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मथुरा के इस मंदिर में विराजमान हैं मां पाताल भैरवी, 9 दिन होता है अलग-अलग श्रृंगार, हर मनोकामना होती है पूरी

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मथुरा: कृष्ण भूमि मथुरा में वैसे तो कई ऐसे स्थान और मंदिर हैं जहां का धार्मिक महत्व बहुत अलग है. इस पावन स्थल पर लाखों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं. योगीराज श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में एक ऐसा मंदिर है जहां माता पाताल भैरवी का हर दिन अलग-अलग श्रृंगार किया जाता है. माता का यह मंदिर त्रेता युग का बना हुआ है. मान्यता के अनुसार, पाताल भैरवी का श्रृंगार कभी गोपी के रूप में किया जाता है, तो कभी लक्ष्मी जी के रूप में.

इच्छापूर्ति के लिए विधि विधान से पूजा
श्री कृष्ण की पावन धरा, मथुरा नगरी में आपको कृष्ण के साथ-साथ अलौकिक और दिव्य शक्तियों के दर्शन होंगे. मथुरा का कोना-कोना दिव्य आस्थाओं से भरा हुआ है. यही कारण है कि यहां हर दिन हजारों श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन करने आते हैं. शारदीय नवरात्रों में मां पाताल भैरवी के मंदिर में लोगों का तांता दर्शन के लिए लगा रहता है. पाताल भैरवी मंदिर की सेवायत, पुजारी शिवांगी चतुर्वेदी ने मंदिर की मान्यता के बारे में Bharat.one से बातचीत करते हुए बताया कि मंदिर त्रेता युग का है. यहां हर दिन हजारों श्रद्धालु मां पाताल भैरवी के दर्शन करने आते हैं.

सभी मनोकामनाएं होती हैं पूरी 
मां सभी की मनोकामना को पूर्ण करती हैं. इतना ही नहीं, जो भी भक्त मां से मांगता है, उसकी मांग पूरी होती है. उन्हें मनवांछित फल प्राप्त होता है. शारदीय नवरात्रों में माता की लीला और भी बढ़ जाती है. भक्त विधि विधान से सेवा पूजा करते हैं और माता की आराधना में लीन रहते हैं. मां पाताल भैरवी सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं. इतना ही नहीं, यहां उनके दर पर जो भी भक्त आता है, वह निराश होकर नहीं लौटता है.

नवरात्रों में माता का विशेष श्रृंगार
Bharat.one से बातचीत में शिवांगी चतुर्वेदी ने बताया कि मां का 9 दिन अलग-अलग श्रृंगार होता है और माता अपने मन में श्रृंगार करती हैं. हम मन में सोचकर आते हैं कि हम अपने हिसाब से श्रृंगार करेंगे, लेकिन मां का मन नहीं होता है, तो वह श्रृंगार नहीं होने देतीं. जब उन्हें गोपी का रूप धारण करना होता है, तो वह स्वयं श्रृंगार गोपी के रूप में परिवर्तित कर देती हैं. उन्हें लक्ष्मी जी का श्रृंगार करना होता है, तो वह लक्ष्मी रूप में दर्शन देती हैं. इतना ही नहीं, यहां 9 दिन माता का अलग-अलग श्रृंगार होता है.

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