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दिल्ली: पीर रतन नाथ मंदिर पर बुलडोजर कार्रवाई, भक्तों में रोष

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नई दिल्ली:  दिल्ली विकास प्राधिकरण का बुलडोजर इस समय सुर्खियों में है. दिल्ली में मौजूद 1300 साल से भी ज्यादा पुराने श्री पीर रतन नाथ जी की मंदिर-दरगाह पर बुलडोजर चलने से यर चर्चा में है. 1350 साल पुरानी यह मंदिर दरगाह बाबा श्री पीर रतन नाथ जी का स्थान है. यहां न सिर्फ भारत, बल्कि विदेश तक के भक्त जुड़े हुए हैं.

मोमबत्ती से भक्तों ने की आरती

दिल्ली विकास प्राधिकरण ने नोटिस तीन मकान का देकर उन तीन मकानों को गिराने के साथ ही मंदिर का तुलसी वन तोड़ दिया. जहां मेला लगता था. उस स्थान को भी पूरा गिरा दिया गया है. यहां मंदिर में रात के समय भगवान की आरती मोमबत्ती में हुई. रसोई में प्रसाद बनाने तक का पानी नहीं बचा हुआ है. यहां टंकियों को मजबूरी में सड़क पर रखना पड़ा है. दिल्ली विकास प्राधिकरण जहां तोड़फोड़ की है. वहां पर नीले रंग के टीन शेड लगाकर चले गए हैं.

दिल्ली विकास प्राधिकरण का बुलडोजर जब इस पवित्र स्थान पर चल रहा था. तब यहां पर सैकड़ो की संख्या में मौजूद लोग विरोध प्रदर्शन नहीं कर रहे थे. बल्कि राम नाम का नाम जप रहे थे. यह सारी जानकारी मंदिर के सेवादार तरुण कुमार ने.

1350 साल पुराना है मंदिर

उन्होंने बताया कि इस जगह का नाम मंदिर दरगाह बाबा श्री पीर रतन नाथ है. दरगाह शब्द कोई इस्लामी शब्द नहीं है. बल्कि इसका मतलब ऐसी जगह है. जहां पर दीन दुखियों को सहारा दिया जाए. उनकी सेवा की जाए. उन्होंने बताया कि 1350 साल पुराना यह मंदिर योगी योगेश्वर गुरु गोरखनाथ के परम शिष्य रतन नाथ जी का सनातन धर्म स्थान है. आज भी यहां पर उनको पूजा जाता है. कीर्तन होता है. लंगर होते हैं. श्रृंगार होता है और प्रसाद बनाया जाता है.

डीडीए के पुराने दस्तावेज हैं सेवादार के पास

यहां के एक और सेवादार हितेश साहनी ने बताया कि दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा 1974 का अलॉटमेंट इस जमीन का उनके पास है. सारे दस्तावेज उनके पास हैं. दिल्ली विकास प्राधिकरण के द्वारा हस्ताक्षर किए गए 38003 गज जमीन भी उनके पास है. कंस्ट्रक्शन एरिया यहां का 1400 है. जबकि खाली पड़ा हुआ क्षेत्र सामने की ओर है. हमें दिल्ली विकास प्राधिकरण की ओर से सिर्फ तीन मकान गिराए जाने का नोटिस मिला था और बताया गया था कि ग्रीन बेल्ट के तौर पर इसे मेंटेन किया जाएगा.

हम लोग मान गए थे, लेकिन उन तीन मकान को गिराने के साथ हमारा तुलसी वन तोड़ दिया गया. मेन गेट तोड़ दिया गया. अब महाशिवरात्रि जो फरवरी में आ रही है. उसमें हमारा मेला कैसे लगेगा. यह चिंता का विषय है. हर रविवार को यहां पर लंगर होता है. बड़ी संख्या में लोग आते हैं. वह भी प्रभावित हो रहा है. प्रसाद यहां पर जो बन रहा है. उसे खिलाने तक की जगह नहीं बची है.

यहां भक्त वॉशरूम के पास खाली पड़ी जमीन पर बैठकर प्रसाद खा रहे हैं. दिल्ली विकास प्राधिकरण ने मंदिर के हिस्से को तोड़ने के बाद यहां पर मौजूद भक्तों को अपनी गाड़ियों में भरकर बवाना और नरेला जैसी जगहों पर छोड़ दिया था. जो कि बहुत गलत किया था. सभी अंदर से बहुत दुखी हैं और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस के संघ संचालक मोहन भागवत समेत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से यही निवेदन है कि हमारी तोड़ी हुई जमीन हमें वापस लौटा दें.

मंदिर में होती हैं इन देवी-देवताओं की पूजा

बता दें कि इस मंदिर में शिव परिवार विराजमान हैं. वैष्णो देवी विराजमान हैं. यहां के प्रधान देवता भैरवनाथ हैं. यहां पर लक्ष्मी नारायण समेत बजरंगबली और मां भवानी की भी प्रतिमाएं मौजूद हैं. लोग यहां पर पूजा पाठ करते हैं. इस मंदिर के अंदर जब आप प्रवेश करेंगे, तो ऊपर आपको अयोध्या धाम लिखा हुआ मिलेगा. यहां पर साफ सफाई भी काफी अच्छे से की जाती है. यहां पर सनातन धर्म के कड़े नियमों को फॉलो किया जाता है. जैसे महिलाएं सूट या साड़ी पहनकर आएंगी. सभी का सिर ढका होना चाहिए. महिला पुरुष कोई भी बिना सिर ढके अंदर नहीं आ सकता है.

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