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this Ram temple miraculous story bed dried up rain stopped falling tree not move mandir brick, ‘झमाझम हुई बारिश, लेकिन बिस्तर सूखा रह गया’, चमत्कारों से भरी इस राम मंदिर की कहानी

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Ballia Unique Temple: बलिया में स्थित एक मंदिर की कहानी काफी चमत्कारिक है. मंदिर के संस्थापक रजनीकांत सिंह के अनुसार, इस मंदिर और अयोध्या के भव्य राम मंदिर के बीच कई रोचक समानताएं भी हैं. दोनों मंदिर लगभग 500 साल बाद दोबारा स्थापित हुए हैं और चौखट बनाने वाले शिल्पकार भी एक ही परिवार के बताए जाते हैं.

बलिया: भारत देश में ऐसे कई मंदिर हैं, जिनकी कहानी रहस्यमय और चमत्कारिक है. आज हम आपको ऐसे ही एक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो इतिहास, आस्था और अद्भुत घटनाओं से भरा हुआ आज भी लोगों के लिए श्रद्धा का बड़ा केंद्र बना हुआ है. जहां हर आगंतुक के मन में राम नाम की ज्योति और भी प्रखर हो उठती है. बलिया शहर के भृगु मंदिर के ठीक सामने स्थित लगभग 500 साल पुराना श्री राम जानकी अयोध्या धाम मन्दिर इन दिनों अपनी आस्था, इतिहास और कई चमत्कारों के कारण चर्चा में है.

आपको बताते चलें कि यह मंदिर उस परंपरा का हिस्सा है, जिसके बारे में स्थानीय बुजुर्ग विस्तृत जानकारी देते हैं. यहां तीन चरणों में मंदिर का निर्माण हुआ था. पहला पुराना मंदिर समय के साथ गंगा में समा गया, जिसके बाद वर्तमान भृगु मंदिर बना, इन्हीं मंदिरों के सामने स्थापित राम जानकी मंदिर की प्राचीन मूर्ति को आज नये स्वरूप में दोबारा प्रतिष्ठित किया गया है. इसका दोबारा प्राण प्रतिष्ठा ठीक अयोध्या के श्री राम के प्राण प्रतिष्ठा के दिन हुआ था.

ठाकुर जी अयोध्या धाम मंदिर पड़ा नाम

मंदिर के संस्थापक रजनीकांत सिंह के अनुसार, इस मंदिर और अयोध्या के भव्य राम मंदिर के बीच कई रोचक समानताएं भी हैं. दोनों मंदिर लगभग 500 साल बाद दोबारा स्थापित हुए हैं और चौखट बनाने वाले शिल्पकार भी एक ही परिवार के बताए जाते हैं. इतना ही नहीं, जिस दिन अयोध्या में रामलला की प्राणप्रतिष्ठा हुई, उसी दिन यहां भी विग्रह की प्राणप्रतिष्ठा संपन्न हुई. पहले इस स्थान को श्री ठाकुर जी मंदिर कहा जाता था, पर राम भक्तों की आस्था और मांग के बाद इसका नाम बदलकर ठाकुर जी अयोध्या धाम मंदिर रखा गया है.

रजनीकांत सिंह ने चमत्कारों के बारे में बताते हुए कहा कि एक समय की बात है कि गद्दा रजाई कपड़े सूखने के लिए फैलाकर उनका परिवार अपने रिश्तेदारी में चला गया था. इसी बीच तेज बारिश आ गई, लेकिन घर आने पर देखा तो ठाकुर जी की कृपा से कपड़ों पर बारिश की एक बूंद तक नहीं पड़ी है. इसको पूरा परिवार ठाकुर जी का चमत्कार मानता है.

मंदिर के चमत्कारी की कहानी

आज इस मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के साथ-साथ शादी-विवाह, सगाई और वर-वधू देखने जैसे सभी कार्यक्रम पूरी तरह निःशुल्क किए जाते हैं. तीन बड़े हाल हमेशा बुक रहते हैं और लगभग रोज ही किसी न किसी के विवाह कार्यक्रम की गूंज सुनाई देती है. मंदिर सेवा में सालों से जुड़ी बुजुर्ग आशा सिंह अपने कई अनुभवों को चमत्कार बताती हैं. इनके अनुसार, विवाह के बाद से वे लगातार यहां सेवा कर रही हैं और भगवान ने उन्हें कई बार संकट से बचाया है.

वह याद करती हैं कि एक बार गर्भावस्था के दौरान वह छत से गिर गईं, लेकिन राम जानकी का नाम लेते ही उनके पेट में पल रही बेटी को जरा भी चोट नहीं आई थी. एक और घटना में मंदिर के पीछे खड़ा विशाल अमड़ा का पेड़ अचानक गिर पड़ा. वह सीधा मंदिर की दिशा में गिरा, लेकिन आश्चर्य यह कि मिट्टी में जड़ा एक भी ईंट हिली तक नहीं. हालांकि, उस समय यह मंदिर मिट्टी का बना हुआ था.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Bharat.one से जुड़ गए.

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‘झमाझम हुई बारिश, लेकिन बिस्तर सूखा रह गया’, चमत्कारों से भरी मंदिर की कथा

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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