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17 या 18 दिसंबर कब पड़ेगा साल का अंतिम प्रदोष व्रत? जानें सही तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

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Pradosh Vrat 2025: साल का अंतिम प्रदोष व्रत दिसंबर में पड़ रहा है, लेकिन तिथि को लेकर लोगों में है कन्फ्यूजन. 17 या 18 दिसंबर देवघर के ज्योतिषाचार्य से जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और किस विधि से करने पर मिलेगा भोलेनाथ का विशेष आशीर्वाद.

देवघर. कई तिथि ऐसी होती हैं जो भगवान शिव को समर्पित रहती हैं. शास्त्र के अनुसार उस दिन भगवान शिव की विशेष विधि से पूजा आराधना करते हैं तो भगवान शिव बेहद प्रसन्न होते हैं और जातक की हर मनोकामनाएं प्रसन्न होकर पूर्ण करते हैं. जीवन में सुख समृद्धि बढ़ती है. उन्हीं तिथि में से एक है प्रदोष व्रत जो हर महीने में दो बार आता है. प्रदोष पर शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल, बेलपत्र सहित पुष्प अर्पित करने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट होते हैं. साथ ही महादेव अत्यंत प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं. शास्त्रों में प्रदोष व्रत को शिव-पार्वती की कृपा का सर्वोत्तम माध्यम माना गया है. इसलिए जो भी भक्त पूरी श्रद्धा, विश्वास और भक्ति भाव से यह व्रत करते हैं. तो आइये देवघर के ज्योतिषाचार्य से जानते हैं कब है साल का आखिरी प्रदोष व्रत और क्या उस दिन करना चाहिए?

देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुद्गल ज्योतिष केंद्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने जानकारी देते हुए कहा कि हिंदू मान्यता के अनुसार प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखे जाने वाले इस व्रत के पुण्य फल से साधक के जीवन से जुड़े सभी कष्ट शीघ्र ही दूर हो जाते हैं. प्रदोष व्रत सभी जीवन से जुड़े दोष और बाधाओं को दूर कर मनोकामनाओं को पूरा करने वाला माना गया है. दूसरा प्रदोष व्रत इस महीने की 17 तारीख को रखा जाएगा. चूंकि यह प्रदोष व्रत बुधवार के दिन पड़ेगा इसलिए इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाएगा जिसे विधि-विधान से करने पर साधक को भगवान शिव की कृपा से करियर-कारोबार आदि में मनचाही सफलता प्राप्त होती है.

कब से शुरू हो रहा प्रदोष तिथि
ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि ऋषिकेश पंचांग के अनुसार पौष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि प्रारंभ
16 दिसंबर 2025, रात 11 बजकर 57 मिनट से हो रहा है. वहीं त्रयोदशी तिथि समाप्त 18 दिसंबर 2025, रात 2 बजकर 32 मिनट मे हो रहा है. इस अनुसार प्रदोष व्रत 17 दिसंबर को रखा जाएगा. प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 6 बजकर 04 मिनट से रात 8 बजकर 41 मिनट तक रहने वाला है.

कैसे करें प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा
बुध प्रदोष के दिन व्रत कर प्रदोष काल में शिवलिंग की पूजा षोडशोपचार विधि से पूजा आराधना करनी चाहिए. इस दिन नाम लिखा बेलपत्र धतूरा का पुष्प और फल अवश्य अर्पण करें. इसके साथ ही शिवलिंग या प्रतिमा के पास देसी घी का चौमुखी दीपक जलाकर शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए. ऐसा करने से भगवान शिव मां पार्वती बेहद प्रसन्न होंगी और आपकी हर मनोकामनाएं पूर्ण करेंगे.

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Mohd Majid

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17 या 18 दिसंबर कब पड़ेगा साल का अंतिम प्रदोष व्रत? जानें सही तिथि, पूजा विधि

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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