Puja Tips: हर इंसान अपने-अपने धर्म और आस्था के अनुसार ईश्वर की आराधना करता है. यह साधना न केवल आत्मा को शांति देती है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता और शुभता भी लेकर आती है. देवी-देवताओं की कृपा भी तब बरसती है, जब आपकी श्रद्धा सच्ची हो. फिर चाहे आपका पूजा करने का तरीका जो भी हो उससे भगवान फल देने में पीछे नहीं हटते.
लेकिन अकसर अपने आसपास कई लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें हमने देखा कि उनके द्वारा की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती और भगवान उनकी पुकार जल्दी सुन लेते हैं. क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है और आखिर भगवान इन लोगों की प्रार्थना जल्दी क्यों सुन लेते हैं. तो आइए इन बारे में ज्योतिषाचार्य व वास्तु सलाहकार डॉ अरविंद पचौरी से विस्तार में इसका कारण जानते हैं.
इस कारण कभी खाली नहीं जाती प्रार्थना
दरअसल, पूजा करने का तरीका तो सबका अलग होता है लेकिन भगवान की भक्ति के लिए सबसे ज्यादा जरूरी व्यक्ति के द्वारा दैनिक जीवन में किये जाने वाले कर्म होते हैं. मान्यताओं के अनुसार, व्यक्ति को उसकी पूजा का पुण्य फल तभी प्राप्त होता है जब वह अपने रोजमर्रा के जीवन में कुछ बातों का ध्यान रखता है. अगर इन नियमों का पालन करते हुए वह अपनी ईश्वर की भक्ति करता है ति भगवान उसकी प्रार्थना कभी खाली नहीं जाने देते हैं. आइए जानें कौन-कौन से हैं वो नियम.
यह भी पढ़ें- Vikat Sankashti Chaturthi 2025: विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन करें इन विशेष चीजों का दान, घर में होगा रिद्धि-सिद्धि का वास
सच्चे कर्म करना
मनुष्य का जीवन उसके कर्मों पर आधारित होता है, इसलिए कर्म का महत्व जीवन में सर्वोपरि है. कुछ ऐसा ज्ञान श्रीमद् भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने भी अर्जुन को दिया और कहा कर्म का कर्म करो फल की चिंता मत करो. कर्म ही व्यक्ति को ईश्वर तक पहुंचाने का मार्ग दिखाता है. जो व्यक्ति अच्छे कर्म करता है उसका जीवन सुखमय और शांत रहता.ऐसे व्यक्ति की सभी मनोकामनाएँ शीघ्र पूर्ण होती हैं.
माता-पिता की करें सेवा
माता-पिता को भारतीय संस्कृति में ईश्वर के समान माना जाता है. उनकी सेवा करना संतान का पहला कर्तव्य है. जो संतान तन, मन और धन से माता-पिता को सम्मान देती है वह उनके आशीर्वाद की अधिकारी बनती है, शास्त्रों में कहा गया है.
“अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविन:
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्॥” जिसका अर्थ है कि जो व्यक्ति वृद्धजनों का आदर करता है और उनकी सेवा करता है उसकी आयु, विद्या, यश और बल चारों बढ़ते हैं.
यह भी पढ़ें- Vastu Upay of Kapoor: वातावरण शुद्ध करने के साथ वास्तु दोष भी दूर करता है कपूर, यहां जानें इससे जुड़े कुछ सरल उपाय
अहंकार,क्रोध और लालच से बचें
अहंकार, क्रोध, मोह और लालच ये चार बातें मनुष्य की दुश्मन होती हैं. भले ही कोई प्रतिदिन पूजा-पाठ करे, मंदिर जाए या शिवलिंग पर जल चढ़ाए, यदि उसका मन दूषित है और व्यवहार में अहंकार या लालच है तो उसकी पूजा निरर्थक है. सच्ची पूजा वह होती है जिसमें मन शुद्ध हो भावनाएं निर्मल हों और व्यवहार में विनम्रता हो.
जरूर करें दान
दान एक ऐसा पुण्य है जो न केवल इस जीवन में बल्कि अगले जन्मों में भी फल देता है. लेकिन दान का फल तभी प्राप्त होता है जब वह निस्वार्थ भाव से दिया गया हो. अगर किसी ने दान इस उद्देश्य से किया कि बदले में कुछ मिले या किसी को दुःखी करके अहंकारवश दान दिया तो उस दान से पुण्य नहीं बनता.
