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Surya Dev Ki Aarti: रविवार को करें सूर्य देव की आरती, पद-प्रतिष्ठा में होगी वृद्धि, मिटेगा कुंडली का ​सूर्य दोष!

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Surya Dev Ki Aarti: रविवार का दिन भगवान भास्कर की पूजा के लिए है. सूर्य पूजा से कुंडली का सूर्य दोष दूर होगा. पद और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. सूर्य देव की दो आरती हैं. एक है जय कश्यप-नन्दन, ओम जय अदिति-नन्दन, दूसरी आरती है…और पढ़ें

रविवार को करें सूर्य आरती, पद-प्रतिष्ठा में होगी वृद्धि, मिटेगा सूर्य दोष!

सूर्य देव की आरती.

रविवार का दिन भगवान भास्कर की पूजा के लिए है. इस दिन लोग स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं. उसके बाद उनकी पूजा करते हैं. सूर्य पूजा से कुंडली का सूर्य दोष दूर होगा. पद और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. जल में गुड़, लाल रंग फूल, लाल चंदन आदि डालकर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए. उस दौरान आप सूर्य मंत्र का उच्चारण करें. फिर सूर्य चालीसा का पाठ करें. आप चाहें तो आदित्य हृत्य स्तोत्र का भी पाठ कर सकते हैं. पूजा का समापन सूर्य देव की आरती से करें. सूर्य आरती के लिए ​कपूर या फिर दीपक का उपयोग कर सकते हैं. सूर्य देव की दो आरती हैं. एक है जय कश्यप-नन्दन, ओम जय अदिति-नन्दन, दूसरी आरती है ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान. आइए जानते हैं सूर्य आरती के बारे में.

भगवान सूर्य की आरती
जय कश्यप-नन्दन, ओम जय अदिति-नन्दन।
त्रिभुवनतिमिरनिकन्दन भक्तहृदय चन्दन।।

सप्तअश्वरथ राजित एक चक्रधारी।
दुःखहारी सुखकारी, मानस मलहारी।। ओम जय कश्यप-नन्दन

सुरमुनिभूसुरवन्दित विमल विभवशाली।
अघदलदलन दिवाकर दिव्य किरणमाली।। ओम जय कश्यप-नन्दन

सकलसुकर्मप्रसविता सविता शुभकारी।
विश्वविलोचन मोचन भवबन्धनभारी।। ओम जय कश्यप-नन्दन

कमलसमूहविनाशक नाशक रूम तापा।
सेवत सहज हरत अति मनसिज सन्तापा।। ओम जय कश्यप-नन्दन

नेत्र व्याधिहर सुरवर भू-पीड़ाहारी।
वृष्टिविमोचन सन्तत परहित व्रतधारी।। ओम जय कश्यप-नन्दन

सूर्यदेव करुणाकर अब करुणा कीजै।
हर अज्ञानमोह सब तत्त्वज्ञान दीजै।। ओम जय कश्यप-नन्दन

सूर्य देव की आरती
ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।
अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।। ॐ जय सूर्य भगवान

ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।
फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।। ॐ जय सूर्य भगवान

संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।
गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।। ॐ जय सूर्य भगवान

देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।
स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।। ॐ जय सूर्य भगवान

तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।
प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।। ॐ जय सूर्य भगवान

भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।
वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।। ॐ जय सूर्य भगवान

पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।
ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।। ॐ जय सूर्य भगवान

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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