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2 घंटे में स्टॉल खाली, झारखंड की इस खास डिश का पूरा शहर दीवाना, 20 साल से नहीं बदला स्वाद

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जमशेदपुर. झारखंड के जमशेदपुर में स्थानीय व्यंजनों का एक अनूठा स्वाद है. यहां का धुस्का विशेष रूप से लोकप्रिय है. धुस्का एक पारंपरिक व्यंजन है, जो चावल और दाल से बनाया जाता है. इसे तैयार करने के लिए चावल और दाल को पीसकर 5 से 8 घंटे तक रखा जाता है. मिश्रण को सरसों तेल में तला जाता है. ताजा तला धुस्का मिर्च, धनिया, पुदीना और विशेष मसाले से तैयार चटनी के साथ परोसा जाता है, जिससे स्वाद और भी बढ़ता है.

जमशेदपुर के भालूबासा शीतला मंदिर के पास ‘तपन दा का धुस्का’ स्टॉल 20 साल से अपने स्वाद और गुणवत्ता के लिए मशहूर है. यह स्टॉल शाम 5:00 से 7:00 बजे तक लगता है. दो घंटे में ही उनका स्टॉक खत्म हो जाता है. तपन दा बताते हैं कि जब उन्होंने शुरुआत की थी तब धुस्का का एक पीस मात्र 2 रुपये का हुआ करता था. आज, बढ़ती मांग और महंगाई के बावजूद वह 8 रुपये प्रति पीस में धुस्का बेच रहे हैं.

नहीं बदलता स्वाद
तपन दा के धुस्के का स्वाद जमशेदपुर में ही नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों में भी बहुत प्रसिद्ध है. लोग दूर-दूर से यहां सिर्फ तपन दा का धुस्का खाने आते हैं. उनके धुस्का की खासियत है कि यहां स्वाद कभी नहीं बदलता. यह धुस्का हर बार उसी उत्कृष्टता और स्वाद के साथ परोसा जाता है, जिससे उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है.

झारखंड की संस्कृति है ये फूड
धुस्का सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि झारखंड की संस्कृति और परंपरा का एक हिस्सा है. जमशेदपुर में तपन दा की दुकान इस परंपरा का जीवंत उदाहरण है, जहां लोग न केवल स्वादिष्ट धुस्का का आनंद लेने आते हैं, बल्कि इस व्यंजन के साथ जुड़ी यादों और अनुभवों को भी संजोते हैं. धुस्का का स्वाद और तपन दा की सेवा भावना ने उन्हें एक स्थानीय हस्ती बना दिया है, जो स्वाद के साथ-साथ जमशेदपुर की संस्कृति का प्रतिनिधित्व भी करते हैं.


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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/recipe-special-jharkhand-dish-stall-empty-in-2-hours-city-crazy-about-taste-not-changed-for-20-years-8631986.html

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