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Hanuman Jayanti 2025: अष्टसिद्धि नव निधि के दाता… इसमें ‘अष्ट सिद्धि’ का क्या है अर्थ? पंडित जी से जानिए

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Hanuman Jayanti 2025: आज चारोंओर हनुमान जयंती की धूम है. जिसको देखों सब महावली की भक्ति में चूर हैं. बड़ी संख्या में श्रद्वालु हनुमान मंदिर जाकर मंगलमय की कामना कर रहे हैं. कहा जाता है कि, जो भी भक्त सच्चे मन से हनुमान जी की आराधना करते हैं वे उनके जीवन को दुखों से रहित कर देते हैं. ज्योतिष आचार्यों की मानें तो, राम भक्त हनुमान उन 8 चिरंजीवियों में शामिल हैं, जिन्हें अमरता का वरदान प्राप्त है. इनकी इन शक्तियों का वर्णन हनुमान चालीसा और अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है. हनुमान जी की आराधना से आठ प्रकार की सिद्धियां और नौ प्रकार की निधियां साकार हो जाती हैं. यह वरदान उन्हें माता जानकी से मिलता था. अब सवाल है कि आखिर हनुमान चालीसा में वर्णित छंद ‘अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता’ में अष्टसिद्धि का क्या अर्थ है? हनुमान जी के पास कौन सी 8 सिद्धियां हैं? इस बारे में Bharat.one को बता रहे हैं गाजियाबाद के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी-

हनुमान जी को क्यों कहा जाता है अष्टसिद्धि

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, अष्टसिद्धि का अर्थ होता है आठ विशेष प्रकार की अलौकिक शक्तियां, जो किसी भी कार्य को संभव बना सकती हैं. यह योग साधना और तपस्या द्वारा प्राप्त होती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी ने कठोर तपस्या और भक्ति से यह सिद्धियां प्राप्त की थीं.

हनुमान जी की 8 सिद्धियां और उनका अर्थ

अणिमा सिद्धि: इस सिद्धि के द्वारा व्यक्ति अपने शरीर को अणु के समान अत्यंत सूक्ष्य कर सकता है. हनुमान जी ने इस शक्ति का प्रयोग लंका में प्रवेश करने के लिए किया था. जब वे सीता माता की खोज में अशोक वाटिका पहुंचे थे. तब उन्होंने अपने शरीर को बहुत छोटा कर लिया था, ताकि कोई उन्हें देख न सके.

महिमा सिद्धि: इस सिद्धि से व्यक्ति अपने शरीर को अनंत रूप से बड़ा कर सकता है. हनुमान जी ने इस सिद्धि का प्रयोग समुद्र लांधने के लिए विशाल रूप धारण किया था. इसके अलावा, लंका दहन के समय भी उन्होंने अपना बड़ा रूप लिया था.

गरिमा सिद्धि: इस सिद्धि के द्वारा व्यक्ति अपने शरीर को अत्यधिक भारी बना सकता है. भारी भी इतना कि कोई हिला न सके. हनुमान जी ने इस शक्ति का प्रयोग तब किया था, जब उन्हें रावण के पुत्र इंद्रजीत ने ब्रह्मफाश से बांध लिया था. हनुमान जी ने तब अपने शरीर को इतना भारी कर लिया थाी कि कोई उन्हें उठा भी न सका था.

लघिमा सिद्धि: इस सिद्धि से व्यक्ति अपने शरीर को अत्यंत हल्का बना सकता है. हल्का भी इतना कि हवा उड़ जाए या जल में बह जाए. हनुमान जी ने इसी शक्ति का उपयोग समुद्र लांधते समय और आकाश मार्ग में उड़ते समय किया था.

प्राप्ति सिद्धि: इस सिद्धि के माध्यम से व्यक्ति किसी भी स्थान पर तुरंत पहुंच सकता है. यही नहीं, इच्छा वस्तु को भी प्राप्त कर सकता है. हनुमान जी ने इस शक्ति का उपयोग तब किया था, जब वे हिमालय पर्वत से संजीवनी बूटी लाने के लिए गए थे.

प्राकाम्य सिद्धि: इस शक्ति के द्वारा व्यक्ति जल, अकाश और पृथ्वी में स्वतंत्र रूप से विचरण कर सकता है. हनुमान जी जब अशोक वाटिका में सीता माता से मिलने गए थे. तब उन्होंने जल और आकाश में अपनी गति को नियंत्रित किया था.

ईशित्व सिद्धि: इस सिद्धि से व्यक्ति संपूर्ण सृष्टि के तत्वों को नियंत्रित कर सकता है. हनुमान जी ने इसी शक्ति के द्वारा लंका में अग्नि को नियंत्रित किया था. जिससे आग ने केवल राक्षसों के नगर को जलाया था. लेकिन अशोक वाटिका और वहां उपस्थित निर्दोष जीवों को कोई नुकसान नहीं हुआ था.

वशित्व सिद्धि: इस सिद्धि द्वारा व्यक्ति किसी को भी अपने वश में कर सकता है. हनुमान जी ने इस शक्ति उपयोग तब किया था, जब उन्होंने अहिरावण और महिरावण को हराया था.

नौ निधियां कौन-कौन सी हैं

  • पद्म निधि: इस निधि से संपन्न मनुष्य सात्विक होता है.
  • महापद्म निधि: इस निधि से लक्षित भी सात्विक और दानी होता है.
  • नील निधि: इस निधि में सत्व और रज गुण दोनों ही मिश्रित होते हैं.
  • मुकुंद निधि: इस निधि में मनुष्य रजोगुण संपन्न होता है.
  • नन्द निधि: नंद निधि में रज और तम गुणों का मिश्रण होता है.
  • मकर निधि: इससे संपन्न व्यक्ति अस्त्रों का संग्रह करने वाला होता है.
  • कच्छप निधि: कच्छप निधि से संपन्न व्यक्ति तामस गुण वाला होता है.
  • शंख निधि: यह निधि एक पीढ़ी के लिए ही होती है.
  • खर्व निधि: इस निधि से संपन्न व्यक्ति अन्य 8 निधियों का सम्मिश्रण होती है.


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https://hindi.news18.com/news/dharm/hanuman-jayanti-2025-know-the-secret-of-hanuman-jis-eight-siddhis-ashta-siddhi-ka-arth-in-hindi-say-astrologer-9171021.html

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