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एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने का सबसे पावन व्रत माना जाता है. जानिए देवघर के ज्योतिषाचार्य से कब से करें शुरुआत, कितने साल रखें व्रत और क्या हैं इसके सही नियम?
देवघर. वैसे तो हिंदू धर्म में कई व्रत और त्योहार आते हैं लेकिन इनमें से एकादशी का व्रत सबसे प्रमुख होता है. माना जाता है कि एकादशी सीधे भगवान विष्णु के शरीर से उत्पन्न हुआ है. इसलिए जो भी जातक एकादशी का व्रत पूरे विधि विधान के साथ रख ले उन्हें दूसरा जन्म लेने की जरुरत नहीं पड़ती है. साल में 24 एकादशी के व्रत रखे जाते हैं यानी हर महीने दो एकादशी का व्रत रखना चाहिए एक कृष्ण पक्ष की एकादशी दूसरा शुक्ल पक्ष की एकादशी. एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा आराधना करें तो जातक के जीवन में कभी भी किसी प्रकार की परेशान नहीं आती है. लेकिन इस एकादशी के व्रत के भी कुछ नियम होते हैं तो चलिए देवघर के ज्योतिषाचार्य से जानते हैं कि एकादशी व्रत कौन-कौन रख सकता है? कितने सालों तक रखना चाहिए क्या है सही नियम?
देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुदगल ज्योतिष केंद्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने जानकारी देते हुए कहा कि जब बचपन में ही जातक को पूजा-पाठ, भक्ति और नियमों का ज्ञान हो जाए, तभी से श्रद्धा भाव के साथ एकादशी का व्रत शुरू किया जा सकता है. यह व्रत जीवन भर किया जा सकता है और व्यक्ति अपनी आस्था व स्वास्थ्य के अनुसार 80 वर्ष की आयु तक भी एकादशी व्रत का पालन कर सकता है. नहीं तो जब सूर्य उत्तरायण हो जाए तब एकादशी की व्रत की शुरुआत कर सकते हैं. माना जाता है कि नियमित रूप से एकादशी व्रत करने से मन की शुद्धि, आत्मिक शांति और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
कितने साल तक रखना चाहिए एकादशी का व्रत
एकादशी का व्रत जीवन भर रखना सबसे उत्तम माना गया है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति पूरे जीवन यह व्रत नहीं रख सकता, तो कम से कम 12 वर्षों तक एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए. 12 साल तक विधि-विधान और श्रद्धा के साथ एकादशी व्रत रखने के बाद उद्यापन करना आवश्यक होता है. तभी एकादशी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा मानी जाती है.
एकादशी व्रत में इन बातों का भी ध्यान रखना चाहिए
ज्योतिषाचार्य कहते हैं की एकादशी का व्रत सही विधि विधान के साथ ही रखना चाहिए सबसे खास इस बात का ध्यान रहे जो भी जातक एकादशी का व्रत करते हैं वह दशमी युक्त एकादशी का व्रत कदापि नहीं करनी चाहिए. हमेशा एकादशी युक्त द्वादशी का व्रत ही करें तभी शुभ फल की भी प्राप्ति होगी.
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