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Gonda News: यूपी के गोंडा में स्थित भगवान वराह का प्राचीन मंदिर काफी पुराना है. मंदिर के महंत अजय कुमार मिश्रा बताते हैं कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब धरती को हिरण्याक्ष नामक राक्षस पाताल लोक में ले गया था, तब भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर धरती का उद्धार किया था.
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित भगवान वराह का प्राचीन मंदिर आस्था और इतिहास का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. यह मंदिर भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित है, जिनका संबंध धरती के उद्धार से जुड़ा हुआ है.
Bharat.one से बातचीत के दौरान मंदिर के महंत अजय कुमार मिश्रा बताते हैं कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब धरती को हिरण्याक्ष नामक राक्षस पाताल लोक में ले गया था, तब भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर धरती का उद्धार किया था. इसी कथा से प्रेरित होकर इस स्थान पर भगवान वराह की पूजा की परंपरा शुरू हुई.
कई सौ वर्ष पुराना मंदिर
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह मंदिर कई सौ वर्ष पुराना है और इसकी स्थापना प्राचीन ऋषि-मुनियों या तत्कालीन शासकों द्वारा कराई गई थी. माना जाता है कि भगवान विष्णु धरती को लेकर यहीं पर निकले थे, इसीलिए इस स्थान को सुकर खेत भी कहा जाता है.
मंदिर के नाम के पीछे का क्या है कारण?
अजय कुमार मिश्रा बताते हैं कि वराह भगवान मंदिर पर गोंडा श्रावस्ती बहराइच बलरामपुर अयोध्या समेत पूरे देश से श्रद्धालु आकर दर्शन करते हैं. अजय कुमार मिश्रा बताते हैं कि जब धरती को हिरण्याक्ष नामक राक्षस पाताल लोक में ले गया था, तब भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर धरती का उद्धार किया था. इसलिए इस मंदिर का नाम वराह भगवान के नाम से पूरे देश में प्रसिद्ध है. माना जाता है कि धरती को यहीं पर लेकर विष्णु भगवान निकले थे.
मंदिर का क्या है इतिहास?
हिंदी और संस्कृत के साहित्यकार डॉ. श्री नारायण तिवारी बताते हैं कि इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना और रोचक है. माना जाता है कि तब हिरण्यकश्यप छोटे भाई हिरण्याक्ष पृथ्वी लोक को चुराकर पाताल लोक में ले गया था. इससे भगवान काफी परेशान हुए और सारे भगवान ने भगवान विष्णु के पास गए और भगवान विष्णु से प्रार्थना की फिर भगवान विष्णु ने वराह का रूप लेकर हिरण्याक्ष का वध और पाताल लोक से पृथ्वी को वापस लेकर इसी स्थान पर निकले थे. डॉ. श्री नारायण तिवारी बताते हैं कि इस मंदिर की स्थापना काफी प्राचीन है. माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना पसका के राजा द्वारा 16वीं शताब्दी में कराया गया था.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Bharat.one से जुड़ गए.
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