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Vastu for Home Temple। वास्तु अनुसार किस रंग का होना चाहिए पूजा स्थान

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Vastu For Home Temple: अक्सर लोग मंदिर को केवल पूजा का स्थान मानते हैं, लेकिन वास्तु के अनुसार इसका सही दिशा में और सही रंग का होना हमारे मन और शरीर दोनों के लिए बेहद लाभकारी होता है. सही दिशा और स्थान का चयन करने से न सिर्फ मानसिक संतुलन मिलता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी बढ़ता है. सबसे बेहतरीन और शक्तिशाली दिशा जो आपके और ईश्वर के बीच सीधे संबंध बनाने में मदद करती है, वह है ईस्ट-नॉर्थ ईस्ट (पूर्व-उत्तरी पूर्व). इस दिशा में मंदिर बनाने से ऐसा लगता है मानो ईश्वर आपके सबसे अच्छे दोस्त बन गए हैं. वास्तु के अनुसार, जब मंदिर को इस दिशा में रखा जाता है, तो यह आपके जीवन में खुशहाली, सकारात्मक सोच और मानसिक शांति लाता है. यहां बैठकर पूजा करने से आपके मन में एक अलग तरह का संतुलन और सुकून पैदा होता है, अगर आप ध्यान से देखेंगे, तो संसार के बड़े मंदिर भी अक्सर इसी दिशा में बने होते हैं. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा. (रिया काल्पनिक नाम है)

घर में मंदिर बनाना सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति का स्रोत है. ईस्ट-नॉर्थ ईस्ट दिशा में मंदिर बनाने से खुशहाली और आनंद बढ़ता है. साफ-सुथरी व्यवस्था, हल्का रंग और सुबह का समय इस अनुभव को और असरदार बनाते हैं.

1. मंदिर का स्थान चुनते समय घर के अन्य हिस्सों और वातावरण को भी ध्यान में रखना चाहिए. कोशिश करें कि मंदिर शांत और साफ-सुथरे स्थान पर हो. आसपास बहुत अधिक हलचल या ध्वनि न हो, ताकि पूजा करते समय ध्यान और मानसिक शांति बनी रहे. यह जगह जितनी साफ और व्यवस्थित होगी, उतनी ही ऊर्जा आपके जीवन में आएगी.

2. मंदिर का आकार या छोटा-बड़ा होना इतना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि दिशा और साफ-सुथरी व्यवस्था ज्यादा मायने रखती है. पूजा में इस्तेमाल होने वाले सामग्री, दीपक और अगरबत्ती भी ऊर्जा के प्रवाह को प्रभावित करते हैं. कोशिश करें कि यह सभी चीजें स्वच्छ और अच्छी क्वालिटी की हों.

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3. मंदिर की दीवारों का रंग भी ध्यान देने योग्य है. हल्के रंग जैसे सफेद, क्रीम या हल्का पीला मानसिक शांति और ऊर्जा को बढ़ाते हैं. बहुत चमकीले या गहरे रंग से ध्यान भटक सकता है और मानसिक संतुलन पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा, मंदिर में रखें जाने वाले मूर्ति या फोटो की सफाई भी नियमित रूप से करनी चाहिए.

4. इसके अलावा, पूजा करते समय सही समय का भी महत्व है. सुबह के समय, जब सूरज की पहली किरणें आती हैं, यह समय सबसे शुभ माना जाता है. इस समय पूजा करने से न सिर्फ मानसिक शांति मिलती है, बल्कि घर और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी बढ़ता है.

5. मंदिर के आसपास रखे जाने वाले पौधे और छोटे दीपक भी ऊर्जा को संतुलित रखने में मदद करते हैं. छोटे-छोटे दीपक घर की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं और मानसिक शांति के लिए लाभकारी होते हैं. पौधे भी वातावरण को ताजगी और सजीवता प्रदान करते हैं.

6. घर में मंदिर को नियमित रूप से साफ और व्यवस्थित रखना बहुत जरूरी है. जैसे ही आप इसे साफ करेंगे, ऊर्जा स्वतः प्रवाहित होने लगेगी. पूजा के दौरान मन को शांत रखना और सकारात्मक भाव रखना भी उतना ही जरूरी है.

7. इस तरह, घर में मंदिर बनाने के लिए सही दिशा, साफ-सुथरी व्यवस्था, हल्का रंग और सुबह का समय सभी मिलकर आपके जीवन में खुशी और मानसिक संतुलन लाते हैं. ईस्ट-नॉर्थ ईस्ट में मंदिर बनाना सिर्फ वास्तु का नियम नहीं है, बल्कि यह आपके और ईश्वर के बीच सीधे संबंध बनाने का सबसे सरल और असरदार तरीका है.

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