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Acharya Santosh Gupta explained geeta not just whatsapp gyan can change your life

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दिल्लीः आज के तेज़ रफ्तार और तनाव भरे जीवन में लोग बाहर से भले ही सफल दिखते हों, लेकिन भीतर से टूट चुके हैं. ऐसे समय में भगवद गीता जीवन को दिशा देने वाला सबसे सशक्त ग्रंथ है, यह कहना है गीता प्राचार्य अभियान से जुड़े आचार्य संतोष कुमार गुप्ता का, जिन्होंने Bharat.one डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विशेष बातचीत में गीता के जीवनोपयोगी संदेश साझा किए. कार्यक्रम की थीम शांति, धर्म और जीवन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि ये तीनों मूल्य गीता में सहज रूप से मौजूद हैं, लेकिन आज की सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग गीता को पढ़ ही नहीं रहे.

गीता से दूर होते ही जीवन में बढ़ा तनाव
आचार्य संतोष कुमार गुप्ता ने कहा,जैसे-जैसे हम गीता से दूर होते गए, वैसे-वैसे हमारे जीवन में तनाव, अशांति और उलझनें बढ़ती चली गईं. गीता केवल पूजा या मंदिर जाने की शिक्षा नहीं देती, बल्कि यह बताती है कि जो भी कार्य हम कर रहे हैं, उसे कैसे बेहतर तरीके से किया जाए. उन्होंने IIT बॉम्बे में हुए एक सेमिनार का ज़िक्र करते हुए बताया कि आज पढ़े-लिखे युवा भी यह नहीं जानते कि गीता वास्तव में जीवन को कैसे प्रभावित करती है.

शरीर नहीं, मन की शुद्धि ज़रूरी
आधुनिक जीवनशैली पर सवाल उठाते हुए आचार्य संतोष कुमार गुप्ता ने कहा कि आज हम शरीर को लेकर तो बेहद सजग हैं, लेकिन मन और विचारों की शुद्धता पर ध्यान नहीं देते. गीता बताती है कि शरीर के भीतर एक सूक्ष्म शरीर होता है, मन, बुद्धि और प्राण. अगर विचार अशुद्ध हैं, तो जीवन कैसे शुद्ध होगा. उन्होंने समझाया कि गीता में आहार का अर्थ सिर्फ खाना नहीं, बल्कि वह सब कुछ है जो हम देखते, सुनते और महसूस करते हैं.

युवाओं के लिए गीता का संदेश
करियर प्रेशर और असफलता से टूट चुके युवाओं को लेकर आचार्य संतोष कुमार गुप्ता ने साफ कहा,करियर सब कुछ नहीं है. यह शरीर, यह दुनिया अंतिम सत्य नहीं है. जब युवा यह समझ लेंगे, तो वे बेहतर प्रदर्शन भी करेंगे और परिणाम चाहे जो भी हो, मानसिक रूप से संतुलित रहेंगे. आचार्य का मानना है कि गीता युवाओं को परिणाम से ऊपर उठकर कर्म करना सिखाती है.

अपने लिए नहीं, समाज के लिए जिएं
आचार्य ने कहा कि मानव जीवन दुर्लभ है और इसका उद्देश्य सिर्फ स्वयं के लिए जीना नहीं, बल्कि समाज और देश के लिए उपयोगी बनना है. अपने कर्तव्य को पहचानिए, अपने कर्म को ईश्वर मानिए और अपने आसपास के लोगों में भगवान को देखिए यही गीता का सार है.

गीता को WhatsApp ज्ञान तक सीमित न करें
गीता अध्ययन पर ज़ोर देते हुए आचार्य ने कहा,गीता का ज्ञान WhatsApp फॉरवर्ड से नहीं मिलेगा. इसे गंभीरता से पढ़ना होगा. उन्होंने ‘गीता प्राचार्य अभियान’ का ज़िक्र करते हुए बताया कि यह अभियान निशुल्क रूप से गीता के प्रत्येक श्लोक की व्याख्या करता है, जिसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम उपलब्ध हैं.

हरे कृष्ण नाम जप का महत्व
नाम जप पर पूछे गए सवाल के जवाब में संतोष जी ने कहा,गीता हमें 24 घंटे स्मरण की तकनीक सिखाती है. शुरुआत में एक माला हरे कृष्ण महामंत्र का जप करें, फिर धीरे-धीरे इसे बढ़ाएं. एक समय ऐसा आता है जब पूरा जीवन ही ध्यान बन जाता है और वही आनंद है.

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