Last Updated:
Gogamedi Mandir Dispute : गोगामेड़ी मंदिर में मुस्लिम पद्धति से कलमा पढ़े जाने पर विवाद हुआ, युवती ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की. गोगाजी महाराज राजस्थान के पूज्य लोकदेवता हैं. वीडियो में यह भी दिखता है कि जब युवती सवाल उठाती है तो उसे टालने की कोशिश की जाती है. जानें क्या है पूरा मामला. साथ ही क्या है गोगाजी महाराज का इतिहास.
Rajasthan Gogamedi Temple: राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के गोगामेड़ी गांव स्थित प्रसिद्ध गोगाजी महाराज के मंदिर को लेकर हाल ही में एक विवाद सामने आया है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक युवती मंदिर परिसर में मौजूद एक व्यक्ति से सवाल करती दिखाई देती है, कि यह हिंदू देवता का मंदिर होने के बावजूद यहां मुस्लिम पद्धति से कलमा क्यों पढ़ा जा रहा है? वीडियो में युवती यह भी कहती सुनाई देती है कि गोगाजी महाराज हिंदू धर्म में पूज्य देवता हैं, ऐसे में इस तरह की धार्मिक प्रक्रिया को मंदिर में क्यों अनुमति दी जा रही है?
युवती ने आरोप लगाया है कि मंदिर परिसर में हुसैन नामक युवक बैठकर कलमा पढ़ रहा है. मंदिर प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा. वीडियो में यह भी दिखता है कि जब युवती सवाल उठाती है तो उसे टालने की कोशिश की जाती है. उसने प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है. फिलहाल जिला प्रशासन या मंदिर समिति की ओर से इस पर कोई आधिकारिक और स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है. अब इस पूरे मामले को लेकर सवाल ये बनता है कि गोगाजी कौन है और आखिर क्यों यह युवती इसका विरोध कर रही है?. इसका जवाब गोगाजी महाराज के जीवन से जुड़े इतिहास से जुड़ा है.
जानिए कौन है गोगाजी महाराज
शिक्षाविद और लेखक राजेंद्र मधुकर ने बताया कि इस गोगाजी महाराज राजस्थान के प्रमुख लोकदेवताओं में से एक हैं. उन्हें गोगा वीर, जाहरवीर गोगाजी और राजस्थान में जाहर पीर के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार उनका जन्म 11वीं शताब्दी के आसपास चौहान राजपूत वंश में हुआ था. उनके पिता राजा जेवर सिंह ददरेवा के शासक थे और माता बाछल देवी धार्मिक और तपस्वी स्वभाव की थीं. कहा जाता है कि माता बाछल देवी ने गुरु गोरखनाथ की घोर तपस्या की थी, जिसके फलस्वरूप गोगाजी महाराज का जन्म हुआ.
महमूद गजनवी से बचाई थी गाएं
उन्होंने बताया कि, लोककथाओं के अनुसार गोगाजी महाराज ने विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी के आक्रमणों के समय गौ-रक्षा और धर्म की रक्षा के लिए युद्ध किया. उन्होंने वृद्धावस्था में अपने भाई-बन्धुओं, पुत्र-पौत्रों सहित अपने प्राणों की आहुति दे दी, लेकिन गायों और जनसामान्य की रक्षा से पीछे नहीं हटे. यही कारण है कि उन्हें गोरक्षक वीर भी कहा जाता है और हिंदू समाज में उनका स्थान एक देवतुल्य योद्धा का है. बताया जाता है कि कि जब महमूद गजनवी सोमनाथ मंदिर को लूटने के बाद ददरेवा गांव से जा रहा था तभी गोगाजी वहां से अपनी गायों को लेकर जा रहे थे.
गोगाजी और गजनवी में युद्ध
तब गोगाजी से गजनवी से पूछा कि कहां से आ रहे हो. तब उसने कहा हम सोमनाथ मंदिर को लूटकर वापस जा रहे हैं. इसके बाद गोगाजी ने गजनवी से सारा सोना वापस मंदिर में रखने को कहा. तब उसे गुस्सा आ गया और उसने अपनी सेना को गोगाजी और उनकी गायों को मार देने के आदेश दिए. इस दौरान गोगाजी के भाई-बन्धुओं और पुत्र भी वहां आ गए. फिर महमूद गजनवी और गोगाजी के बीच युद्ध हुआ. युद्ध के दौरान अपनी गायों को बचाने के लिए गोगाजी उनके भाइयों और उनके पुत्रों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी.
राजस्थान में राखी की जाती है अर्पित
राजस्थान में राखी के त्यौहार के बाद गोगाजी को राखी अर्पित की जाती है. गोगाजी का महत्व हिंदू धर्म में बहुत अधिक है. हनुमानगढ़ जिले के नोहर उपखंड में स्थित गोगामेड़ी को गोगाजी महाराज की समाधि स्थल माना जाता है. यहां हर वर्ष भाद्रपद कृष्ण नवमी को गोगा नवमी का विशाल मेला लगता है, जिसमें दूर-दराज से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. परंपरागत रूप से यहां हिंदू विधि से पूजा-अर्चना की जाती रही है. गोगाजी को नागदेवता व वीर देवता के रूप में पूजा जाता है.
नोट- न्यूज18 वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है.
About the Author

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
















