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10000 हाथियों के बराबर था कंस का हाथी, किसने किया था इसका वध? दिलचस्प है कहानी  

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kansa Elephant Story: श्री कृष्ण की नगरी मथुरा में पारंपरिक हाथी वध मेले का आयोजन किया गया. कंस के बारे में तो आपने बहुत कुछ सुना होगा. लेकिन कंस के हाथी के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. हर साल मथुरा में कंस के हाथी के लिए मेले का आयोजन किया जाता है. पर शायद ही आपको पता हो कि कंस के हाथी को किसने मारा था.

कैसे हुआ था कंस के हाथी का वध?
मथुरा का राजा कंस को कहा जाता है और कंस मथुरा पर अपना साम्राज्य खड़ा करने के बाद यहां राज्य किया करता था. कंस ब्रजवासियों के लिए एक निर्दय और अत्याचारी राजा था. लीलानंदन श्री कृष्ण ने लीला रचने के बाद मथुरा में देवकी के गर्व से जन्म लिया. मामा कंस के अत्याचारों से बृजवासियों को मुक्ति दिलाने के लिए वह गोकुल से मथुरा पहुंचे.

कंस को जब कृष्ण बलराम के मथुरा आने की सूचना मिली,तब कंस ने अपने शक्तिशाली हाथी कुबलियापीड़ को मथुरा के द्वार पर खड़ा कर दिया. कृष्ण बलराम को रोकने की कोशिश की. वहीं, कृष्ण बलराम ने कुबलियापीड हाथी का वध कर दिया. बताया गया है कि इस हाथी में करीब 10000 हाथियों का बल था. कंस का अत्यधिक बलशाली हाथी को कृष्ण और बलराम ने मारा था.

150 साल से हो रहा है हाथी वध मेला
हाथी वध मेले के आयोजक राज नारायण गौड़ ने लोकल18 से बातचीत में बताया कि यह मेला करीब डेढ़ सौ वर्षो से चला आ रहा है. पारंपरिक मेले का आयोजन हर वर्ष होता है. कुबलियापीड हाथी जो कि कंस का अधिक शक्तिशाली हाथी माना जाता था. कृष्ण बलराम ने उसे हाथी का वध किया था.

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उन्होंने बताया कि कृष्ण बलराम स्वरूपों के साथ-साथ कई अद्भुत और अलौकिक झांकियां निकाली गईं. हाथी वध मेले की झांकियां मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे. उन्होंने बताया की कुबलियापीड हाथी वध जन्म स्थान के पास बने हाथी वध स्थान पर किया जाता है. वहीं, कृष्ण बलराम स्वरूपों ने जैसे ही हाथी का वध किया तो बृजवासी भी लाठी डंडे लेकर हाथी पर टूट पड़े. लट्ठ से हाथी का वध कर दिया. डेढ़ सौ साल से चल रहे इस मेले में हजारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं.

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