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ग्रह बाधाओं से हैं परेशान, तो प्रदोष व्रत पर करें भोलेनाथ के साथ ग्रहों के स्वामी की कुछ इस तरह पूजा-अर्चना


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पौष मास में ग्रहों के स्वामी सूर्य देव का प्रकाश और गति मंद पड़ जाती है जिस कारण त्रयोदशी तिथि का व्रत और प्रदोष काल में भोलेनाथ की आराधना के साथ ग्रहों के स्वामी सूर्य देव की स्तुति करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है. चलिए विस्तार से जानते हैं. 

हरिद्वार: हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल में कुल 24 प्रदोष व्रत का आगमन मानव कल्याण के लिए होता है. यह तिथि भगवान शिव को सबसे अधिक प्रिय होती है और सभी पक्ष में त्रयोदशी तिथि को करने का विधान बताया गया है. त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना और उनके मंत्रों का जाप बेहद ही फलदाई होता है. पौष मास में ग्रहों के स्वामी सूर्य देव का प्रकाश और गति मंद पड़ जाती है, जिस कारण त्रयोदशी तिथि का व्रत और प्रदोष काल में भोलेनाथ की आराधना के साथ ग्रहों के स्वामी सूर्य देव की स्तुति करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है. चलिए विस्तार से जानते हैं…

प्रदोष व्रत बेहद फलदाई

प्रदोष व्रत और ग्रहों के स्वामी सूर्य देव की आराधना करने से होने वाले लाभ की ज्यादा जानकारी देते हुए हरिद्वार के विद्वान धर्माचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि पौष मास कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत बेहद फलदाई है. इस दिन यदि भोलेनाथ की आराधना के साथ सूर्य देव की स्तुति भी की जाए, तो मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होने के साथ ही सभी ग्रहों का शुभ प्रभाव मिलता है और ग्रहों की बाधा भी खत्म हो जाएगी.

त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को समर्पित

प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की स्तुति उनके स्तोत्र या मंत्र का 108 बार जाप करने का विधान होता है. त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को समर्पित होती है और श्रद्धा भक्ति भाव से धार्मिक कार्य करने पर यश की प्राप्ति होने के साथ दीर्घकालिक रोग खत्म हो जाते हैं साथ ही ग्रहों का दुष्प्रभाव भी खत्म होने की धार्मिक मान्यता है.

क्या है तिथि और समय

वह आगे बताते हैं कि प्रदोष काल यानी सूर्य से 45 मिनट पूर्व और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद वाला समय प्रदोष काल होता है जो दोपहर के बाद आता है यह समय मात्र 90 मिनट का होता है. 17 दिसंबर बुधवार के दिन होने वाला पौष मास का पहला प्रदोष व्रत इसलिए भी खास होगा, क्योंकि भगवान शिव के साथ ग्रहों के स्वामी सूर्य देव की आराधना करने पर अनेक चमत्कारी लाभ मिलेंगे.

वैदिक पंचांग के अनुसार प्रयोग की तिथि की शुरुआत 16 दिसंबर को सुबह 11:53 से हो जाएगी जो 17 दिसंबर को पूरा दिन रहेगी. 17 दिसंबर को प्रदोष काल शाम 4:26 से शुरू हो जाएगा जो शाम 5:56 तक होगा. उदया तिथि के अनुसार यह चमत्कारी व्रत बुधवार 17 दिसंबर को किया जाएगा.

About the Author

Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

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साल के आखिरी प्रदोष व्रत पर बन रहे हैं कई शुभ संयोग, जानें व्रत की तारीख-पूजा

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