भारतीय सेना की वर्दी सिर्फ पहनावा नहीं, बल्कि अनुशासन, पहचान और देशभक्ति का प्रतीक है. समय के साथ सेना की जरूरतें बदलीं, युद्ध के तरीके बदले और उसी के अनुसार वर्दी का रंग, कपड़ा और डिजाइन भी बदलता गया. भारतीय सेना की यूनिफॉर्म का इतिहास कई दौरों से होकर गुजरा है, जिसमें हर बदलाव के पीछे एक खास वजह रही है.
भारतीय सेना की वर्दी की शुरुआत ब्रिटिश शासनकाल से मानी जाती है. उस समय ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में भारतीय सैनिकों को भी ब्रिटिश सैनिकों जैसी वर्दी पहनाई जाती थी. सबसे पहचानने योग्य वर्दी लाल रंग का कोट था, जिसे स्कारलेट ट्यूनिक कहा जाता था. यह वर्दी दूर से आसानी से नजर आ जाती थी और ब्रिटिश साम्राज्य की ताकत और पहचान का प्रतीक मानी जाती थी. हालांकि भारत जैसे गर्म और धूल भरे इलाकों के लिए यह वर्दी ज्यादा व्यावहारिक नहीं थी.

1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश सेना को यह समझ में आया कि युद्ध के मैदान में चमकीले रंग नुकसानदेह हो सकते हैं. इसी वजह से धीरे-धीरे लाल वर्दी की जगह खाकी रंग की वर्दी लाई गई. खाकी रंग मिट्टी और धूल में आसानी से घुल-मिल जाता था, जिससे सैनिक दुश्मन की नजर से बचे रहते थे. इसके अलावा यह रंग भारतीय मौसम के हिसाब से भी ज्यादा आरामदायक साबित हुआ. कुछ ही समय में खाकी वर्दी भारतीय सेना की पहचान बन गई.
1947 में आजादी के बाद भारतीय सेना ने अपनी अलग पहचान बनाने के लिए वर्दी में बदलाव किए. खाकी की जगह ओलिव ग्रीन रंग को अपनाया गया. यह रंग न केवल व्यावहारिक था, बल्कि भारतीय सेना को पड़ोसी देशों की सेनाओं से अलग पहचान भी देता था. 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान यही ओलिव ग्रीन वर्दी भारतीय सैनिकों की मुख्य यूनिफॉर्म रही.
1947 में आजादी के बाद भारतीय सेना ने अपनी अलग पहचान बनाने के लिए वर्दी में बदलाव किए. खाकी की जगह ओलिव ग्रीन रंग को अपनाया गया. यह रंग न केवल व्यावहारिक था, बल्कि भारतीय सेना को पड़ोसी देशों की सेनाओं से अलग पहचान भी देता था. 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान यही ओलिव ग्रीन वर्दी भारतीय सैनिकों की मुख्य यूनिफॉर्म रही.
बाद के वर्षों में युद्ध की तकनीक और रणनीति बदलती गई. जंगलों, पहाड़ों और सीमावर्ती इलाकों में लड़ाई के लिए साधारण रंग की वर्दी पर्याप्त नहीं थी. इसी जरूरत को देखते हुए भारतीय सेना ने कैमोफ्लाज पैटर्न की वर्दी अपनाई. ब्रश स्ट्रोक पैटर्न वाली यह यूनिफॉर्म सैनिकों को प्राकृतिक माहौल में छिपने में मदद करती थी और सुरक्षा बढ़ाती थी.
21वीं सदी में भारतीय सेना की वर्दी और भी आधुनिक होती गई. हाल के वर्षों में डिजिटल कैमोफ्लाज पैटर्न वाली नई कॉम्बैट यूनिफॉर्म पेश की गई, जो हल्की, मजबूत और हर तरह के मौसम में आरामदायक है. इस वर्दी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह जंगल, रेगिस्तान और पहाड़ी इलाकों में समान रूप से प्रभावी रहे. साथ ही इसमें आराम, गोपनीयता और टिकाऊपन का भी खास ध्यान रखा गया है.
आज भारतीय सेना की वर्दी सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि आधुनिक जरूरतों का मेल है. लाल कोट से लेकर डिजिटल कैमोफ्लाज तक का यह सफर दिखाता है कि भारतीय सेना ने समय के साथ खुद को कैसे ढाला है. वर्दी का हर बदलाव इस बात का प्रमाण है कि सेना ने हमेशा अपने जवानों की सुरक्षा, सुविधा और देश की रक्षा को प्राथमिकता दी है.
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/culture-history-of-indian-army-uniform-changes-journey-to-digital-camouflage-ws-ekl-10066996.html
