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ना कंप्यूटर..ना कुंडली फिर भी 10 पीढ़ियों की पूरी इंफॉर्मेशन, शादी से पहले लेनी होगी पणजीकार से आज्ञा

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मधुबनी. सनातन धर्म को मानने वाले लोगों के लिए अब शुभ कार्य करने का समय आ गया है. ऐसे में मैथिली ब्राह्मण समुदायों के शादी से पहले लड़का और लड़की का मिलन करने के लिए एक सदियों पुरानी परंपरा है जिसे सिद्धांत प्रथा कहते हैं वो लिखने की शुरुआत इस साल की हो गई है. पंजीकार और लोगों से समझिए पूरा माजरा…

अगर आपसे कहेंगे कि मैथिली ब्राह्मण और कर्ण कायस्थ की शादी के दौरान कुंडली मिलान नहीं करते हैं तो आपको अजीब लगेगा लेकिन यह सत्य है. दरअसल, मैथिल ब्राह्मण और कर्ण कायस्थ की कुंडली के जरिए नहीं बल्कि पणजी प्रथा के जरिए शादी होती है जिसे आमतौर पर सिद्धांत प्रथा भी कहा जाता है. बता दें कि मधुबनी के सौराठ सभा गाछी में आज भी मैथिल ब्राह्मणों और जाति के लोगों का 18- 20 पूर्वजों का नाम जाति, गोत्र आदि डाटा सुरक्षित रखा गया है. ना कंप्यूटर.. ना ताम्रपत्र या ऐसी सुविधा है. बल्कि पूरा डाटा एक दस्तावेज में सुरक्षित रखा गया है. बता दें कि यह 1300 ई. से सिद्धांत लिखने की शुरुआत हुई और तब से आज तक का डाटा यहां पर सुरक्षित है. शादी के दौरान वर पक्ष और वधू पक्ष के लोग यहां पहुंचते हैं और यहां वह मिलन करते हैं कि जिस घर में अपनी बेटी की या बेटे की शादी कर रहे हैं क्या वहां विवाह होना उचित है. आगे कोई आनुवंशिक बाधा तो उत्पन्न नहीं होगी ना.

इस साल भी सिद्धांत प्रथा हुआ शुरू
इस साल यानी कि 2025 में विवाह लग्न की शुरुआत हो गई है, तो सिद्धांत लिखने की रीति भी चल रही है. सभा गाछी में दोनों पक्षों के लोग आकर पिता, दादा, परदादा, नाना, परनाना आदि 7 पुश्तों का पूरा ब्यौरा (जनरेशन डेटा) मंगलकामना के साथ तार के पत्ते पर लिखा कर अपने कुल देवी के पास पूजा अर्चना कर नए होने वाले जोड़ों की दीघार्यु और शुभ आशीष की कामना करते हैं.
पंजीकर ने क्या कहा

Bharat.one की टीम से बात करते हुए पंजीकर बताते हैं कि मैथिल पर पहले ही बहुत शोध किया है जिसे साइंस भी अब मानता है. हालांकि, यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी है जिसे आप जनरेशन ग्रोथ बताते हैं कि जनरेशन में किसी तरह की कोई बीमारी या कोई परेशानी ना हो, बच्चों के गुण माता-पिता से गुण से मिलने आदि. हालांकि, वह बताते हैं कि पहले पणजी को विवाह से पहले यह हर समुदाय के लोगों के लोग मानते थे पर वो सौ-दो सौ सालों तक से ज्यादा जीवित नहीं रख पाए, लेकिन आज भी दो जाति के लोग इसे मानते हैं जिसमें एक मैथिली ब्राह्मण और कर्ण कायस्थ है.

सिद्धांत में 5 और 7 का अनुपात देखा जाता है, जिसमें की माता पक्ष के सात पुश्तों और पिता पक्ष के पुश्तों का मिलान किया जाता है. मिलन में सबसे अहम यह कि समगोत्री(एक जैसा गोत्र) ना हो, संबंध ना हो, मूल एक जैसा ना हो आदि.

पणजी प्रथा/सिद्धांत प्रथा का नियम
पणजी प्रथा के नियम के अनुसार माना जाता है कि विवाह ठीक करने से पहले जांच करा लें, फिर जब सब शुभ हो तब शादी करने को कहा जाता है. इसमें एक और चीज बताते हैं कि इसमें समगोत्र, मूल, संबंधी, अंतर जाति विवाह भी मनाही है. हालांकि, अब तो सरकार अंतरजातीय विवाह के लिए प्रोत्साहित करते हैं. राज्य सरकार और केंद्र सरकार तरह-तरह की स्कीम लाते हैं. लेकिन पंजी प्रथा को मानने वाले लोग आज भी दूसरे कास्ट में विवाह को मान्यता नहीं देते हैं.

तार के पत्ते पर ही क्यों लिखा जाता
जब सिद्धांत लिखा जाता है तो एक चीज आप नोटिस करेंगे कि यह तार के सूखे पत्ते पर लिखा जाता है. इस विषय में शोधकर्ताओं और पंजीकार का मानना है कि तार के पत्ते की आयु 1000 वर्ष होती है. जैसे एक आम मनुष्य अगर 100 वर्षों तक जीवित रहता है, ऐसे ही अगर तार के पत्ते पर लिखा हुआ कोई भी शब्द, दस्तावेज को अगर उसे हम सुरक्षित रखेंगे तो उसकी आयु हजार वर्षों तक होती है. और पूर्वजों की पूरी जानकारी आने वाले जनरेशन के बच्चे देख सकते हैं. पुश्तों में किसके साथ विवाह किसका हुआ, कौन से गांव, गोत्र, मूल, नाम को सुरक्षित एक हजार वर्षों तक रखने के अलावा तार का पत्ता शुद्ध भी माना जाता है. इसलिए पंजी (सिद्धांत) लिखने) के लिए तार के पत्तों का उपयोग किया जाता है. अंत में श्रेष्ठजनों के नाम और मंत्रों के उच्चारण के साथ नव जोड़े के लिए आशीर्वाद प्राप्त की जाती है.

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