क्या आपने कभी सोचा है कि सोलह श्रृंगार में सोने की पायल का जिक्र क्यों नहीं है? क्यों महिलाएं पैरों में सिर्फ चांदी ही पहनती हैं?लखनऊ के प्रसिद्ध काली मंदिर के महंत स्वामी हंसानंद के अनुसार, शरीर का नाभि से ऊपर का हिस्सा ‘सूर्य’ और ‘गुरु बृहस्पति’ का प्रतीक माना जाता है. सोना गुरु का रत्न है, जिसे चरणों में पहनना देवताओं का अपमान माना जाता है. साथ ही, सोने में मां लक्ष्मी का वास होता है, इसलिए इसे पैरों में पहनने से धन की हानि और दरिद्रता आती है.विज्ञान की दृष्टि से भी सोने को पैरों में नहीं पहनना चाहिए, इसके वैज्ञानिक कारण है.विज्ञान की दृष्टि से चांदी एक ठंडी धातु है, जबकि सोना गर्म. पैरों में चांदी पहनने से शरीर का तापमान संतुलित रहता है और ठंडक सिर तक पहुँचती है. चांदी पहनने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, हड्डियां मजबूत होती हैं और पैरों की सूजन कम होती है.वीडियो में देखिए महंत स्वामी हंसानंद ने क्या कहा है इस बारे में.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
https://hindi.news18.com/videos/lifestyle/culture-why-women-do-not-wear-gold-anklets-astrological-scientific-benefits-of-silver-hindi-10079400.html
