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Mahavir Jayanti 2025: महावीर जयंती जैन समुदाय के लिए एक बहुत ही पवित्र और विशेष पर्व है. इसे भारत और दुनिया भर में बड़े धूमधाम और श्रद्धा से मनाया जाता है. यह पर्व भगवान महावीर के जन्म की याद में मनाया जाता है….और पढ़ें

महावीर जयंती 2025
हाइलाइट्स
- महावीर जयंती जैन धर्म का प्रमुख पर्व है.
- इस दिन भगवान महावीर की रथ यात्रा निकाली जाती है.
- जैन धर्म के लोग उपवास रखते और मंदिरों में पूजा करते हैं.
Mahavir Jayanti 2025: जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है. इस दिन लोग उनकी शिक्षाओं को याद करते हैं. यह पर्व अहिंसा, सादगी और सभी जीवों के प्रति करुणा का संदेश लेकर आता है. महावीर जयंती जैन धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे देशभर के साथ-साथ विदेशों में बसे जैन समुदाय द्वारा भी पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है. आइए जानते हैं इस दिन पूजा-विधि और महत्व के बारे में.
निकाली जाती है रथ यात्रा
इस दिन का मुख्य आकर्षण भगवान महावीर की रथ यात्रा होती है, जिसमें उनकी प्रतिमा को विशेष अभिषेक के बाद रथ पर सवार कर नगर भ्रमण कराया जाता है. ढोल-नगाड़ों, गायक मंडलियों, हाथियों और घोड़ों के साथ यह भव्य शोभायात्रा मंदिर में जाकर समाप्त होती है, जहां श्रद्धालु भगवान को नमन करते हैं.
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जानिए पूजा विधि
जैन धर्म के लोग इस दिन उपवास रखते हैं और मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं और जैन ग्रंथों का पाठ करते हैं. भगवान महावीर की मूर्ति का जल और दूध से अभिषेक किया जाता है और फल, फूल, चावल और दूध अर्पित कर विशेष पूजा की जाती है. साथ ही, इस दिन लोग सात्विक भोजन बनाते हैं जिसमें प्याज़ और लहसुन का प्रयोग नहीं किया जाता.
जैन धर्म के लोग महावीर जयंती के अवसर पर समाज सेवा और दान-पुण्य के कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन का वितरण किया जाता है. जैन धर्म सादगी और आत्मअनुशासन को महत्व देता है, इसीलिए इस पर्व को भी सादगी और शांति के साथ मनाया जाता है.
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महावीर जयंती का महत्व
जैन धर्मग्रंथों के अनुसार, भगवान महावीर का जन्म चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को हुआ था. उनका जन्म स्थान बिहार का कुंडलग्राम (अब कुंडलपुर) है. बचपन में उनका नाम वर्धमान था और वे राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के पुत्र थे. 30 वर्ष की आयु में महावीर ने सत्य की खोज के लिए अपना घर, राज्य और परिवार छोड़ दिया. 12 वर्षों की कठोर साधना के बाद उन्होंने आत्मज्ञान प्राप्त किया.
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