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करौली के चटीकना बाजार स्थित लक्ष्मी मिष्ठान भंडार की मिर्ची जैसी दिखने वाली मिठाई दिवाली का खास आकर्षण है. पिछले 30 सालों से बन रही इस मिठाई को अब दुकान के संस्थापक के नाती धर्मेंद्र शर्मा तैयार करते हैं.
करौली के चटीकना बाजार में स्थित लक्ष्मी मिष्ठान भंडार पर मिर्ची जैसी दिखने वाली यह मिठाई पिछले 30 सालों से बनाई जा रही है. पहले इसे दुकान के पहले संस्थापक बनाते थे, अब उनके नाती धर्मेंद्र शर्मा इस अनोखी मिठाई को बना रहे है.
हरी और लाल मिर्च की तरह दिखने वाली यह मिठाई ग्राहकों को पहली नजर में चौंका देती है. लेकिन इसका स्वाद मीठा और लाजवाब होता है. इसमें असली मिर्च का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं होता.
इस मिर्ची की मिठाई बनाने के लिए सबसे पहले मैदा, सूजी और घी मिलाकर आटा गूंथा जाता है. यही आटा मिठाई का बेस तैयार करता है.
गूंथे हुए आटे में हरा और लाल फूड कलर मिलाकर छोटे-छोटे टुकड़े बनाए जाते हैं. इन्हीं टुकड़ों को मिर्ची जैसा आकार दिया जाता है ताकि मिठाई असली मिर्च जैसी दिखे.
आकार देने के बाद इन मिर्चियों को धीमी आंच पर घी में तला जाता है. तलने से मिठाई कुरकुरी हो जाती है और इसका असली स्वाद निखरकर सामने आता है.
तली हुई मिर्ची को दो तार वाली गाढ़ी चीनी की चाशनी में डाला जाता है. यही स्टेप मिठाई को असली मीठा स्वाद देता है और इसे खाने लायक बनाता है.
चाशनी में डालने के बाद इस मिठाई को करीब 2 से 3 घंटे तक ठंडा किया जाता है. ठंडी होने के बाद यह मिर्ची जैसी मिठाई पूरी तरह तैयार हो जाती है.
इस मिठाई को साल में सिर्फ एक बार दिवाली पर ही बनाया जाता है. ₹400 किलो की कीमत वाली इस अनोखी मिठाई का स्वाद लेने के लिए लोग महीनों पहले से ऑर्डर बुक कराते हैं.
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