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Garuda Purana: मृत्यु के बाद क्यों जरूरी तेरहवीं भोज, क्या सच में 13 दिनों तक घर में रहती है आत्मा, गरुड़ पुराण में लिखी ये बात

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Garuda Purana Ki Baatein: गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के 13 दिन बाद तक मृतक की आत्मा का घर में ही वास होता है. आत्मा को मृत्युलोक से यमलोक पहुंचने में करीब एक साल का समय लगता है. जिस मृतक आत्मा के नाम का पिंड…और पढ़ें

उज्जैन. हिंदू धर्म में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी आत्मा की शांति के लिए तेरहवीं भोज का बहुत अधिक महत्व है. संसार में जन्म और मरण ये दो एक ऐसी सच्चाई हैं, जो तय है. इसे कोई नहीं बदल सकता है. जिसने भी इस दुनिया में जन्म लिया है, उसकी मृत्यु तय है. हिंदू धर्म में गर्भधारण से लेकर मृत्यु तक 16 संस्कार बनाए गए हैं. इन्हीं संस्कारों को मानते हुए मनुष्य का जीवन चक्र चलता है. इन 16 संस्कारों में एक संस्कार अंतिम संस्कार भी शामिल है. मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के 13 दिन बाद तक शोक मनाया जाता है लेकिन ऐसा क्यों, गरुड़ पुराण में इस बारे में जिक्र किया गया है.

ऐसा माना जाता है कि मृत्यु के बाद तेरहवीं तक आत्मा अपनों घर में सदस्यों के बीच ही रहती है. इसके बाद उसकी यात्रा दूसरे लोक के लिए शुरू होती है. उसके कर्मों का हिसाब किया जाता है लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर तेरहवीं भोज क्यों किया जाता है. इससे उस मृत व्यक्ति की आत्मा को क्या लाभ मिलता है. उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज से इस बारे में जानते हैं.

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क्यों जरूरी है पिंडदान?
उन्होंने बताया कि गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद 13 दिन तक मृतक की आत्मा का घर में ही वास होता है. आत्मा को मृत्युलोक से यमलोक पहुंचने में करीब एक साल का समय लग जाता है जबकि जिस मृतक आत्मा के नाम से पिंडदान नहीं किया जाता है, उसे तेरहवीं के दिन यमदूत जबरन घसीटते हुए यमलोक लेकर जाते हैं. ऐसे में यात्रा के दौरान आत्मा को काफी कष्ट उठाने पड़ते हैं, इसलिए मृतक की आत्मा की शांति के लिए तेरहवीं भोज को जरूरी माना गया है. गरुड़ पुराण में तो यहां तक कहा गया है कि यदि मृतक की तेरहवीं न कराई जाए, तो उसकी आत्मा पिशाच योनि में भटकती रहती है.

अगर ब्राह्मण भोज न करवाया जाए, तो…
हिंदू धर्म में हर कोई ब्राह्मण को भोजन करा सकता है. ब्राह्मण को भोजन कराने से अनेक प्रकार के कष्ट और दोष मिट जाते हैं लेकिन तेरहवीं के दिन ब्राह्मण भोज बहुत जरुरी माना गया है. इस दिन ब्राह्मण द्वारा सभी क्रियाएं कराई जाती हैं. ऐसे में अगर ब्राह्मण भोज न करवाया जाए, तो मृतक की आत्मा पर ब्राह्मणों का कर्ज चढ़ जाता है. गरुड़ पुराण के अनुसार, इससे मृतक की आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती है और उसे कष्ट भोगने पड़ते हैं.

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मृत्यु के बाद क्या 13 दिनों तक घर में रहती है आत्मा, क्या कहता है गरुड़ पुराण?

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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