रुद्राभिषेक के समय की बात करें तो बाबा बैद्यनाथ मंदिर में दोपहर 12 बजे से रुद्राभिषेक शुरू किया जाता है. इसके लिए मंदिर में किसी प्रकार की रसीद नहीं कटवानी पड़ती. यदि श्रद्धालु के साथ उनका स्वयं का तीर्थपुरोहित हो, तो वे उन्हीं के माध्यम से रुद्राभिषेक करवा सकते हैं. यदि तीर्थपुरोहित साथ न हो, तो मंदिर परिसर में मौजूद किसी भी तीर्थपुरोहित से रुद्राभिषेक कराया जा सकता है.

रुद्राअभिषेक के लिए कितने पैसे लगते 
रुद्राभिषेक की कोई निश्चित फीस तय नहीं है. श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार तीर्थपुरोहित को दक्षिणा प्रदान करते हैं. कुल मिलाकर बाबा बैद्यनाथधाम न सिर्फ एक ज्योतिर्लिंग है, बल्कि आस्था, परंपरा और विश्वास का जीवंत संगम भी है.

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इस परंपरा के बिना महाशिवरात्रि पर नहीं कर पाएंगे बैद्यनाथधाम में रुद्राभिषेक

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