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Khedapati Hanumanji Mandir: मंदिर खरगोन में नर्मदा नदी किनारे ग्राम तेली भट्याण में मौजूद है. इस मंदिर ब्रह्मलीन संत पूज्य सियाराम बाबा से भी संबंध है. आज बड़ी संख्या में लोग यहां आते हैं. उस स्थान का दर्शन करते हैं, जहां हनुमानजी दीवार में चुने हुए हैं. जानें कथा…
Khedapati Hanumanji Mandir: देशभर में हनुमानजी के लाखों मंदिर हैं, जहां से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है. इन मंदिरों में हनुमानजी विभिन्न स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देते हैं. लेकिन, मध्य प्रदेश में हनुमानजी का एक मंदिर ऐसा भी है, जहां एक घटना के बाद अनारकली की तरह बजरंगबली को ही दीवार में चुनवा दिया. 30-35 साल में किसी ने भी मूर्ति के दर्शन नहीं किए. कई लोग यह भी नहीं जानते कि मूर्ति का स्वरूप कैसा है? फिर भी मंदिर से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी है.
हैरानी की बात तो ये कि इतने वर्षों बाद भी मूर्ति को बाहर निकालने की हिम्मत किसी में नहीं है. यह अनोखा मंदिर खरगोन की कसरावद तहसील में नर्मदा नदी किनारे बसे ग्राम तेली भट्याण में मौजूद है. खेड़ापति हनुमान के नाम से यह मंदिर प्रसिद्ध है. कहते हैं कि यहां हनुमानजी की करीब साढ़े तीन फीट ऊंची मूर्ति स्थापित है, जो बेहद प्राचीन है. कई बार नर्मदा में बाढ़ आई पर मूर्ति अपनी जगह से हिली तक नहीं ओर न ही मंदिर को कोई क्षति पहुंची. लोग इसे भगवान का चमत्कार मानते हैं.
इसी मंदिर के सामने सियाराम बाबा ने की तपस्या
बताते हैं कि निमाड़ के प्रसिद्ध ब्रह्मलीन संत सियाराम बाबा ने इसी मंदिर में विराजित हनुमानजी के सामने पेड़ के नीचे खड़े होकर लगभग 12 साल तक खड़ेश्वरी तपस्या की थी. सियाराम बाबा हनुमानजी के परम भक्त थे. रोजाना सुबह-शाम वे यहां दीया जलाते थे. शनिवार के दिन भगवान को चोला चढ़ाते थे. उन्होंने अपना पूरा जीवन एक लंगोट में पूरा किया. हर दिन लगभग 18 घंटे एक ही जगह बैठकर रामायण का पाठ करते थे. अमीर हो या गरीब उनके लिए सब एक समान थे.
30 साल पहले हुआ था बड़ा विवाद
लेकिन, एक घटना ने सियाराम बाबा को इतना मजबूर कर दिया कि जिस हनुमान प्रतिमा को वे दिन-रात देखते थे, उनकी पूजा करते थे, एक दिन अपने हाथों से उसे दीवारों में चुनना पड़ा. ग्रामीण रमेश केवट और ताराचंद पाटीदार बताते हैं कि लगभग 30-35 साल पहले एक दलित शराब पीकर हनुमानजी पर पानी चढ़ाने आया था, जिसे ग्रामीणों ने रोका पर वह माना नहीं और पानी चढ़ा दिया. इस बात पर गांव में भारी हंगामा हुआ. विवाद मारपीट तक पहुंच गया. फिर सियाराम बाबा के समझाने पर मामला शांत हुआ.
अपने हाथों से आराध्य को दीवार में चुनवाया
इस घटना से बाबा को बहुत दुख पहुंचा. उन्होंने गांव में सामाजिक समरता बनाए रखने के लिए एक बड़ा फैसला लिया. विवाद के 3-4 दिन बाद सियाराम बाबा ने खुद अपने हाथों से अपने आराध्य देव हनुमाजी को दीवार में चुनवा दिया. मंदिर के चारों और ऊंची दीवारें खड़ी करके ऊपर से सीमेंट डाल दी. तब से आज तक हनुमानजी उन्हीं दीवारों में कैद हैं. अब पूजा भी बाहर से ही होती है और चोला भी बाहर से ही चढ़ता है. सनावद से आए भक्त ने बताया कि वे 3 साल से तेली भट्याण आश्रम आ रहें है. लेकिन, कभी हनुमानजी की मूर्ति के दर्शन नहीं हुए. बाहर से दर्शन करके लौटना पड़ता है.
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