Kalanemi Kaun Tha: त्रेतायुग में जब प्रभु राम को 14 साल का वनवास हुआ और लंका का राजा रावण सीता जी का हरण कर ले गया. तो राम और रावण में भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें मेघनाद के हाथों शक्ति लगने से लक्ष्मण मूर्छित हो गए और उस कड़ी में ही कालनेमि का जिक्र आता है. वो कालनेमि सतयुग में ही मारा गया था, लेकिन अचानक से आज कलियुग में वो क्यों ट्रेंड कर रहा है? वहीं कालनेमि द्वापर युग में मथुरा का राजा भी बना था.
‘कालनेमि सनातन को कर रहे कमजोर’
अविमुक्तेश्वरानंद विवाद
कालनेमि कौन था?
रामायण काल यानि त्रेतायुग में कालनेमि को रावण का ममेरा भाई माना जाता है. कालनेमि मायावी राक्षस मारीच का बेटा था, मारीच रावण का मामा लगता था. कालनेमि ने हनुमान जी को छलने और उनको मारने के लिए साधु का रूप धारण किया था.
एक अन्य कथा में कालनेमि को हिरण्याक्ष का बेटा बताया गया है, जिसका वध भगवान विष्णु ने किया था. कालनेमि के भाई का नाम अंधक था. कालनेमि भक्त प्रह्लाद का चचेरा भाई था. जब कालनेमि मारा गया तो भक्त प्रह्लाद ने भगवान विष्णु से उसकी मुक्ति की प्रार्थना की. तब उन्होंने कहा कि अगले जन्म में फिर वो उनके हाथों मारा जाएगा, और तब उसका उद्धार होगा. वही कालनेमि अगले जन्म में कंस के रूप में पैदा हुआ और द्वापर में मथुरा का राजा बना, जिसे विष्णु अवतार श्रीकृष्ण ने मारा.
हनुमान को छलना चाहता था कालनेमि
लंका युद्ध के समय जब मेघनाद ने लक्ष्मण को शक्ति बाण मारा तो वे मूर्छित हो गए. उनके प्राणों की रक्षा के लिए संजीवनी बूटी सूर्योदय से पहले लेकर आनी थी. राम भक्त हनुमान संजीवनी बूटी लाने के लिए हिमालय की ओर उड़ चले. इस बात की जानकारी रावण को हुई तो उसने अपने मायावी भाई कालनेमि को बुलाया. उसने कालनेमि से कहा कि वह हनुमान को रास्ते में ही रोक दे, ताकि सूर्योदय तक वे संजीवनी बूटी लेकर लक्ष्मण तक न पहुंच सकें.
कालनेमि एक पहाड़ी पर साधु का रूप धारण करके एक कुटिया में बैठ गया. अपनी माया से एक सरोवर का निर्माण किया और उसमें एक मकरी को भी रख दिया. वीर हनुमान जब आकाश मार्ग से उड़ते हुए उसके पास से जा रहे थे, तो साधु बने कालनेमि ने जोर जोर से राम नाम का जाप करने लगा. राम नाम सुनते ही हनुमान वहां रूक गए, जिज्ञासावश वे उसके पास गए. वे जानना चाहते थे कि ऐसी जगह पर कौन व्यक्ति है, जो उनके प्रभु के नाम का जाप कर रहा है. हनुमान जब कालनेमि के पास गए तो उसने कहा कि आप थक गए होंगे. सरोवर में जाकर स्नान कर लीजिए.
हनुमान के हाथों मारा गया कालनेमि
हनुमान उसकी बात मान गए और सरोवर में स्नान करने गए तो मकरी ने उनका पैर पकड़ लिया और मारना चाहा. तो भक्त हनुमान ने उसे मार डाला. मकरी का उद्धार हुआ और वह अप्सरा के रूप में उनके सामने प्रकट हुई, जो दुर्वासा ऋषि के श्राप से मकरी बनी थी. उसने कालनेमि का सारा सच बता दिया. तब वीर हनुमान कालनेमि के पास गए, उसे भी मारकर मुक्ति प्रदान की. फिर भक्त हनुमान संजीवनी बूटी लाने के लिए हिमालय के द्रोणागिरी पर्वत की ओर चल दिए.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
