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यह देव रथ ब्यास ऋषि के पुत्र और पराशर ऋषि के पोते शुकदेव ऋषि का है और इन्हें महान मुनि माना गया है. एक कथा के अनुसार शिव जी, जब माता पार्बती को अमर गाथा सुना रहे थे, तो वह बीच में सो गई थी, लेकिन एक तोते ने यह गाथा पूरी सुन ली थी. वहीं शुकदेव ऋषि थे, जिसके बाद वह अमर हो गए और ब्यास ऋषि ने इन्हें अपने पुत्र का स्थान दिया.
