नोएडा: आस्था के महापर्व छठ पूजा की तैयारियों में श्रद्धालु एक तरफ तो डूबे हुए हैं. वहीं, इस साल नोएडा के कालिंदीकुंज बॉर्डर पर स्थित यमुना घाट पर श्रद्धालुओं में नाराजगी देखने को मिल रही है. बीते दो दशकों से यह स्थान छठ व्रतियों का प्रिय पूजा स्थल रहा है, लेकिन इस बार घाट की हालत जहरीले पानी और गंदगी ने श्रद्धालुओं को अस्थाई रूप से बने अन्य घाटों की ओर रुख करने पर मजबूर कर दिया है.
प्रदूषण के कारण पानी में झाग और बदबू
हालात यह है कि यमुना में प्रदूषण के कारण पानी में जहरीले झाग और बदबू फैली हुई है, जो भक्तों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है. छठ महापर्व पर जल में डूबते सूरज और उगते सूरज को अर्घ्य देने की परंपरा का पालन करने के लिए साफ-सुथरे और स्वच्छ जल की आवश्यकता होती है, जो इस बार यमुना घाट पर पूरी होती नहीं दिख रही है. श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रशासन की ओर से समय रहते सफाई के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं, जिससे यमुना घाट की स्थिति खराब बनी हुई है.
दूसरे घाटों का श्रद्धालु कर रहे हैं रुख
बता दें कि नोएडा में इसके अलावा कई अन्य जगह पर सालों से अस्थाई घाटों पर छठ व्रती महिलाएं छठ मैया की पूजा अर्चना करती हैं. नोएडा के सेक्टर 63 के बहलोलपुर, निठारी, सेक्टर-44, सेक्टर-110, सदरपुर और सेक्टर-71, निठारी सेक्टर-31 जैसे स्थानों पर भी अस्थाई रूप से छठ घाट बनाए गए है. इनमें से सेक्टर-31 निठारी और इसी तरह अन्य स्थानों पर छठ घाट पर पूजा करने का श्रद्धालु मन बना रहे हैं. इसी तरह अन्य क्षेत्रों में भी स्थानीय समितियों ने अस्थाई घाटों का निर्माण कराया है, ताकि श्रद्धालु अपनी परंपराओं का पालन कर सकें.
समिति के पदाधिकारियों ने किया दावा
नोएडा छठ पूजा समिति के अनुसार, कालिंदीकुंज बॉर्डर पर स्थित यमुना घाट पर सफाई और अन्य तैयारियों का काम समय पर पूरा करने का दावा किया गया है. समिति के पदाधिकारी ने बताया कि प्रशासनिक मदद से वे हर हाल में घाट की सफाई और सुरक्षित जल उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे, जिससे श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो.
वहीं, पिछले कुछ सालों में यमुना के जल में बढ़ते प्रदूषण के चलते छठ पूजा के लिए अस्थाई घाटों की मांग और निर्माण में इजाफा हुआ है. जहां एक ओर श्रद्धालु यमुना घाट की ओर न जाने का मन बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अपने पास के अन्य घाटों पर पूजा करने का विचार कर रहे हैं, ताकि स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण में छठ व्रत का पालन कर सकें.
FIRST PUBLISHED : November 6, 2024, 09:51 IST
