Home Uncategorized Maha Kumbh Mela 2025: महाकुंभ में आकर्षण का केंद्र बना ऋषि भारद्वाज...

Maha Kumbh Mela 2025: महाकुंभ में आकर्षण का केंद्र बना ऋषि भारद्वाज आश्रम, यहां हुई थी विमान की खोज! जानें और भी खास बातें

0
9



प्रयागराज में महाकुंभ मेले का शुभारंभ 13 जनवरी से होने जा रहा है. इस बार महाकुंभ मेले में ऋषि भारद्वाज का आश्रम भी आकर्षण का केंद्र है. यूपी की योगी सरकार ने 13 करोड़ रुपए की लागत से इस आश्रण का पुनर्निर्माण किया है, जिससे इसकी तस्वीर बदल गई है. यहां पर पर्यटकों की संख्या बढ़ गई है. यहां के पुजारी कलानिधि गोस्वामी और विद्यानिधि गोस्वामी का कहना है कि जब से इस आश्रम का पुनर्निमाण हुआ है, यहां आने वालों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हो गई है. ऋषि भारद्वाज के इस आश्रम से जुड़े कई पौराणिक महत्व हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में.

महाकुंभ मेले के लिए प्रयागराज में साधु-संतों और श्रद्धालुओं के आने सिलसिला चल रहा है. आस्था के केंद्र महाकुंभ से हजारों लोगों की रोजी रोटी भी जुड़ी है. गाजीपुर के सरोज केवट यहां संगम किनारे चुरमुरे बेचते हैं. उनका कहना है कि उनके रोजगार में काफी बढ़ोत्तरी हो गई है और कमाई भी दोगुना हो गई है.

यहां हुई थी विमान की खोज!
लोक मान्यताओं के अनुसार, प्रयागराज के ऋषि भारद्वाज के आश्रम में पहली बार विमान उड़ाने की टेक्नोलॉजी की खोज हुई थी. ऋषि भारद्वाज ने विमान उड़ाने के तरीकों पर शोध किया था. प्रयागराज विद्वत परिषद के अध्यक्ष विनय पाठक के अनुसार, महर्षि भारद्वाज विमान बनाने और उसे उड़ाने की तकनीक खोजने वालों में से एक हैं. इसका वर्णन पुराणों में है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस आश्रम में ही ऋषि भारद्वाज ने पुष्पक विमान का डिजाइन और निर्माण किया था. यह भारद्वाज ऋषि के अद्भुत ज्ञान का प्रमाण था.

ऋषि भारद्वाज आश्रम की खास बातें
1. इस आश्रम का निर्माण सप्त ऋषियों में से एक ऋषि भारद्वाज ने की थी.

2. जब प्रभु राम को वनवास हुआ था, तो वे माता सीता और अनुज लक्ष्मण के साथ सबसे पहले ऋषि भारद्वाज के आश्रम भी आए थे. यहां पर ऋषि भारद्वाज ने उनको चित्रकूट जाने का सुझाव दिया था.

3. भारद्वाज आश्रम का रामायण से गहरा संबंध है. उस समय में यह एक गुरुकुल था, जहां पर शिक्षा प्रदान की जाती थी. इस आश्रम में यज्ञ, ध्यान और तप आदि किया जाता था.

4. लंका विजय के बाद प्रभु राम भारद्वाज आश्रम में आए थे. उन्होंने यहां पर स्थित भारद्वाजेश्वर शिवलिंग की पूजा की थी. इस वजह से भी इस आश्रम का महत्व अधिक है. इस शिवलिंग की स्थापना ऋषि भारद्वाज ने की थी.

5. लोग अपने आध्यात्मिक विकास और ​आत्म चिंतन के लिए ऋषि भारद्वाज के आश्रम में आते हैं. यह आश्रम गंगा के तट पर बसा हुआ है, जिसमें ऋषि भारद्वाज की एक प्रतिमा भी स्थापित है.

6. इस आश्रम में तीन कुंड हैं, जिनका नाम पार्वती कुंड, भरत कुंड और सीता कुंड है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version