Home Astrology Kalyug Story: राजा परीक्षित को किस ऋषि ने दिया था श्राप, जिसके...

Kalyug Story: राजा परीक्षित को किस ऋषि ने दिया था श्राप, जिसके कारण कलयुग की हुई थी शुरुआत

0
6


Last Updated:

Kalyug Story: चार काल में से ये चौथा काल चल रहा है जिसे कलयुग कहा जाता है. कलयुग एक ऋषि के श्राप के कारण फलीभूत हुआ. तो चलिए जानते हैं वो कथा जिसके कारण कलयुग की हुई शुरुआत.

राजा परीक्षित को किस ऋषि ने दिया था श्राप, जिसके कारण कलयुग की हुई थी शुरुआत

कलयुग स्टोरी

हाइलाइट्स

  • राजा परीक्षित को ऋषि श्रृंगी ने श्राप दिया था.
  • श्राप के कारण तक्षक नाग ने राजा परीक्षित को डस लिया.
  • राजा परीक्षित की मृत्यु के बाद कलियुग की शुरुआत हुई.

Kalyug Story: पौराणिक कथा के अनुसार द्वापर युग में परीक्षित नाम के एक राजा थे. ये कहानी राजा परीक्षित और कलयुग के आगमन के बारे में है. राजा परीक्षित धनुर्धर अर्जुन के पौत्र और वीर अभिमन्यु के पुत्र थे. वो एक न्यायप्रिय और दयालु राजा के रूप में जाने जाते थे. उनका शासनकाल धार्मिक और शांतिपूर्ण था. प्रजा खुशहाल थी और राज्य में समृद्धि का बोलबाला था.

राजा परीक्षित की कथा
एक दिन राजा परीक्षित नगर में घूम रहे थे जहां उन्होंने कुछ अप्रिय घटनाएं देखीं. उन्होंने देखा कि जीवों के साथ अन्याय हो रहा है और लोगों में दया की भावना कम हो रही है. उन्हें यह देखकर बहुत दुख हुआ. उन्होंने अपने गुप्तचरों से इसके बारे में पता लगाने को कहा. गुप्तचरों ने बताया कि राज्य में कलि नाम का एक मायावी राक्षस आया है जिसके प्रभाव से लोगों में नकारात्मकता फैल रही है.

राजा परीक्षित ने कलि को राज्य से बाहर निकालने का निर्णय लिया. उन्होंने अपनी सेना को आदेश दिया कि कलि को बंदी बना लिया जाए. जब कलि को यह पता चला तो वह राजा के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया और बोला कि वह एक शरणार्थी है और उसे रहने के लिए कोई जगह नहीं है. राजा परीक्षित समझ गए कि कलि धोखेबाज है और उसे रहने की जगह नहीं दी जानी चाहिए. उन्होंने कलि को राज्य से तुरंत निकल जाने का आदेश दिया.

जब कलि ने देखा कि राजा पर उसकी बातों का कोई प्रभाव नहीं हो रहा है तो उसने अपना असली रूप दिखाया और कहा कि वह कोई साधारण राक्षस नहीं बल्कि एक युग है. उसने कहा कि उसका नाम कलयुग है और अब उसका समय आ गया है. ब्रह्मा जी के नियम के अनुसार उसे स्थान देना ही होगा.

कलि की मांगे राजा ने की पूरी
राजा परीक्षित धर्मराज युधिष्ठिर के पौत्र थे और उन्होंने अपने दादा से धर्म के बारे में बहुत कुछ सीखा था. वे जानते थे कि किसी भी युग को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता है. इसलिए उन्होंने कलि को कुछ सीमित जगहें दीं जैसे कि शराब घर, जुआं घर, कसाईखाना और वेश्यालय. कलि ने राजा का आभार व्यक्त किया, लेकिन फिर कहा कि उसे रहने के लिए एक अच्छा स्थान भी चाहिए. उसने कहा कि ये सभी जगहें सीमित हैं और उसे कोई चमकता हुआ स्थान चाहिए.

राजा परीक्षित ने कलि को रहने की जगह दे दी. जैसे ही राजा ने कलि को सोने में स्थान दिया कलि तुरंत राजा के सोने के मुकुट में जा बैठा और राजा की बुद्धि को प्रभावित करने लगा. एक दिन, कलि के प्रभाव में आकर राजा परीक्षित शिकार पर गए और एक हिरण का पीछा करते-करते बहुत दूर वन में पहुंच गए. वहां उन्हें भूख और प्यास लगने लगी. भूख-प्यास से व्याकुल राजा को एक आश्रम दिखाई दिया जहां ऋषि शमीक तपस्या में लीन थे.

राजा परीक्षित को आया क्रोध 
राजा ने ऋषि को प्रणाम करके पानी मांगा लेकिन ऋषि तपस्या में लीन होने के कारण मौन रहे. यह देखकर राजा को बहुत क्रोध आया और वे वहां से जाने लगे. कुछ दूर चलने पर राजा को जमीन पर एक मरा हुआ सांप दिखाई दिया. कलि ने उनकी भूख-प्यास की व्याकुलता को और बढ़ा दिया था इसलिए राजा ने सांप को रास्ते से हटाने के लिए अपनी तलवार से हवा में उछाल दिया. सांप हवा में उछलता हुआ ऋषि के गले पर जा गिरा.

श्रृंगी का श्राप
जब ऋषि के पुत्र श्रृंगी आए तो उन्होंने अपनी दिव्य शक्ति से राजा के इस कार्य का पता लगा लिया. उन्होंने क्रोध में आकर राजा को श्राप दिया कि सात दिनों के अंदर तक्षक नाग उन्हें डस लेगा. राजा परीक्षित को अपने कृत्य पर बहुत पश्चाताप हुआ. उन्होंने ऋषि श्रृंगी से क्षमा मांगी और अपना श्राप वापस लेने के लिए प्रार्थना की. लेकिन ऋषि ने कहा कि उनका श्राप कभी व्यर्थ नहीं जाता. सातवें दिन तक्षक नाग ने उन्हें डस लिया और उनकी मृत्यु हो गई. इस प्रकार राजा परीक्षित की एक गलती के कारण कलियुग पृथ्वी पर आया और राजा परीक्षित को अपनी जान गंवानी पड़ी.

homeastro

राजा परीक्षित को किस ऋषि ने दिया था श्राप, जिसके कारण कलयुग की हुई थी शुरुआत


.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.

https://hindi.news18.com/news/astro/astro-tips-kalyug-story-which-sage-had-cursed-king-parikshit-due-to-which-kalyug-started-janein-kalyug-katha-9027051.html

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version