Home Uncategorized unique Miraculous story of this temple statue found during excavation, सूअर के...

unique Miraculous story of this temple statue found during excavation, सूअर के शरीर से सने पानी को राजा ने जैसे ही छुआ, मिट गए सारे दुख-दर्द! रोचक है इस मंदिर की कहानी

0
0


Last Updated:

Ballia News: बलिया के एक मंदिर की कहानी काफी रोचक है. कहा जाता है कि यहां जमीन के नीचे से खुदाई के दौरान मूर्ति निकली, जो आज भी मौजूद है. स्थानीय लोगों में इस मंदिर को लेकर काफी मान्यता है. आइए इस मंदिर की अनोखी कहानी आपको बताते हैं.

बलिया: बलिया को साधुओं की तपोभूमि कहा जाता है, जहां का इतिहास काफी रोचक है. आज हम आपको उन्हीं में से एक ऐसे अद्भुत और चमत्कारिक धार्मिक स्थल के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका अपना एक अलग ही रोचक इतिहास है. जिले के सिकंदरपुर में स्थित चतुर्भुज मंदिर न केवल एक मंदिर, बल्कि आस्था, चमत्कार और इतिहास की जीवंत धरोहर भी है. इस मंदिर की कथा जितनी रोचक है, उतनी ही अजब-गजब और श्रद्धा से भरी हुई इसकी कथा भी है. यह मंदिर बेहद प्राचीन है. इसकी कहानी सीधे प्रतापी राजा सुरथ से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने अपने हाथों से निर्माण किया था.

चतुर्भुज नाथ मंदिर के महंथ महेन्द्र दास ने कहा कि बु जुर्गों के कहने के अनुसार सिकंदरपुर क्षेत्र कभी घना जंगल हुआ करता था. इसी जंगल में एक विशाल पीपल के पेड़ के नीचे राजा सुरथ अपने सेवक मोहन के साथ विश्राम कर रहे थे. राजा उस समय कुष्ठ रोग से पीड़ित थे. अचानक उन्हें पानी की जरूरत पड़ी और उन्होंने मोहन को पानी लाने को भेजा. मोहन ने पूरा इलाका छान मारा, लेकिन कहीं पानी नहीं मिला. अंत में उसे कुछ दूरी पर एक गड्ढा दिखाई दिया, जिसमें एक सूअर लेटी थी और पास ही थोड़ा पानी था. मोहन ने उसी पानी को छानकर राजा के पास लेकर पहुंचा.

पानी का हुआ चमत्कार

अब चमत्कार यहीं से शुरू होता हैं, जब राजा ने वह पानी शरीर पर लगाया, तो जहां-जहां कुष्ठ रोग था, वहां आराम मिलने लगा. राजा ने पानी के स्रोत के बारे में पूछा, लेकिन मोहन डर के कारण टालता रहा. बार-बार पूछने पर वह राजा को उसी गड्ढे तक ले गया. राजा ने स्वयं उस पानी में स्नान किया और उनका कुष्ठ रोग पूरी तरह समाप्त हो गया. घर लौटने के बाद राजा सुरथ को स्वप्न आया, जिसमें स्वयं भगवान ने कहा कि वह इसी पोखरे के नीचे हैं, उन्हें बाहर निकाला जाए. अगले दिन राजा ने उस स्थान की खुदाई करवाई.

कैसे पड़ा चतुर्भुज नाम

खुदाई में भगवान विष्णु की चतुर्भुज मूर्ति प्राप्त हुई, जिनके चारों हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म की माला थी. खुदाई के दौरान फावड़े से बाएं हाथ पर निशान भी लग गया, जो आज भी मौजूद है. इसके साथ ही लक्ष्मी, साली ग्राम सहित अन्य तमाम मूर्तियां भी मिलीं. बाद में शिव जी की मूर्ति भी प्राप्त हुई, जिनका सिर खुदाई में क्षतिग्रस्त हो गया और पूरा पानी खून में बदल गया. राजा सुरथ ने सभी मूर्तियों को मंदिर में स्थापित कराया और तभी से यह स्थान चतुर्भुज मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया. शिवलिंग का नाम अद्भुत महादेव रखा गया. आज यहां दूर-दराज के जिलों से भी श्रद्धालु दर्शन को आते हैं.

पोखरे के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा

मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. दान-पुण्य से मंदिर का निर्माण और विस्तार हो रहा है. जतो दास से लेकर वर्तमान महंत तक, पुजारी परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी इस दिव्य धरोहर की सेवा करता आ रहा है. चतुर्भुज मंदिर आज भी आस्था और चमत्कार की अद्भुत कहानी सुनाता है. हालांकि, स्थानीय निवासी शुभम कुमार पांडेय और रजनीश कुमार पांडेय ने कहा कि वर्तमान में ऐतिहासिक धरोहर के रूप स्थित इस पोखरे का अस्तित्व खतरे में है. आसपास का पूरा गंदा पानी इसी पोखरे में छोड़ा जा रहा है. यहां इतनी बदबू होती है कि जीना मुश्किल हो जाता है. इस पोखरे के अस्तित्व को बचाने की जरूरत है.

About the Author

authorimg

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Bharat.one से जुड़ गए.

homedharm

सूअर के शरीर से सने पानी को राजा ने जैसे ही छुआ, मिट गए दुख-दर्द! रोचक कहानी

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here