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Bhavai and Kalbelia Dance: भवाई नृत्य के बारे में पूर्ण नाथ बताते है कि बीन डब और ढोल की धुन पर भवाई नृत्य किया जाता है जो राजस्थान का एक रोमांचक और स्टंट-आधारित लोक नृत्य है. इस नृत्य में नर्तक सिर पर कई मटके रखकर, कांच के टुकड़ों, तलवारों या थालियों के किनारों पर संतुलन बनाते हुए अद्भुत करतब दिखाते है जो मुख्य रूप से भवाई जाति द्वारा किया जाता है और अपनी लयकारी व शारीरिक कौशल के लिए प्रसिद्ध है.
छतरपुर जिले के खजुराहो में मप्र संस्कृत विभाग द्वारा आयोजित आदिवर्त जनजाति संग्रहालय में तीसरे आदिवर्त स्थापना समारोह के दौरान राजस्थान से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा मंच गूंज उठा. राजस्थान से आए पूर्ण नाथ कालबेलिया ने बताया कि उनकी टीम जोधपुर से आई है और वे खुद इसे लीड कर रहे है. इस टीम में लड़कियां भवाई और कालबेलिया नृत्य करती है जबकि अन्य सदस्य बीन, डब और ढोल बजाते है. इसके साथ ही कलाकार गीत भी गाते है.
भवाई नृत्य के बारे में पूर्ण नाथ बताते है कि बीन डब और ढोल की धुन पर भवाई नृत्य किया जाता है जो राजस्थान का एक रोमांचक और स्टंट-आधारित लोक नृत्य है. इस नृत्य में नर्तक सिर पर कई मटके रखकर, कांच के टुकड़ों, तलवारों या थालियों के किनारों पर संतुलन बनाते हुए अद्भुत करतब दिखाते है जो मुख्य रूप से भवाई जाति द्वारा किया जाता है और अपनी लयकारी व शारीरिक कौशल के लिए प्रसिद्ध है.
कालबेलिया नृत्य के बारे में पूर्ण नाथ ने बताया कि वे खुद कालबेलिया समुदाय से आते है. यह नृत्य राजस्थान का एक प्रसिद्ध लोक नृत्य है. जिसे सपेरा समुदाय की महिलाएं करती है. इसमें वे नागिन की तरह लचकदार और घुमावदार मुद्राओं में नृत्य करती है. जिसे ‘सपेरा डांस’ भी कहते है.
गौरतलब है कि साल 2010 में इस नृत्य को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया था. नर्तकियां काले रंग के घाघरे और रंगीन पारंपरिक वस्त्र पहनती है और पुरुष पुंगी व ढोलक जैसे वाद्य यंत्र बजाते है.
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https://hindi.news18.com/news/madhya-pradesh/chhatarpur-the-bhawai-and-kalbelia-dances-of-rajasthan-captivated-the-audience-in-khajuraho-local18-ws-d-10018597.html
