Chandra Grahan 2026 Start: चंद्र ग्रहण आज 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू हो चुका है और यह साल का पहला चंद्र ग्रहण भी है. यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है. खगोलीय घटनाओं में विशेष महत्व रखने वाला यह चंद्र ग्रहण भारत में अपने अंतिम चरण में दिखाई देगा. इस ग्रहण का सूतक काल सुबह 6 बजकर 23 मिनट पर शुरू हो चुका है और मंदिरों के कपाट और होलिका दहन के लिए किए जाने वाले सभी धार्मिक कार्यक्रमों पर रोक लग गई है. वैज्ञानिकों के अनुसार ग्रहण की शुरुआत उपछाया (पेनुम्ब्रा) से हुई, जिसके बाद आंशिक और फिर पूर्ण चंद्र ग्रहण की स्थिति बनी. आइए जानते हैं भारत में कब दिखाई देगा चंद्र ग्रहण और इसका समापन का समय क्या होगा…
आज होगा ब्लड मून
वैज्ञानिकों के अनुसार, चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है. इस दौरान चंद्रमा का रंग तांबे या हल्का लाल दिखाई दे सकता है, जिसे आम भाषा में ब्लड मून कहा जाता है. यह पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित खगोलीय घटना है, जिसे नंगी आंखों से देखा जा सकता है.
अंतिम चरण में दिखाई देगा चंद्र ग्रहण
भारत में केवल ग्रहण का अंतिम चरण ही दिखाई देगा क्योंकि चंद्रमा शाम को देर से उदय होता है. दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों में ग्रहण 6:20 से 6:30 बजे के बीच दिखाई देगा. असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और पश्चिम बंगाल जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में चंद्रमा जल्दी उदय होता है, इसलिए वहां के लोगों को बेहतर देखने को मिलेगा.
चंद्र ग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं
हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. पुराणों में राहु और केतु की कथा से ग्रहण को जोड़ा गया है. मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान अमृत पान करने वाले असुर राहु का सिर भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से अलग कर दिया था. तभी से राहु-केतु सूर्य और चंद्रमा को ग्रसते हैं, जिससे ग्रहण लगता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में पूजा-पाठ, मंत्र जाप और ध्यान करना शुभ माना जाता है. कई श्रद्धालु गंगा स्नान या पवित्र नदियों में स्नान करते हैं. मंदिरों के कपाट ग्रहण के दौरान बंद रखे जाते हैं और ग्रहण समाप्त होने के बाद शुद्धिकरण के बाद ही पुनः खोले जाते हैं. गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसका कोई प्रमाण नहीं है.
क्या करें और क्या ना करें
धार्मिक परंपराओं के अनुसार ग्रहण के दौरान भोजन ना करने और तुलसी के पत्ते भोजन में रखने की परंपरा है. ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है. वहीं वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्र ग्रहण का मानव जीवन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता और सामान्य दिनचर्या जारी रखी जा सकती है.
सूतक काल का समय?
सूतक काल चंद्र ग्रहण शुरू होने से नौ घंटे पहले शुरू हो जाता है और ग्रहण समाप्त होते ही खत्म हो जाता है. इस दौरान मूर्तियों को छूना, शुभ कार्य जैसे शादी, सगाई, रोका, गृह प्रवेश और अन्य धार्मिक कार्य करना वर्जित होता है. चंद्र ग्रहण का सूतक काल सुबह 6 बजकर 23 मिनट से शुरू हो चुका है.
इस बार चंद्र ग्रहण सिंह राशि में पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के अंतर्गत घटित हो रहा है, जो शुक्र का नक्षत्र है. चंद्र ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से हो चुकी है और 6 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी. ग्रहण का प्रभाव पूरे 3 घंटे और 27 मिनट तक रहेगा. चंद्र ग्रहण के समाप्त होने से पहले ही पूर्णिमा तिथि का समापन हो जाएगा.
चंद्र ग्रहण पर भद्रा काल
भद्रा काल की शुरुआत – 2 मार्च, शाम 5 बजकर 58 मिनट से
भद्रा काल समापन – 3 मार्च, सुबह 5 बजकर 30 मिनट तक
कहां कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण?
आज लगने वाला चंद्र ग्रहण पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक, ईरान, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, उत्तर और दक्षिण अमेरिका, रूस और पूरे एशिया में दिखाई देगा.
चंद्र ग्रहण क्यों खास है?
यह चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शाम 6 बजकर 47 मिनट तक लगने वाला है. यह एक दुर्लभ घटना है, जो होलिका दहन के दिन पड़ रहा है. यह चंद्र ग्रहण दिल्ली, मुंबई, उत्तर प्रदेश और अन्य पूर्वोत्तर क्षेत्रों में केवल 25 से 35 मिनट तक ही दिखाई देगा.
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