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Shukra Pradosh Vrat 2026 Shubh Sanyog: जनवरी के अंतिम प्रदोष व्रत पर 4 शुभ संयोग बन रहे हैं. इसकी वजह से यह शुक्र प्रदोष व्रत और भी पुण्य फलदायी हो गया है. शुक्र प्रदोष माघ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को है. यह माघ माह का भी अंतिम प्रदोष व्रत है. शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय में करते हैं. इस बार पूजा का शुभ मुहूर्त 2 घंटे 38 मिनट का है. प्रदोष व्रत में भगवान शिव को गंगाजल, शहद, चंदन, बेलपत्र आदि चढ़ाते हैं, लेकिन कुछ वस्तुओं को चढ़ाना वर्जित है. शिव जी की पूजा में उनको नहीं चढ़ाते हैं. आइए जानते हैं शुक्र प्रदोष व्रत पर बनने वाले 4 शुभ संयोग, पूजा मुहूर्त और शिव जी को क्या नहीं चढ़ाते हैं?
प्रदोष व्रत पर बनने वाले 4 शुभ संयोग: 30 जनवरी को पड़ने वाले प्रदोष व्रत पर जया एकादशी व्रत का पारण होना है. इसके बाद दूसरा संयोग है कि प्रदोष के साथ शुक्रवार व्रत हैं, जिसमें माता लक्ष्मी और मां दुर्गा की पूजा होती है. तीसरा संयोग रवि योग का बना है, जो त्रयोदशी में 31 जनवरी को 03:27 ए एम से 07:10 ए एम तक है. चौथा संयोग सर्वार्थ सिद्धि योग का बना है, वह भी रवि योग के साथ ही है.
शुक्र प्रदोष मुहूर्त: पंचांग के अनुसार, शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम में 5 बजकर 59 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 37 मिनट तक है. ऐसे ही माघ शुक्ल त्रयोदशी तिथि 30 जनवरी को 11:09 एएम से लेकर 31 जनवरी को 8:25 एएम तक है.
शुक्र प्रदोष के शुभ समय: शुक्र प्रदोष के दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12:13 पी एम से लेकर 12:56 पी एम तक है. वहीं प्रदोष का निशिता मुहूर्त देर रात 12:08 ए एम से लेकर 01:01 ए एम तक है.
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भगवान शिव को क्या न चढ़ाएं: शिव जी की पूजा में तुलसी के पत्तों का उपयोग नहीं करते हैं. तुलसी श्रापित हैं. वैसे भी भगवान शिव ने तुलसी यानि वृंदा के पति जालंधर का वध किया था.
भगवान शिव को पूजा में हल्दी, रोली और सिंदूर अर्पित नहीं करते हैं. इन वस्तुओं को सौंदर्य सामग्री के रूप में उपयोग होता है. शिव जी अघोरी हैं.
देवों के देव महादेव को केतकी और केवड़े का फूल नहीं चढ़ाते हैं. शिव पुराण में इसका कारण बताया गया है. शिव पूजा में शंख भी वर्जित है, शिव जी ने शंखचूड़ नामक असुर को मारा था.
भगवान शिव को पूजा में नारियल नहीं चढ़ाते हैं क्योंकि नारियल को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है और वे विष्णुप्रिया हैं. इसके अलावा शिव जी को टूटे हुए चावल, कटे-फटे बेलपत्र आदि भी नहीं चढ़ाते हैं.
