मैरी कुंवारी थी और गर्भवती हो गई, जिसे पाप माना जाता थातब कुंवारी मां बनने की सजा पत्थर से मारकर मौत होती थीमंगेतर इतना नाराज था कि उसने रिश्ता खत्म करने का फैसला कर लिया था
क्राइस्ट यानि यीशु मसीह की मां जब गर्भवती हो गईं, तब वह डर गईं. तब वह कुंवारी थीं. उसकी शादी नहीं हुई थी. उस दौर में ये भय़ंकर पाप और अपराध माना जाता था.जो भी स्त्री इस अपराध की दोषी पाई जाती थी, उसको लोग पत्थर से मार-मारकर जान ले लेते थे. इस स्थिति ने मरियम की नींद ही उड़ा दी. जब उनके मंगेतर को पता लगा तो वह नाराज होकर शादी ही तोड़ने के बारे में सोचने लगा
जब मैरी (मरियम) गर्भवती हुईं, तो वह प्राचीन यहूदी साम्राज्य के गलील प्रांत में स्थित नाज़रत (Nazareth) में थीं. उस दौर में वहां कुंवारी लड़कियों का गर्भवती होना गंभीर सामाजिक अपराध और पाप माना जाता था. ऐसी महिलाओं को कठोर सजा (जैसे पत्थर मारकर मृत्यु) का सामना करना पड़ता था.
हम सभी को मालूम है कि जब यीशु यानि क्राइस्ट का जन्म बैतलहम के एक साधारण से मवेशी के चारागाह में हुआ था. मरियम नहीं चाहती थीं कि उनके घर में इस बात का पता नहीं लगे. उसी वजह से उन्होंने घर से दूर आकर बैतलहम में बच्चे को जन्म दिया.
मरियम की सगाई हो चुकी थी
दरअसल गर्भवती होने से पहले मैरी (मरियम) की सगाई हो चुकी थी. जिस युवक से सगाई हुई, उसका नाम यूसुफ था. तब सगाई के बाद भी लड़के को शादी होने तक अलग रहना होता था. इसी बीच मैरी की कोख में जब गर्भ ठहर गया तो उसको बताया गया कि ईश्वर के जरिए एक पवित्र आत्मा उसके कोख में आई है, उन्हें इसको जन्म देना होगा.

वह डरी हुई थीं
जैसे ही मैरी ने ये बात सुनीं, वो डर गईं. तब के समाज कोई भी लड़की बगैर शादी मां नहीं बन सकती थी. अगर ये बात किसी को भी पता चल जाती तो उनको अपराधी मानकर जान ले ली जाती. उन्होंने इस बात को छिपाने की कोशिश की लेकिन जब इसकी जानकारी उसके मंगेतर यूसुफ को हुई तो वो खासा नाराज हो गया.
नाराज मंगेतर ने तब क्या फैसला किया
उसने फैसला कर लिया कि वह मरियम के जीवन से ही निकल जाएगा. वह भी हैरान था कि मैरी कैसे गर्भवती हो गई. उसकी गर्भ में कैसे बच्चा आ गया. हालांकि वह उसे सुरक्षित रखना चाहता था, लिहाजा उसने चुपचाप अलग होने का फैसला किया. यही तय करके वह अपने घर लौटा. काफी परेशान था. समझ नहीं पा रहा था कि जिस लड़की को वह इतना चाहता था, वह कैसे और कब गर्भवती हो गई.

तब कुंवारी मैरी की बहुत बदनामी होती
ये तो तय था कि अगर कुंवारी मैरी के गर्भ की बात सामने आ जाती तो उनकी बहुत बदनामी होती, सामाजिक बहिष्कार का खतरा पैदा हो जाता. साथ में मौत का दंड भी. कुल मिलाकर मरियम बहुत मुश्किल में फंस गईं थीं.
क्यों फिर मरियम के मंगेतर ने उसे नहीं छोड़ा
बाइबल में इस घटना का उल्लेख है. बताया गया कि यूसुफ ने मरियम को छोड़ देने का फैसला किया था. लेकिन उसने फिर ऐसा एक सपने के कारण नहीं किया. उसे एक सपना आया जिसमें एक दूत द्वारा बताया गया कि मरियम के गर्भ में पाला जा रहा बच्चा पवित्र आत्मा का फल है.
शादी तभी की जब उसने यीशू को जन्म दे दिया
जब यूसुफ जागा, तो उसने वही किया जो प्रभु के दूत ने उसे आज्ञा दी थी. वह मरियम को पत्नी के रूप में अपने घर ले गया. हालांकि जब तक उसने एक बेटे को जन्म नहीं दिया, तब तक उसने विवाह नहीं किया. बच्चे का नाम यीशु रखा गया. हालांकि कुंवारी मां बनने के कारण ईसाई धर्म में मरियम को विशेष स्थान मिला. मरियम ने भी धैर्य और विश्वास के साथ इस स्थिति का सामना किया
बेशक 25 दिसंबर को यीशु मसीह का जन्मदिन मनाया जाता है लेकिन ऐतिहासिक रूप से यह तारीख पूरी तरह सटीक नहीं मानी जाती. बाइबल में यीशु के जन्म की कोई निश्चित तारीख नहीं दी गई है. साधारण स्थल: यीशु का जन्म एक साधारण से मवेशी के चारागाह में हुआ था, क्योंकि बैतलहम में सभी जगहें भर चुकी थीं.
बाइबल के अनुसार, मरियम पवित्र आत्मा की शक्ति से कुंवारी रहते हुए ही गर्भवती हो गयी थी; इस घटना को घोषणा (Annunciation) के रूप में जाना जाता है, जब देवदूत गेब्रियल उसके सामने प्रकट हुए. उसे बताया कि वह यीशु नाम के एक पुत्र को जन्म देगी. स्वर्गदूत गेब्रियल ने मरियम को दर्शन देकर उसकी गर्भावस्था की सूचना दी
FIRST PUBLISHED : December 24, 2024, 15:05 IST

















