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महाभारत में 18 दिनों तक बाणों की शैय्या पर क्यों सोए रहे पितामह भीष्म? पढ़ें रोचक कथा

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हाइलाइट्स

महाभारत में पितामह भीष्म को बाणों की शैय्या पर मौत मिलने के पीछे एक बड़ा कारण था. उन्हें आशीर्वाद था कि वह अपनी इच्छानुसार मौत को बुला सकते हैं.

Story Of Bhishma Pitamah: महाभारत के युद्ध के बारे में तो लगभग सभी ने सुना है. धार्मिक ग्रंथों में इस युद्ध के बारे में पढ़ा भी होगा, जिसमें भगवान कृष्ण की लीलाओं का भी वर्णन है. उन्होंने धर्म की स्थापना के लिए अर्जुन के माध्यम से हर एक पापी को उसके अपराध का उचित दंड दिया था. वहीं आपने यह भी देखा होगा कि कैसे कई लोगों को अत्यधिक पीड़ा से गुजरने के बाद अपने प्राण त्यागने पड़े थे. इनमें अभिमन्यु, कर्ण, जयद्रथ आदि शामिल थे, लेकिन गंगापुत्र भीष्म को बाणों की शैय्या पर मौत मिली थी. क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों हुआ? आइए जानते हैं इसके पीछे की कथा के बारे में भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से.

भीष्म को इसलिए मिली थी बाणों की शैय्या
महाभारत में गंगापुत्र भीष्म को बाणों की शैय्या पर मौत मिलने के पीछे एक बड़ा कारण यह था कि उन्हें आशीर्वाद था कि वह अपनी इच्छानुसार मौत को बुला सकते हैं, वहीं वे महाभारत के इस पूरे युद्ध को अपनी आंखों से देखना चाहते थे.

ऐसे में पांडवों ने जब उन्हें बाणों से छलनी करते हुए सिर से पैर तक भेद दिया तो पूरे 18 दिनों तक उन्होंने प्राण नहीं त्यागे, लेकिन पितामह खुद भी यह नहीं जानते थे, उन्हें यह पीड़ा क्यों सहना पड़ रही? ऐसे में उन्होंने इसको लेकर भगवान कृष्ण से प्रश्न किया था, जिसका जवाब उन्हें मिला था.

भगवान कृष्ण ने भीष्म को बताया कि युवास्था के दौरान जब आप शिकार से लौट रहे थे और उनके रथ पर एक करकैंटा आ गिरा था, तो उसे पितामह ने तीर से उठाकर दूर कांटेदार झाड़ियों में फेंक दिया था. उसकी मृत्य तड़प-तड़प कर हुई थी, इसलिए उन्हें इस के दंडस्वरूप नुकीले तीरों की चुभन सहते हुए प्राण त्यागना पड़ा.

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