Ramayan Path Rules: रामायण का पाठ हर हिंदू परिवार में श्रद्धा, भक्ति और विश्वास के साथ किया जाता है. लोग मन की शांति, सकारात्मकता और जीवन में सही दिशा पाने के लिए रामायण को पढ़ते हैं. लेकिन आजकल एक ट्रेंड सा हो गया है कि कुछ लोग गुटका, तंबाकू या पाउच जैसे नशे वाले पदार्थ खाकर तुरंत रामायण का पाठ शुरू कर देते हैं. आम बोलचाल में लोग इसे नॉर्मल मान लेते हैं, लेकिन यह बात कहीं न कहीं हमारी भक्ति, पवित्रता और धर्म की मर्यादा को प्रभावित करती है. इसी को लेकर एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से सवाल पूछा कि क्या तंबाकू या गुटका खाने के बाद रामायण का पाठ करना गलत माना जाता है या फिर यह सिर्फ लोगों की मान्यता है. यह सवाल इसलिए भी ट्रेंड कर रहा है क्योंकि आज की जनरेशन में पूजा से पहले पवित्रता पर इतना ध्यान नहीं दिया जाता जितना पहले दिया जाता था. ऐसे में जानना जरूरी है कि धार्मिक रूप से यह सही है या गलत.
भक्त ने प्रेमानंद महाराज से क्यों पूछा यह सवाल?
वृंदावन स्थित राधा हित केली कुंज आश्रम में प्रेमानंद महाराज से एक भक्त ने बेहद सिंपल टोन में कहा कि वह तो पूरी श्रद्धा से रामायण का पाठ करता है, लेकिन उसके साथ कुछ लोग ऐसे हैं जो तंबाकू और गुटका खाने के बाद ही पाठ शुरू कर देते हैं. जब वह उन्हें रोकता है, तो वे कहते हैं कि कहीं भी ऐसा नहीं लिखा कि नशा करने के बाद रामायण नहीं पढ़ सकते. भक्त ने साफ तौर पर कहा कि उसे यह ठीक नहीं लगता और वह कंफ्यूज है कि सही क्या है और गलत क्या है.
प्रेमानंद महाराज ने क्या कहा?
महाराज ने बिना कोई घुमाव किए सीधी बात कही कि यह बिल्कुल गलत है. उन्होंने कहा कि गुटका, तंबाकू या किसी भी तरह के नशीले पदार्थ का सेवन कर पवित्र ग्रंथों का पाठ करना उचित नहीं है. रामायण जैसे दिव्य और आदर्श ग्रंथ का पाठ साफ मन, साफ वाणी और साफ नीयत से होना चाहिए. नशा करने के बाद पढ़ना सिर्फ गलत ही नहीं बल्कि पवित्र ग्रंथों का अपमान भी माना जाता है.
क्या पान खा सकते हैं? महाराज ने दिया उपाय
प्रेमानंद महाराज ने यह भी बताया कि अगर किसी को आदत हो या मुंह में कुछ रखकर बोलने में आसानी होती हो, तो वह पान खा सकता है. लेकिन यह पान बिल्कुल सूखा होना चाहिए, जिसमें कोई भी नशीला पदार्थ, तंबाकू, चूना या गुटका जैसा मटेरियल न डाला गया हो. उन्होंने साफ कहा कि नशीले पदार्थों का सेवन कर पाठ करना पूर्ण रूप से निषिद्ध है.
धार्मिक दृष्टि से क्यों जरूरी है पवित्रता?
रामायण या किसी भी धार्मिक ग्रंथ का पाठ सिर्फ पढ़ना नहीं होता, बल्कि यह मन और आत्मा की साधना होती है. गुटका या तंबाकू खाने के बाद मुंह की पवित्रता खराब हो जाती है. नशा मन को अस्थिर करता है और वाणी में अशुद्धि लाता है. ऐसे में ग्रंथ का पाठ करने का सही प्रभाव भी नहीं मिलता.
भक्ति में शुद्धता का क्या महत्व है?
शुद्ध मन से की गई प्रार्थना ज्यादा प्रभावी मानी जाती है.
पूजा में शारीरिक और मानसिक पवित्रता का ध्यान रखना बहुत जरूरी है.
नशा मन को विचलित करता है, जिससे पाठ पर ध्यान नहीं रहता.
धार्मिक ग्रंथों का पाठ सम्मान और अनुशासन की मांग करता है.
नशा कर पूजा करने से क्या होता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार नशीले पदार्थों का सेवन कर पाठ करने से पूजा का फल कम हो जाता है. इसे भगवान का अनादर माना जाता है और यह धार्मिक अनुशासन के बिल्कुल खिलाफ है.
क्या यह पाप माना जाता है?
जहां तक पाप की बात है, प्रेमानंद महाराज ने इसे पाप का रूप तो नहीं कहा, लेकिन इसे गलत, अनुचित और मर्यादा के खिलाफ बताया. उन्होंने जोर देकर कहा कि धार्मिक ग्रंथों का सम्मान करना हर भक्त का मूल कर्तव्य है.
लोग ऐसा क्यों करते हैं?
आजकल गुटका और तंबाकू कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है. कई बार लोग आदत के चलते पूजा से पहले भी खा लेते हैं. लेकिन महाराज ने साफ कहा कि यह आदत बदलनी चाहिए.
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